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Pharmacist पद मामलाः बी-फार्मेसी और Matric पास Diploma होल्डर आमने-सामने

Pharmacist पद मामलाः बी-फार्मेसी और Matric पास Diploma होल्डर आमने-सामने

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कांगड़ा। हिमाचल प्रदेश कर्मचारी चयन आयोग द्वारा फार्मासिस्ट के 142 पदों के लिए 2001 से पहले के दसवीं पास डिप्लोमा होल्डरों को योग्य करार देने के मामले ने तूल पकड़ लिया है। एक तरफ जहां बी-फार्मेसी का कोर्स कर चुके डिप्लोमा धारकों का कहना है कि प्रदेश सरकार के ऐसा करने से 2 से 4 वर्ष का डिप्लोमा करने वाले डिप्लोमाधारकों की कोई वैल्यू हीं नहीं रह जाएगी। यह ऐसे डिप्लोमाधारकों के साथ चीटिंग है। इसलिए दसवीं पास डिप्लोमाधारकों को इस पद के लिए अयोग्य करार दिया जाए। वहीं, मैट्रिक पास बेरोजगार संघ का कहना है कि हमारे माता-पिता ने लाखों रुपये खर्च करके हमें डिप्लोमा कोर्स करवाया है और सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। अगर हम लोग वरिष्ठता सूची में ऊपर हैं तो इसमें हमारी क्या गलती है।
2001  से पहले के दसवीं पास डिप्लोमाधारक हों अयोग्य करार 
प्रदेश तथा प्रदेश के बाहर बी-फार्मेसी का कोर्स कर चुके डिप्लोमाधारकों सन्नी डोगरा, अंकुश, दीपक, अल्पना और वंदना आदि ने रोष जाहिर करते हुए बताया कि प्रदेश भर में 10+2 के बाद बी-फार्मेसी करने वाले डिप्लोमाधारों की तादाद सैकड़ों में है। बी-फार्मेसी के एक समेस्टर के लिए उन्होंने 50 से 60 हजार रुपए तक की फीस दी है। ऐसे में कोर्स को करने के लिए उन्होंने लाखों रुपए खर्च किए हैं। लेकिन, प्रदेश सरकार और कर्मचारी चयन आयोग के ढुलमुल रवैये के कारण उन्होंने ऐसे लोगों को इस पद के लिए योग्य करार दिया है, जो कि इस पद की गरिमा को बरकरार रखने के लिए सक्षम नहीं हैं। उन्होंने स्वास्थ्य मंत्री और कर्मचारी चयन आयोग से आग्रह किया है कि बी-फार्मेसी के डिप्लोमाधारकों के भविष्य को ध्यान में रखते हुए 2001 से पहले के दसवीं पास डिप्लोमाधारकों को इस पद के लिए अयोग्य करार दिया जाए, ताकि लाखों खर्च कर और कठिन परिश्रम के बाद प्राप्त किए गए बी-फार्मेसी के डिप्लोमा का उन्हें फायदा मिल सके।
मैट्रिक पास बेरोजगार संघ बोला, हम वरिष्ठता सूची में ऊपर, तो इसमें हमारी क्या गलती 
मैट्रिक पास बेरोजगार संघ के प्रधान तिलक राज, उपप्रधान नरेश कुमार, पवन चंदेल, मनोज कुमार, प्रकाश शर्मा, महेश परवीन व सुरेंद्र आदि ने कहा है कि हम लोगों ने भी डिप्लोमा कोर्स सरकार द्वारा निर्धारित मापदंडों के अनुसार ही किया है। जब सरकार ने इनकी अनदेखी की तो मजबूर हो कर न्यायालय का दरवाजा खटखटाना पड़ा, जिस के बाद ही सरकार और कर्मचारी चयन आयोग ने हमें भर्ती परीक्षा में भाग लेने के लिए बुलाया है। जो लोग गलत खबरें छपवा रहे हैं, वो जरा पूरे तथ्यों को बारीकी से देखें तब कोई प्रतिक्रिया दें। ये लोग कह रहे हैं कि हम लोगों ने एक समेस्टर का 50-60 हजार दिया है, तो ये लोग ये मत भूलें कि हमारे माता-पिता ने भी लाखों रुपये खर्च करके हमें डिप्लोमा कोर्स करवाया है और हिमाचल सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त है। अगर हम लोग वरिष्ठता सूची में ऊपर हैं, तो इस में हमारी क्या गलती है।


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