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Arun बोलेः मत करो परिवारवाद को इतना बदनाम

Arun बोलेः मत करो परिवारवाद को इतना बदनाम

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धर्मशाला। नेता विपक्ष प्रेम कुमार धूमल के छोटे बेटे अरुण धूमल का कहना है कि कई लोगों ने कोई कसर नहीं छोड़ी मुझे या मेरे परिवार को परिवारवाद के नाम पर गाली देने की। मेरा उन भाइयों और कांग्रेस के मित्रों से आग्रह है कि परिवारवाद को इतना बदनाम न करो की परिवारवाद के नाम से अच्छे परिवारों में भ्रूण हत्या शुरू हो जाए। वैसे भी कांग्रेस पार्टी की तो आधारशिला ही एक परिवार पर सिमट कर रह गई है और परिवार के बिना तो कांग्रेस का अस्तित्व भी संकट में होगा।


  • कहां, कहीं परिवारवाद के नाम से अच्छे परिवारों में भ्रूण हत्या न शुरू हो जाए
  • कांग्रेस पार्टी की तो आधारशिला ही एक परिवार पर सिमट कर रह गई
  • हर परिवार ऐसा सक्षम और समर्थ बने की परिवारवाद मुद्दा ही नहीं रहे

इसलिए उनको चिंता अपने युवा नेता के  गृहस्थ बनाने की ओर करनी चाहिए, ताकि आगे के लिए वारिस और नेतृत्व मिल सके। हमारे कुछ मित्र भी परिवारवाद  की चिंता बहुत करते हैं, उनसे भी अनुरोध की समाज के नाते हमारा संकल्प यह होना चाहिए की हमारे देश प्रदेश का हर परिवार ऐसा सक्षम और समर्थ बने की परिवारवाद मुद्दा ही नहीं रहे।

एक बार फिर आप सब का हृदय की गहराइयों से  धन्यवाद और मेरे ख़ास शुभचिंतकों के लिए अर्ज़ है, मुझे बदनाम करने का बहाना ढूंढते हो क्यों, मैं खुद हो जाऊंगा,  पहले जरा सा नाम तो होने दो ।।  अरूण ने दरअसल बीते कल के प्रकरण के संदर्भ में यह सारी बातें अपनी फेसबुक पर लिखी हैं। अरूण को बीते कल फेसबुक पर एचपीसीए का अध्यक्ष बताकर उन्हें शाम से ही बधाईयां देने का काम चलता रहा। उसके संदर्भ में आज अरूण ने लिखा है कि बिना सही ख़बर के ज्ञान और जानकारी के अभाव में सोशल मीडिया इस्तेमाल करने वाला हर नारदमुनि इस होड़ में होता है की में कुछ शेयर करने से न रह जाऊं। इसलिए क्या सच है क्या झूठ इस बात का पता ही नहीं चलता और चर्चा शुरू हो जाती है। अरूण ने लिखा है कि सब साथियों को बताना चाहूंगा किसी के कहने से कोई कहीं का अध्यक्ष नहीं बनता। इसलिए निहित चर्चा में पड़के अपना समय बर्बाद न करें। लेकिन आज के दौर में आपको ख़ुशी होती है जब आपको चाहे किसी झूठी चीज़ या ख़बर के लिए बधाई मिलती है तो इसलिए में आपने सभी  मित्रों का हृदय की गहराइयों से धन्यवाद करना चाहूंगा, जिन्होंने कल बिना बात के मुझे बधाई और शुभकामनाएं देने के लिए समय निकाला। मुझे तो सच्चाई पता थी, लेकिन आपकी भावनाओं की क़दर  करते हुए में सहर्ष आपकी बधाई मोबाइल पर भी स्वीकार करता रहा। आप सब का एक बार फिर धन्यवाद करना चाहूंगा।  लेकिन  नारदमुनि शब्द का प्रयोग केवल हास्य के लिए है इसे अन्यथा न लें। आपकी भावनाओं ने सच में दिल को छुआ है।

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