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NGT आदेश: जन संघर्ष समन्वय समिति लड़ेगी जंग, अधिवेशन में किया गठन

NGT आदेश: जन संघर्ष समन्वय समिति लड़ेगी जंग, अधिवेशन में किया गठन

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लोकिन्दर बेक्टा/ शिमला। एनजीटी के शिमला शहर को लेकर आए आदेश के बाद राजधानी में भवन मालिकों की सांस अटकी हुई है। इस आदेश के बाद पैदा हुई स्थिति से निपटने के लिए आज शिमला नागरिक सभा ने यहां अधिवेशन बुलाया। अधिवेशन में इस आदेश को जनता विरोधी और लोकतंत्र विरोधी करार दिया गया। अधिवेशन में कहा गया कि इस फैसले का असर इतना गहरा होगा कि शिमला में आम जनता का जीना दुभर हो जाएगा।

  • फैसले को  बताया जनता और लोकतंत्र विरोधी, फैसले को रिव्यू करे सरकार

इस अधिवेशन में आए लोगों का कहना है कि उन्होंने अपनी जीवनभर की पूंजी पहले प्लाट लेने और फिर भवन बनाने में लगाई है और रातोंरात एक ऐसा आदेश आ जाता है, जिसने उनकी नींद उड़ा दी है। सरकार को उन्हें इस फैसले से राहत दिलानी चाहिए और सरकार को इस फैसले को रिव्यू करना चाहिए। एनजीटी  के आदेश के खिलाफ लड़ाई लड़ने को आज यहां हुए सम्मेलन में शिमला जन संघर्ष समन्वय समिति का गठन किया गया। सम्मेलन में सर्वसम्मति से गोविंद चतरांटा को समिति का संयोजक चुना गया।

आदेश के अनुसार पूरे भवन को रेगुलर करने को देने होंगे 50 से 60 लाख

माकपा नेता राकेश सिंघा ने कहा कि एनजीटी का आदेश ऐसा है, जो लोगों को उजाड़ेगा। उन्होंने कहा कि एनजीटी का आदेश अमानवीय, अलोकतांत्रिक  और अव्यावहारिक है। इस आदेश से लोगों की चिंता वाजिब है और इसके खिलाफ लड़ने के लिए लोगों की सहभागिता को बढ़ाना होगा। शिमला नागरिक सभा के अध्यक्ष विजेंद्र मेहरा ने कहा कि एनजीटी का निर्णय शिमला शहर की जनता पर तानाशाही है। उनका कहना था कि इस ऑर्डर को लागू करवाने के लिए बनी मॉनिटरिंग कमेटी के ज्यादातर सदस्य हिमाचल प्रदेश और शिमला से बाहर के हैं।

मेहरा ने कहा कि इस निर्णय के अनुसार घरेलू भवनों को नियमित करने के लिए 5 हजार रुपये प्रति वर्ग फीट व कमर्शियल भवनों को नियमित करने के लिए 10 हजार प्रति वर्ग फीट व पूरे भवन को रेगुलर करने के लिए 50 से 60 लाख रुपये देने होंगे। इतनी भारी राशि चुकाने के बजाय जनता को भवन छोड़ने के लिए मजबूर होना पड़ेगा। मेहरा ने कहा कि इस निर्णय के कारण शिमला प्लानिंग एरिया के तहत आने वाली आस.पास की दर्जनों पंचायतों के बाशिंदों को भी भारी नुकसान उठाना होगा। सम्मेलन में इस आदेश से पैदा हुई स्थिति से लड़ने को लेकर विस्तार से चर्चा की जा रही है। 

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