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सेब उत्पादन के 100 वर्षः स्टोक्स को किया याद

सेब उत्पादन के 100 वर्षः स्टोक्स को किया याद

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शिमला। स्वं सत्यानंद स्टोक्स के दिखाए रास्ते पर चल कर आज प्रदेश 01 लाख 10 हजार 679 हेक्टेयर क्षेत्र में 7.77 लाख मिट्रिक टन सेब पैदा कर अपनी आर्थिकी को सुदृढ करने में सक्षम है। यह बात बागवानी मंत्री विद्या स्टोक्स ने थानाधार में कोटगढ़ और कुमारसेन के लोगों द्वारा आयोजित सेब शताब्दी समारोह की अध्यक्षता करते हुए कही।

7.77 लाख मिट्रिक टन सेब पैदा कर रहा प्रदेशः स्टोक्स

उन्होंने बताया कि प्रदेश में पहले केवल रैड, रॉयल और गोल्डन डिलिशियस सेब को उगाया जाता था, किन्तु 100 वर्ष के सफर में अब stikes-2प्रदेश में 90 विभिन्न किस्मों की सेब प्रजातियों की खेती सफलतापूर्वक की जा रही है। उन्होंने कहा कि स्व. सत्यानंद स्टोक्स न केवल सेब के क्षेत्र में एक नई क्रान्ति लाए बल्कि सामाजिक एवं आर्थिक उत्थान, अन्धविश्वास उन्मूलन तथा शिक्षा के प्रसार के साथ-साथ भारतीय स्वतन्त्रता संग्राम में भी भाग लेकर इस क्षेत्र का नाम रोशन किया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश के इस विकास यात्रा में सेब उत्पादन की भूमिका बहुत महत्वूपर्ण है।  उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार द्वारा इस वर्ष लगभग 20 करोड़ रूपये की राशि के उन्नत सेब के पौधे विदेशों से मंगवाए गए हैं जिन्हें प्रदेश के बागवानों को जल्द ही वितरित किया जाएगा।

सेब उत्पादन का इतिहास
हिमाचल प्रदेश की आर्थिकी में सेबों का बहुत महत्व रहा है और इसका श्रेय अमेरिकी वनस्पति शास्त्री सैमुअल स्टोक्स यानी सत्यानंद स्टोक्स को जाता है। वर्ष 1918 में वे अमेरिका से रेड डिलिशियस प्रजाति के पौधे लाए और उन्हें कोटगढ़ के बारूबाग गांव में लगाया। लाल रंग की यह मीठी किस्म लोगों को बहुत भायी। इसके अलावा स्टोक्स ने एक और लोकप्रिय प्रजाति गोल्डन डिलिशियस भी आयात की। इस समय बेशक नई विदेशी किस्मों को लगाया जा रहा है, लेकिन एक लंबे अरसे तक शिमला जिला में सेब की परंपरागत किस्मों की ही बादशाहत थी।सबसे पहले कोटगढ़ के किसानों ने अमेरिका से लाई गई सेब की पौध को रोपा। इसके बाद जो कुछ हुआ वह आज की तारीख में पूरी दुनिया जानती है। आज शिमला के सेब दुनियाभर में लोकप्रिय है। समुद्र की सतह से 1,600 मीटर ऊपर स्थित हिमाचल प्रदेश में आज सेब की भरपूर पैदावार होती है। इन सेबों ने यहां के किसानों की जिंदगी को बदलने का काम किया है।

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