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एक्सक्लूसिवः तकरीबन आधी 108 एंबुलेंस कंडम, जिंदगी नहीं ‘मौत का सफर’ है इनकी सवारी

एक्सक्लूसिवः तकरीबन आधी 108 एंबुलेंस कंडम, जिंदगी नहीं ‘मौत का सफर’ है इनकी सवारी

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शिमला। लोगों की जान बचाने की अहम जिम्मेदारी निभाने वाली प्रदेश की 198 में 85 एंबुलेंस गाड़ियां कंडम हो चुकी हैं। दूर-दराज के पहाड़ी रास्तों पर दौड़ने वाली इन एंबुलेंस की कंडम हालत के चलते कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है। ऐसे में इनकी सवारी मौत के सफर से कम नहीं है।

लगातार 24 घंटे की तैनाती और सड़कों पर मरीजों और उनके परिजनों को लेकर बिना रुके दौड़ती इन गाड़ियों में से 42 फीसदी के कंडम होने की बात खौफ पैदा करती है। इस मामले में सबसे बड़ा सवाल यह है कि आरटीओ से इन गाड़ियों को सड़क पर दौड़ने के लिए फिटनेस सर्टिफिकेट कैसे मिल रहा है। जानकार सूत्रों का कहना है कि इन वाहनों की फिटनेस सर्टिफिकेट कागजों पर ही हो जाती है।


सूत्रों का तो यहां तक कहना है कि एंबुलेंस के कई ड्राइवर तो गाड़ी चलाने से ही डरते हैं। नियमानुसार हर 20 हजार किलोमीटर पर गाड़ियों की सर्विसिंग होनी चाहिए। फिटनेस सर्टिफिकेट देते समय यह भी देखना जरूरी है कि एंबुलेंस में जीवन रक्षक उपकरण सही तरीके से काम कर रहे हैं या नहीं। प्रदेश में 108 एंबुलेंस में अचानक ब्रेक फेल होने और पुरानी वायरिंग के कारण आग लगने के मामले भी सामने आए हैं। जहां तक एंबुलेंस में जीवन रक्षक उपकरणों का सवाल है तो आधे से ज्यादा उपकरण या तो खराब पड़े हैं या फिर चलाने योग्य ही नहीं है।

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