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लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह का जवाब, कहा- PAK से प्रेरणा लेने वालों से कैसी चर्चा

लोकसभा में गृह मंत्री अमित शाह का जवाब, कहा- PAK से प्रेरणा लेने वालों से कैसी चर्चा

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नई दिल्ली। राज्यसभा (Rajya Sabha) से पास होने के बाद आज गृह मंत्री अमित शाह (Amit Shah) ने जम्मू-कश्मीर पुनर्गठन बिल को लोकसभा (Loksabha) में चर्चा के लिए रखा। इसके बाद बिलो पर हुई चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कहा कि सदस्यों के मन के भाव को समझ रहा हूं क्योंकि सब लोग 70 साल से एक दर्द को दबाकर बैठे हैं। कहा जाता है कि कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है लेकिन किसी अन्य राज्य को नहीं बोलते, उसकी वजह 370 है क्योंकि इसी ने जनमानस के मन में शंका पैदा की थी, कश्मीर भारत का अंग है या नहीं। धारा 370 कश्मीर को भारत से जोड़ती नहीं बल्कि जोड़ने से रोकती है, जो आज सदन के आदेश के बाद खत्म हो जाएगी।

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मोदी सरकार PoK को कभी देने वाली नहीं है

उन्होंने आगे कहा कि एक बार देश के प्रधानमंत्री की दृढ़ राजनीति को नमन करना चाहता हूं क्योंकि उन्होंने साहस दिखाकर इसे खत्म करने का फैसला लिया। उचित समय और हालात सामान्य होते ही जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने पर सरकार को कोई आपत्ति नहीं है। मोदी सरकार PoK को कभी देने वाली नहीं है और वहां की 24 सीटें आज भी हमारा हिस्सा रहने वाली हैं। इस पर हमारा दावा उतना ही मजबूत है जितना पहले था। गृह मंत्री ने आगे कहा कि कश्मीर मुद्दा 1948 में UN में पहुंचा था। लेकिन जब भारत-पाकिस्तान ने UN को प्रस्ताव को स्वीकार कर लिया तब किसी भी देश की सेना को सीमाओं के उल्लंघन का अधिकार नहीं था। लेकिन 1965 में पाकिस्तान की ओर से सीमा का उल्लंघन करने पर यह प्रस्ताव खारिज हो गया था। जम्मू कश्मीर के लिए इस सदन को संपूर्ण अधिकार हासिल हैं कोई भी बाध्यता नहीं है।

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जो नेहरू जी ने किया और उसी के कारण आज PoK है

बिल पर चर्चा का जवाब देते हुए शाह ने कांग्रेस और पूर्व पीएम जवाहर लाल नेहरू पर निशाना साधते हुए कहा कि जब हमारी सेना कश्मीर में विजयी हो रही थी और पाकिस्तानी कबीलाइयों को भगाया जा रहा था तब अचानक शस्त्र विराम किसने किया, वो भी नेहरू जी ने किया और उसी के कारण आज PoK है, अगर सेनाओं को उस वक्त छूट दी होती तो पूरा PoK भारत का हिस्सा होता। उन्होंने आगे कहा कि संयुक्त राष्ट्र में इस विषय को कौन लेकर गया, आकाशवाणी से गृह मंत्री को बगैर भरोसे में लिए हुए मसले को UN में ले जाया गया, यह काम भी नेहरूजी ने ही किया था। धारा 370 की वजह से अलगववाद की भावना को पाकिस्तान जम्मू कश्मीर में भड़का रहा है। 370 से इस देश के कानून की पहुंच वहां नहीं होती थी। साथ ही 371 महाराष्ट्र के विकास से जुड़ा है उसे हम क्यों निकालेंगे।

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आंध्र का विभाजन बगैर चर्चा के हुआ

गृह मंत्री ने बताया कि इससे कहीं भी देश की अखंडता और एकता बाधित नहीं होती, इसकी 370 से कोई तुलना नहीं की जा सकती। राज्यों के कुछ समस्याओं को 371 में रखा गया है और इनकी तुलना संभव नहीं है और हम इसे कतई हटाने नहीं जा रहे हैं। शाह ने आंध्र के विभाजन पर सवाल उठाते हुए कहा कि बेरोजगारी हर राज्य की समस्या लेकिन वहां आतंकवाद क्यों नहीं पनपा, धारा 370 से घाटी में अलगाववाद बढ़ा जिस पर पाकिस्तान ने पेट्रोल डालने का काम किया। आंध्र का विभाजन बगैर चर्चा के हुआ विधानसभा ने प्रस्ताव खारिज किया, मुख्यमंत्री ने इस्तीफा दे दिया, फिर आपने कैसी चर्चा करके यह फैसला लिया। अगर आपने किया तो अब हमें क्यों टोक रहे हैं। मार्शलों ने सांसदों को बाहर फेंका, काला दिन आज नहीं है, काला दिन वो था।

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अब UN में जनमत संग्रह को कोई मुद्दा नहीं है

शाह ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश का सवाल है तो बता दूं कि यह लद्दाख की मांग थी लेकिन कश्मीर के बारे में फिर से विचार किया जाएगा। नेहरू जी ने तो 370 को भी अस्थाई बताया था उसे हटाने में 70 साल लगे लेकिन हमें 70 साल नहीं लगेंगे। उन्होंने कहा कि जम्मू कश्मीर में विधानसभा, मुख्यमंत्री, मंत्री सब रहेंगे। शाह ने कहा कि जनमत संग्रह तभी खत्म हो गया जब पाकिस्तान ने भारत की सीमाओं को तोड़ा था, अब UN में जनमत संग्रह को कोई मुद्दा नहीं है। घाटी में स्थिति न बिगड़े इसके लिए कर्फ्यू डाला है, स्थिति बिगड़ी है इसलिए नहीं लगाया। जम्मू कश्मीर के लिए बनाया गया कानून किसी भी सूरत में सांप्रदायिक नहीं हो सकता, इस आरोप में सिरे से खारिज करता हूं।

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