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MC Election: अब की बार पानी के नाम पर होगी राजनीति

MC Election: अब की बार पानी के नाम पर होगी राजनीति

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राजधानी की प्यास बुझाने वाली योजनाएं केवल कागजों में

MC election: शिमला। नगर निगम चुनाव में इस बार पानी अहम मुद्दा रहने वाला है। पानी की कमी से राजधानी त्रस्त रहती है और लोगों को पानी के लिए जूझना पड़ता है। इसके समाधान के नाम पर केवल कागजों में योजनाएं बनाई जाती है लेकिन वे जमीन पर नजर नहीं आती। शिमला शहर का जिस रफ्तार से विस्तार हो रहा है उसके मुताबिक पानी को लेकर कोई योजना सामने नहीं आ रही। शहर में आज भी गुम्मा पेयजल योजना से बड़ी सप्लाई हो रही है। यह योजना अंग्रेजों के जमाने की है।

आजाद भारत में शिमला के लिए अश्वनी खड्ड और फिर गिरी पेयजल योजना बनी। आज की तारीख में गुम्मा और गिरी पेयजल योजना ही शहर के लोगों की प्यास बुझा रही है। इसके अलावा किसी और बड़ी योजना से राजधानी के बाशिदों को पानी नहीं मिल रहा है। कुछ साल पहले अश्वनी खड्ड से पानी उठाया था और वहां से भी शहर को पानी मिलता था लेकिन इसमें दिक्कत रहती थी और कई बार पीलिया भी इस पानी से फैला था और पिछले साल इस पानी में सीवरेज के जाने से इससे यहां पीलिया फैल गया था। इसे देखते हुए अश्वनी खड्ड से पानी उठाना बंद कर दिया था। इसके बाद शिमला में पानी की और कमी होने लगी।


गिरी पेयजल योजना में लीकेज

उधर, सरकार ने गिरी पेयजल योजना बनाई और इसका निर्माण ऐसा हुआ था कि जगह-जगह से इसमें लीकेज थी। इसका असर भी सामने नजर आया और इससे पानी की लिफ्टिंग डबल हो गई। इस योजना से पूरा पानी मिलने से शहर में लोगों को प्याप्त पानी मिलने लगा। लेकिन जिस तरह से शिमला का विस्तार हो रहा है, उससे पानी के लिए दीर्घकालीन योजना की जरूरत है और इस दिशा में न तो सरकार के पास पुख्ता योजना है और न ही लोगों का दवाब।

सीएम ने कहा, तैयार होगी पानी लाने की योजना पर खर्चा देख हुए हाथ खड़े

वैसे सीएम वीरभद्र सिंह ने रोहड़ू के चांशल से से ग्रेविटी से शिमला और इसके साथ लगते ऊपरी शिमला के कई इलाकों के लिए पानी लाने की योजना बनाने को कहा था, लेकिन इसका खर्चा इतना था कि सरकार ने हाथ खड़े कर दिए। इसके लिए केंद्र से भी मदद मांगी गई, लेकिन वहां से भी सकारात्मक जवाब नहीं मिला। इसकी लागत 12 सौ करोड़ रुपए आंकी गई थी। इसके बाद कोल डैम से सुन्नी से सतलुज नदी से पानी लिफ्ट कर शिमला पहुंचाने की योजना बनी। यह योजना तीन सौ करोड़ रूपए से अधिक की थी। अब इस योजना को सिरे चढ़ाने के प्रयास हो रहे हैं, लेकिन इस योजना में बाद में मैटेनेंस खर्च ज्यादा है। इसमें लिफ्टिंग पर बिजली का खर्च बहुत भारी पड़ने वाला है और सिल्ट की समस्या भी आ सकती है।

पानी पर सभी की राजनीति शुरू

शिमला के चुनाव में पानी हमेशा बड़ा मुद्दा रहता है और इस बार भी यह अहम मुद्दा बनने वाला है, क्योंकि हर दल ने पानी पर राजनीति शुरू कर दी है। यहां मजेदार बात यह है कि यहां होटल कारोबारियों को इसकी उतनी कम नहीं लगती, जितना आम आदमी को लगती है। आम जनता हमेशा पानी की कमी का रोना रोती है। जो भी हो पानी की कमी का मुद्दा लोगों के बीच गूंजने वाला है और अब देखना है कि राजनीतिक दल इन्हें लेकर क्या रुख अपनाते हैं।

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