दिन का चैन, रातों की नींद हराम हो चुकी है इस गांव के लोगों की, जाने क्यों

डयोड में एसीसी के बैचिंग प्लांटने किया लोगों का जीना दुश्वार

दिन का चैन, रातों की नींद हराम हो चुकी है इस गांव के लोगों की, जाने क्यों

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मंडी। जिला में इन दिनों कीरतपुर से मनाली तक बनने जा रहे फोरलेन का निर्माण कार्य जोरों से चला हुआ है। फोरलेन बनाने में जुटी कंपनियां समय रहते सारा काम पूरा करना चाहती हैं। लेकिन कंपनियों की रफ्तार कहीं-कहीं पर लोगों के लिए परेशानी का सबब बनती जा रही है। डयोड गांव की बात करें तो यहां के लोग गांव में लगे बैचिंग प्लांट के कारण परेशान हो गए हैं। बैचिंग प्लांट दिन-रात काम करता है और इससे होने वाले शोर के कारण न तो रात को नींद नसीब हो रही है और न ही दिन को चैन मिल पा रहा है।

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ग्रामीणों की मानें तो बच्चों की पढ़ाई पर भी इसका विपरित असर पड़ रहा है। वहीं बैचिंग प्लांट के कारण हवा में जो प्रदूषण फैल रहा है उससे ग्रामीणों को बीमारियां घेरती जा रही हैं। डयोग गांव निवासी हीरामणी और भूषणा देवी ने बताया कि बैचिंग प्लांट के कारण हवा में जो धूल-मिट्टी आ रही है उससे बीमारियां फैल रही हैं जोकि ठीक होने का नाम ही नहीं ले रही हैं। इन्होंने मांग उठाई है कि इस बैचिंग प्लांट को तुरंत प्रभाव से बंद किया जाए।

ग्रामीणों का आरोप,कॉलोनी बनाने के नाम पर लगा दिया बैचिंग प्लांट

ग्रामीणों का यह भी आरोप है कि गांव में बैचिंग प्लांट को धोखे से स्थापित किया गया है। स्थानीय निवासी देवी सिंह ने बताया कि गांव के ही कुछ लोगों ने इस प्लांट के लिए निजी भूमि लीज पर दी है। उस वक्त अशोक चौहान एंड कंपनी ने यहां पर वर्कर कालोनी बनाने की बात कही थी, लेकिन बाद में यहां बैचिंग प्लांट लगा दिया गया। देवी सिंह की मानें तो गांव के पास हर तरफ प्रदूषण फैल रहा है। एक तरफ बैचिंग प्लांट के कारण जीना दुश्वार हुआ है वहीं दूसरी तरफ डंपिंग के कारण हाल बेहाल है। वहीं ग्रामीण रोत राम ने बताया कि उसकी जमीन पर बिना अनुमति के मलबा फैंका जा रहा है और कंपनी बदले में मुआजवा भी नहीं देर ही है। इन्होंने सरकार और प्रशासन से इस पर कार्रवाई की मांग उठाई है।

पूरे नियम और कायदे के तहत लगाया है बैचिंग प्लांट

अशोक चौहान एंड कंपनी के एचआर मैनेजर रोहित शर्मा ने उन्होंने ग्रामीणों द्वारा लगाए जा रहे आरोपों को निराधार बताया। उन्होंने कहा कि कंपनी के पास पंचायत से लेकर प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड तक की एनओसी है और सभी नियमों के तहत ही बैचिंग प्लांट लगाया गया है। उन्होंने कहा कि प्लांट से किसी को भी कोई परेशानी नहीं हो रही है। बता दें कि अशोक चौहान एंड कंपनी के पास फोरलेन निर्माण की चार टनलों का कार्य है और इसके लिए रेत-बजरी और सीमेंट का जो भी मैटेरियल इस्तेमाल हो रहा है उसकी मिक्सिंग इसी बैचिंग प्लांट में हो रही है। हालांकि इस बारे में ग्रामीणों ने सरकार और प्रशासन को लिखित में ज्ञापन सौंपे हैं और ग्रामीणों को उचित कार्रवाई का इंतजार है ताकि गांव में फैल रहे प्रदूषण को रोका जा सके।

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