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आंखों की बीमारी भी नहीं तोड़ सकी हौसला, हीरो बनकर लौटा अंकुश

आंखों की बीमारी भी नहीं तोड़ सकी हौसला, हीरो बनकर लौटा अंकुश

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शिमला। आंखों की बीमारी भी हौसले को तोड़ नहीं पाई। देख लो शिमला का अंकुश मुंबई से सुरों का हीरो बन लौटा है। इंडियन आइडल-10 में शिमला के कोटगढ़ का अंकुश रनरअप रहा है। हरियाणा के सलमान अली विजेता बने हैं। बता दें कि अंकुश आंखों की बीमारी केरोटोकोनस आई डिसऑडर से भी जूझ रहा है। जब अंकुश पढ़ाई कर रहा था तो करीब चार साल पहले उसे एक दिन आंखों से कम दिखाई देने लगा। डॉक्टरी जांच में पता चला कि उसे केरोटोकोनस नाम की बीमारी है, जिसमें आंखों की रोशनी धीरे-धीरे कम हो जाती है।

अंकुश के माता-पिता को अंकुश की आंखों की चिंता होने लगी, ऐसे में अंकुश के इंडियन आइडल में जाने का फैसला अंकुश की मां को पसंद न आया। कोटगढ़ के लोस्टा गांव का रहने वाले अंकुश को बचपन से ही गाना गाने का शौक है पर कभी बड़े मंच पर अपनी आवाज का जादू बिखेरने का मौका नहीं मिला। अंकुश ने एमबीए फाइनेंस की पढ़ाई भी की, लेकिन गाने का शौक कभी नहीं छोड़ा।

मां को कमरे में बंद कर ऑडिशन देने गया था अंकुश

अंकुश ने अपनी मां को एक दिन कमरे में बंद कर बाहर ताला लगाया और इंडियन आयडल की ऑडिशन के लिए मुंबई जा पहुंचा। एक छोटे से गांव से निकल कर जहां सुविधाओं का इतना अभाव है, संगीत के बारे में किसी को कोई जानकारी नहीं है, वहां से बाहर निकलकर उसने खुद को साबित किया है। मां को हमेशा यही चिंता थी कि अगर अंकुश वहां से बाहर मुंबई चला गया तो वह अपनी आंखों का इलाज नहीं कर पाएगा, लेकिन अंकुश की जिद के आगे किसी की न चली। इसलिए मां को कमरे में बंद कर वो अपने सपने को पूरा करने निकल पड़ा।

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