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मानसून सत्र : प्रशासनिक ट्रिब्यूनल भंग करने के फैसले से नाराज विपक्ष ने किया वॉकआउट

मानसून सत्र : प्रशासनिक ट्रिब्यूनल भंग करने के फैसले से नाराज विपक्ष ने किया वॉकआउट

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शिमला। हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक ट्रिब्यूनल को भंग करने के सरकार के फैसले से नाराज विपक्ष ने आज सदन से वॉकआउट (Walk out) कर दिया। सदन में आज सरकार की तरफ से हिमाचल प्रदेश प्रशासनिक अधिकरण (ट्रांसफर ऑफ केसीज़ टू हाईकोर्ट ) विधेयक, 2019 पेश किया गया।


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सीएम जय राम ठाकुर (CM Jai Ram Thakur) द्वारा पेश किए गए इस विधेयक को चर्चा के लिए लाया गया। इस पर चर्चा के दौरान विपक्ष ने सरकार से ट्रिब्यूनल को भंग करने को लेकर सवाल उठाए। सरकार के जवाब से असंतुष्ट हो कर सदन में विपक्ष ने हंगामा किया और नारेबाजी करते हुए सदन से बाहर आ गए।

बिल पर चर्चा में भाग लेते हुए कांग्रेस विधायक हर्षवर्धन ने कहा कि सरकार ने गलत तरीके से ट्रिब्यूनल (Tribunal) को भंग किया है। जो मामले हाईकोर्ट में भेजे गए है, उनकी संख्या 21 हज़ार है और उनके निपटारे में कई साल लगने वाले है। उनका कहना है कि 40 हज़ार के करीब मामले लंबित है, लेकिन अब एक साथ 21 हज़ार से ज्यादा मामले ट्रिब्यूनल से हाईकोर्ट ट्रांसफर करने के बाद समझा जा सकता है कि इन मामलों का क्या होगा। इससे कर्मचारियों को न्याय (Justice) मिलने में समय लगेगा और न्याय मिलने में देरी होगी और पैसों का नुकसान भी होगा। नादौन से कांग्रेस विधायक सुखविंदर सिंह सुक्खू ने सरकार की मंशा पर सवाल खड़े किए। उन्होंने कहा कि सरकार कर्मचारी विरोधी है।

माकपा नेता राकेश सिंघा ने कहा कि इसको ऑर्डिनेंस (Ordinance) के ज़रिए निरस्त करने की जगह विधानसभा के ज़रिए किया जाना चाहिए था जहां सभी विधायक अपना पक्ष रख सकते हैं। सिंघा ने कहा कि सरकार की मंशा सही नहीं मानी जा सकती है। ट्रिब्यूनल ऐसा फॉर्म था जहां कर्मचारियों के मसलों का निपटारा आसनी और कम खर्चे में ही जाता था। सरकार को इस विषय में जल्दबाज़ी नहीं करनी चाहिए थी। इसी मसले पर विपक्ष ने सदन में हंगामा शुरू हो गया और और इसी के विरोध में विपक्ष (Opposition) ने वाकआउट कर दिया। विपक्ष का आरोप है कि सरकार कर्मचारी विरोधी है और इस फैसले से साबित हो गया है कि बीजेपी सरकार कर्मचारी विरोधी हैं।

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