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लिंगभेद के चलते भारत में हर साल मर रहीं ढाई लाख बेटियां

almost 2.5 million girls die in india due to gender bias

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नई दिल्ली। बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के नारों के बीच लांसेट की नई रिसर्च चौंकाने वाली है। इसमें कहा गया है कि केवल लिंग भेद के कारण भारत में हर साल ढाई लाख बच्चियां पांच साल की उम्र से पहले ही दम तोड़ रही हैं। रिसर्च में 2011 की जनगणना को आधार बनाया गया है। इसमें पाया गया है कि भारत में बालिकाओं की मौत के आंकड़ों का 22 फीसदी लिंग भेद के कारण है। इसी के कारण करीब ढाई लाख बेटियां हर साल अपना पांचवां जन्मदिन नहीं मना पाती हैं। रिसर्च करने वालों ने पाया कि यूपी के उत्तरी हिस्से में पांच साल से कम उम्र की बालिकाओं की मौत का आंकड़ा कुछ ज्यादा ही है। यूपी के साथ ही मध्यप्रदेश, राजस्थान और बिहार में भी बेटियों को लेकर परिवार की मानसिकता में बदलाव नहीं आ पाना और उनके साथ जन्म के बाद से ही भेदभाव के कारण पांच साल से पहले ही उनकी मौत हो जाती है।

शोधकर्ताओं का कहना है कि इन सबके बावजूद अभी तक पांच साल से कम उम्र की बालिकाओं की मौत के पीछे लिंग भेद का कारण साफतौर पर उभरकर नहीं आ सका था। रिसर्च की सह लेखिका नंदिता सैकिया ने कहा कि परिवार अभी भी बेटियों को अवांछित मानते हैं। इसके कारण वे उनके जन्म के बाद से उनके साथ भेदभाव करने लगते हैं। इसके विपरीत देश के उत्तर-पश्चिमी हिस्से में जन्मदर कम होने के बाद भी लिंग जांच और भ्रूण हत्या के मामले लगातार सामने आ रहे हैं। पहले के रिसर्च में सामने आया था कि बेटियों को जन्म के बाद पर्याप्त पोषण युक्त आहार नहीं दिया जाता, जिससे वे पांच साल की उम्र पूरी करने से पहले ही दुनिया छोड़ देती हैं।

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