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बच्चा बदलने का मामला : हाईकोर्ट ने दो सप्ताह में मांगी कंप्लाइंस रिपोर्ट

बच्चा बदलने का मामला : हाईकोर्ट ने दो सप्ताह में मांगी कंप्लाइंस रिपोर्ट

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शिमला। राजधानी के कमला नेहरू अस्पताल में बच्चा बदलने के मामले में हिमाचल प्रदेश हाईकोर्ट ने अस्पताल प्रशासन से दो सप्ताह में कंप्लाइंस रिपोर्ट मांगी है। गुरुवार को हाईकोर्ट में चीफ जस्टिस मंसूर अहमद मीर और जस्टिस संदीप शर्मा की अदालत में सुनवाई हुई। कोर्ट में दोनों बच्चों के अभिभावक पेश हुए व बच्चों की अदला-बदली की जानकारी अदालत को दी।

shimla-1अभिभावकों जितेंद्र व अंजना और अनिल व शीतल ने कोर्ट को बताया कि अन्न ग्रहण रस्म के बाद बच्चे एक-दूसरे को दे दिए हैं। वे संतुष्ट हैं। इसके बाद कोर्ट ने याचिका का निपटारा कर दिया। इसके अलावा इसी मामले में चल रहे क्रिमिनल ट्रायल में कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए कम्प्लाइंस रिपोर्ट मांगी है ताकि भविष्य में इस तरह की लापरवाही वाली घटना न हो।

shimla-9एडवोकेट रीता गोस्वामी ने बताया कि कोर्ट ने सरकार से जवाब मांगा है। इस तरह की घटनाएं रोकने के लिए कड़े कदम उठाने की भी बात कही है। बता दें कि कोर्ट के कार्रवाई के दौरान व बाद में भी दोनों अभिभावक भावुक दिखे। शीतल को बेटा सौंपने वाली मां अंजना ने रुंधे हुए गले के साथ कहा कि ऐसी लापरवाही अस्पताल में दोबारा नहीं हो जानी चाहिए, ये सुनिश्चित किया जाए। चूंकि वे बहुत परेशानी से गुजरे हैं। एक तो अस्पताल में बदतमीजी की जाती है ऊपर से ऐसी घटनाएं अंदर तक झकझोर कर रख देती हैं। अगर अस्पताल में बच्चा बदलने के दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई नहीं हुई तो सारी माताएं एकत्रित होकर धरना देने को मजबूर होंगी।

पांच माह बाद मिले असली मां-बाप

यशपाल/ लेखराज/ शिमला। पांच माह पूर्व जुदा हुए खून के रिश्ते आखिरकार दूध का रिश्ता निभाकर असल मां-बाप के पास पहुंच गए। बुधवार को शीतल को अपना बेटा मिल गया तो वही अंजना को अपनी असली बेटी। हिमाचल प्रदेश उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद दोनों परिवारों ने पूजा अर्चना एवं विधि विधान से बच्चे अदला- बदली कर लिए। बुधवार को अन्न ग्रहण की रस्म अंजना के घर पर रखी गई थी। ये मौका ख़ुशी का कम गम का ज्यादा था। दोनों माताओं की आंखों में आंसू थे। शायद ये पांच महीने की ममता के आंसू थे, जो आज छलक कर बाहर आ गए। दरअसल  26 मई को प्रदेश के एकमात्र महिला अस्पताल कमला नेहरू में बच्चों की अदलाबदली की गई थी। शीतल जो पेशे से नर्स है, पहले उसकी संतान एक बेटी है, जिसका बेटा अंजना को दे दिया गया, जबकि अंजना जिसकी पहली संतान बेटा है। उसको बेटी थमा दी गई। पुलिस डीएनए और कोर्ट के फैसले के आधार पर बुधवार को दोनों के अविभावकों ने बच्चे अदला-बदली किए। अंजना का कहना है कि उनके पास बेटा है और उसे बेटी की चाहत थी, लेकिन जब बेटा उन्हें दिया गया तो पांच माह तक पालने के बाद उन्हें बच्चे से मोह हो गया है। ऐसे में बिछड़ने का गम हो रहा है।

  • गमगीन माहौल में नम आंखों से दोनों माताओं ने एक-दूसरे को सौंपे बच्चे

बेटे की असली मां शीतल का कहना है कि ये पांच माह का वक़्त बड़े दर्द के साथ गुजरा है। वह भी पेशे से एक नर्स है यदि उसके साथ ऐसा हो गया तो आम जनता के साथ क्या होता होगा। इसलिए अस्पताल में जो भी दोषी हैं, उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई अमल में लाई जाए ताकि आगे से इस तरह की लापरवाही सामने न आए। बाकि जिस बच्ची को पांच माह तक अपना दूध पिलाया, उससे बिछड़ने का गम भी है। लेकिन वह इससे मिलते रहेंगे ताकि मंडी और शिमला का ये रिश्ता दोनों भाई-बहनों की तरह बना रहे। उधर कमला नेहरू अस्पताल में बच्चे की अदला-बदली मामले में मंगलवार को पुलिस ने अस्पताल की स्टाफ नर्स पुष्पा देवी व मिड वाइफ रूप देवी को अपनी हिरासत में लिया था। ये दोनों बच्चा अदली-बदली के दौरान लेबर रूम में तैनात थीं। इस मामले में अस्पताल के और कर्मचारियों की गिरफ्तारी हो सकती है।

पुलिस के अनुसार हिरासत में ली गई स्टाफ नर्स पुष्पा देवी करसोग व मिड वाइफ रूप देवी पंचकूला की रहने वाली है। पुलिस द्वारा यह कार्रवाई फोरैंसिक लैब की डीएनए जांच में बच्चे को बदलने का खुलासा होने के बाद की गई। मामला हाईकोर्ट में जाने के बाद उसी रात पैदा हुए नवजातों व उनके अभिभावकों का डीएनए परीक्षण हुआ। जिसमें पुष्टि हुई कि नवजात की अदला बदली हुई है। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक भजन देव नेगी ने कहा की   कमला नेहरू अस्पताल में शीतल नामक महिला की 26 मई की रात डिलीवरी हुई थी। तब डयूटी पर तैनात नर्स ने उसे बेटा होने की सूचना दी,लेकिन 20-25 मिनट बाद उसे बेटी थमा दी गई। 

https://youtu.be/s1xLCMMyXsA

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