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चिंताः बागवानों को मिल रहे सेब के 25 साल पहले के दाम, लागत 10 गुणा बढ़ी

चिंताः बागवानों को मिल रहे सेब के 25 साल पहले के दाम, लागत 10 गुणा बढ़ी

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शिमला। वर्तमान में सेब के गिरे दामों से बागवान खासे परेशान हैं। सेब के दाम इस स्तर तक गिर गए हैं कि किसी ने इसकी कल्पना भी नहीं की होगी। आज से 25 साल पहले मिलने वाले दाम इस बार बागवानों को मिल रहे हैं, जबकि लागत का खर्च पिछले 25 वर्ष के मुकाबले 10 गुणा तक बढ़ गया है। अगर ऐसा ही रहा तो हिमाचल (Himachal) की 4 हजार करोड़ की अर्थव्यवस्था (Economy) पूरी तरह से चौपट हो जाएगी।


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इसके कारण प्रदेश के लाखों लोगों के रोजगार पर संकट छा सकता है। कयास लगाए जा रहे हैं कि देश में मौजूद आर्थिक नीतियों के कारण आई मंदी का असर सेब के व्यवसाय पर पड़ा है। कारोबारी सेब की मांग व लागत में कमी को दाम घटने के लिए जिम्मेदार ठहरा रहे हैं।


कारोबारियों का यह भी मानना है कि नोटबंदी (Demonetisation) के बाद सेब के कारोबार पर बुरा प्रभाव पड़ना शुरू हुआ है, जोकि बढ़कर आज इस हद तक पहुंच गया है कि आज सेब की मांग में निरंतर कमी आ रही है। जो भी माल विभिन्न मंडियों में भेजा रहा है, उसका आधा भी समय पर बिक नहीं पा रहा है, जिसके चलते बाजार में सुस्ती देखी जा रही है। सेब का बाजार कब सुधरेगा बागवान इसके लिए चिंतित हैं।

राठौर ने सरकार पर साधा निशाना
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष कुलदीप सिंह राठौर ने इस सेब सीजन के दौरान सरकार की अव्यवस्था पर दुःख जताया है। उन्होंने कहा है कि इस बार बागवानों को बड़ी मुश्किलों का सामना करना पड़ा है। राठौर ने कहा है कि सेब डुलाई को लेकर आ रही समस्या से बागवानों के साथ-साथ आम लोग भी परेशान हो गए हैं। बिगड़ती ट्रैफिक व्यवस्था से सभी परेशान हैं। सरकार का इस ओर कोई ध्यान ही नहीं है। भारी मात्रा में सेब सड़ने के कगार पर खड़ा हो गया है। राठौर ने कहा है कि एपीएमसी ने जगह-जगह आढत कुलेक्शन केंद्र तो खोल रखे हैं पर उनके आसपास सफाई की कोई व्यवस्था नहीं है। इन क्षेत्रों में कोई भी बीमारी फैलने की आंशका से इंकार नहीं किया जा सकता। राठौर ने सरकार से मांग की है कि एपीएमसी में बागवानों से जो कुलेक्शन कि जा रही है, उस धन का कुछ भाग उस क्षेत्र में सफाई व्यवस्था पर खर्च करते हुए इसका कुछ भाग यहा के उप मंडल अधिकारियों को भी जारी किया जाए।

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