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अगले जन्म मोहे बिटिया ना कीजोः रूला देगी मासूम बच्ची की यह कहानी

अगले जन्म मोहे बिटिया ना कीजोः रूला देगी मासूम बच्ची की यह कहानी

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कांगड़ा। डॉ. राजेंद्र प्रसाद मेडिकल कॉलेज व अस्पताल टांडा से बिना गोद लिए गायब मासूम बच्ची को पुलिस ने बरामद कर लिया है। हैरानी वाली बात है कि टांडा अस्पताल में 20 जुलाई को जन्म लेने वाली इस बच्ची को ऐसी महिला से बरामद किया है, जिसने बच्ची को माता-पिता से न तो गोद लिया और न ही कानूनी कार्रवाई अमल में लाई है। बच्ची एक नहीं दो नहीं बल्कि चौथे हाथों में पहुंच गई। कांगड़ा पुलिस ने बच्ची का मेडिकल करवा कर बच्ची को किसी के पास छोड़ा जाए अभी तक इसका फैसला नहीं हो पाया था।

कांगड़ा पुलिस ने बच्ची को जन्म देने वाले माता-पिता को बुलाकर बयान दर्ज करवा रही है, परन्तु बच्ची का महिला तक पहुंचने के पीछे एक बड़ी लापरवाही टांडा मेडिकल कॉलेज की उजागर हुई है, जिसमें सीधे तौर पर मेडिकल कॉलेज प्रशासन की जबावदेही बन रही है। टांडा मेडिकल कॉलेज के रिकॉर्ड में बच्ची के माता-पिता ही कोई ओर हैं। बच्ची के असली माता-पिता तहसील नूरपुर जिला कांगड़ा से है, परन्तु बच्ची जिस घर से बरामद हुई उसे एक महिला द्वारा पालन पोषण किया जा रहा था।


बताया जा रहा है कि बच्ची के असली माता-पिता ने पहले से ही घर में 3 बच्चियां होने का हवाला देकर है बच्ची को टांडा के ही श्याम लाल नाम का एक सफाई कर्मचारी को इस बच्ची को अपने पास रखा, जिसने बाद में लव कुमार पुत्न राम चंद शर्मा निवासी जैन तहसील पालमपुर जिला कांगड़ा को दे दिया, जोकि टांडा के ही ब्लॉक जी क्वार्टर न 4 मेडिकल कॉलेज टांडा के परिषद में रहता है कि उसकी बहन रमा शर्मा को गोद दे दी। बताते चले इस मामले में मिलीभगत से उस बच्ची के जन्म प्रमाण पत्न में ही अस्पताल के कर्मचारी के रिश्तेदार को ही उसका पिता बना दिया व बच्ची उसके हवाले कर दी गई, परन्तु जब मामले की जांच चली तो बच्ची उस व्यक्ति से नहीं मिली।

6 अक्टूबर को पहुंची थी एमएस के पास शिकायत

इस मामले में 6 अक्टूबर को रिकॉर्ड रूम के इंचार्ज ने एमएस को एक शिकायत पत्र लिखा और बताया कि बच्ची के बर्थ सर्टिफिकेट में पिता का नाम बिना आधिकारिक अनुमति के बदला गया है व इस मामले की जांच की मांग की। अस्पताल प्रशासन ने सारे मामले को लेकर एक जांच बिठाई, लेकिन जांच सिर्फ जन्म प्रमाण पत्न में बदले गए पिता के नाम तक ही सीमित रही।

इसमें कहीं भी इस बात का जिक्र नहीं हुआ कि वह बच्ची अब कहां है व किस हालत में है और तो और जांच में सारा ठीकरा शिकायतकर्ता पर ही फोड़ दिया गया। बच्ची को जन्म के कुछ दिनों के बाद ही पीलिया हो गया था और टांडा के सफाई कर्मचारी ने उसके पीलिया का इलाज करवाया और बच्ची के ठीक होने पर उसे आगे लव कुमार के हवाले कर दिया।

क्या कहते हैं डीएसपी

इस मामले को लेकर डीएसपी कांगड़ा पूर्ण चंद से बात की उन्होंने बताया कि कांगड़ा पुलिस ने आईपीसी की धारा 317 के तहत मामला दर्ज कर लिया है और मामले में माता पिता व उन लोगों को आरोपी बनाया गया है, जिनके पास बच्ची रही है। वहीं, इस मामले में टांडा मेडिकल कॉलेज के प्रशासन के खिलाफ भी लापरवाही का मामला दर्ज हो सकता है, जिसकी संभावना बनती नजर आ रही है।

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