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पांच माह बाद खुले देवभूमि के धार्मिक स्थल, शक्तिपीठों के कपाट खोलने से पहले हुई विशेष पूजा

पांच माह बाद खुले देवभूमि के धार्मिक स्थल, शक्तिपीठों के कपाट खोलने से पहले हुई विशेष पूजा

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हिमाचल प्रदेश (Himachal Pradesh) में आज सुबह आखिरकार सभी धार्मिक स्थल श्रद्धालुओं के लिए खुल गए हैं। कोरोना माहमारी के चलते पिछले पांच माह से बंद प्रदेश में लगभग 4400 धार्मिक स्थल (Religious place) आज विशेष पूजा-अर्चना के साथ खुल गए हैं। इन में 4000 के करीब मंदिर है, जबकि अन्य मस्जिद व गुरुद्वारे भी हैं, जिनको आद आम जनता के लिए खोल दिया गया है। प्रदेश के सभी शक्‍त‍िपीठों के खुलने से लोगों में खुशी का माहौल है। मां  ज्‍वालाजी,  चिंतपूर्णी, नयना देवी,  बज्रेश्‍वरी देवी मंदिर में प्रशासन ने खास तैयारियों के साथ कपाट खोल दिए हैं। मां भीमाकाली और माता बालासुंदरी समेत बाबा बालकनाथ मंदिर, ऐतिहासिक पांवटा साहिब गुरुद्वारे में श्रद्धालुओं के जयकारे गूंजे।

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बज्रेश्वरी देवी मंदिर में एसडीएम कांगड़ा अभिषेक वर्मा ने विेशेष पूजा-अर्चना की। स्थानीय श्रद्धालुओं ने मंदिर के कपाट खुलने पर मां बज्रेश्वरी देवी के समक्ष शीश नवाया। नयना देवी मंदिर में सुबह की आरती के बाद मुख्य पुजारी अमित शर्मा शर्मा ने पूजा-अर्चना कर द्वार खोले और श्रद्धालुओं को माताजी के दर्शनों के लिए अनुमति प्रदान की गई। फिलहाल पंजाब, हरियाणा, दिल्ली, यूपी, बिहार और अन्य प्रदेशों के श्रद्धालुओं को ई रजिस्ट्रेशन के माध्यम से अनुमति लेकर मां के दर्शनों के लिए आना पड़ेगा और पूरा दिन में लगभग 1000 श्रद्धालुओं को अनुमति प्रदान की जाएगी। मंदिर में मुख्य द्वार के पास टच फ्री सैनिटाइजर मशीनें और टच फ्री हैंड वॉच सिस्टम लगाया गया है। श्रद्धालुओं की सुरक्षा सुविधा का मंदिर न्यास के द्वारा पूरा ध्यान रखा गया है। श्रद्धालु के आने जाने के लिए अलग-अलग रास्ते हैं और मंदिर के गर्भगृह में मात्र 1 मिनट के लिए ही श्रद्धालु रुक सकते हैं मंदिर में किसी प्रकार की पूजा हवन यज्ञ मुंडन नहीं होगा।

 

चामुंडा नंदिकेश्‍वर धाम के कपाट आज दोपहर 12 बजे विधिवत पूजा-अर्चना के बाद खोले जाएंगे। इस अवसर पर एसडीएम धर्मशाला एवं सहायक मंदिर आयुक्‍त डॉक्‍टर हरीश गज्‍जू भी मौजूद रहेंगे। राजधानी शिमला में संकटमोचन, तारादेवी और जाखू मंदिर के कपाट भी सुबह खुल गए। सराहन स्थित प्रसिद्ध मां भीमाकाली मंदिर में सुबह सात से शाम साढ़े छह बजे तक भक्तों को माता के दर्शन करने की अनुमति है।

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