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कहां हैं गौवंश की रक्षा का दम भरने वाले, यहां बंद कमरे में तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे भूखे पशु

कहां हैं गौवंश की रक्षा का दम भरने वाले, यहां बंद कमरे में तड़प-तड़प कर दम तोड़ रहे भूखे पशु

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लडभड़ोल। एक ऐसा कमरा जोकि पशुओं की कब्रगाह बन गया। इस बंद कमरे में भूखे प्यास से तड़प कर पशुओं ने दम तोड़ दिया। जी हां हम बात कर रहे हैं लडभड़ोल के तहत आते लांगणा गांव की। अब आलम यह है कि इन मरे पशुओं को उठाने वाला कोई नहीं है। आवारा कुत्ते पशुओं के शव को नोच रहे हैं। सवाल यह है कि पशुओं पर इतना अत्याचार हो रहा है, कहां हैं गौवंश की रक्षा का दम भरने वाले वो लोग।

बता दें कि लांगणा के कुछ लोगों ने लावारिस पशुओं की परेशानी निजात पाने के लिए के लिए एक तोड़ निकाला। लोग पशुओं को रात के समय खलारडू बाबड़ी के पास बने एक सार्वजनिक भवन में बंद कर देते थे। कमरे में बंद दो पशुओं ने भूख व प्यास से तड़प तड़प कर दम तोड़ दिया। जिन्हें आवारा कुत्ते नोच रहे हैं। अगर कमरे के अंदर देखें तो यह मंजर देखकर आप हैरान रह जाएंगे। कमरे में मृत पशु एक दूसरे के ऊपर गिरे हुए हैं। हालांकि कुछ लोगों ने इस मंजर को देखा तो इसकी सूचना पंचायत प्रतिनिधियों को दी, तो पंचायत प्रतिनिधियों ने साफतौर पर कहा कि जो लोग पशुओं को कमरे में बंद करते हैं।

वहीं, लोग अब इन मरे हुए पशुओं को वहां से हटाएंगे। इसमें कोई दोराय नहीं कि क्षेत्र के लोग लावारिस पशुओं की समस्या से परेशान हैं। लावारिस पशु रात के अंधेरे में लोगों की फसल को चट कर जाते हैं। लेकिन, क्या समस्या का जो समाधान लांगणा के कुछ लोगों ने निकाला है वह सही है। इस तरह पशुओं को दर्दनाक मौत देकर फसलों की रक्षा करने को सही ठहराया जा सकता है। हालांकि लोगों को कहना है कि प्रशासन लावारिस पशुओं को छोड़ने वालों पर कोई कार्रवाई कर रहा है और न ही पशुओं की समस्या से निजात दिला पा रहा है।

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