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Orthopaedic surgeon मामलाः जांच एक तरफा न होकर निष्पक्ष हो

Orthopaedic surgeon मामलाः जांच एक तरफा न होकर निष्पक्ष हो

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बिलासपुर। सदर विधायक बंबर ठाकुर व अस्पताल में तैनात ऑर्थों सर्जन डॉ. जसबीर सिंह के बीच उपजे विवाद मामले में सीएम वीरभद्र सिंह द्वारा दिए जांच के आदेशों का मेडिकल ऑफिसर संघ ने स्वागत किया है।doctor1 संघ का कहना है कि वह जांच का स्वागत करते हैं, लेकिन जांच एक तरफा न होकर निष्पक्ष हो, ताकि सच्चाई सामने आ सके। वहीं, हिमाचल प्रदेश में चिकित्सकों के साथ अभद्र व्यवहार को लेकर अब मेडिकल ऑफिसर संघ के कड़े तेवर देखने को मिल रहे हैं।


  • मेडिकल ऑफिसर संघ ने सीएम वीरभद्र सिंह से उठाई मांग

जी हां बिलासपुर में मीडिया से बात करते हुए संघ के महासचिव डॉक्टर पुष्पेन्द्र वर्मा ने प्रदेश सरकार से मेडीपर्सन एक्ट को लागू करने की मांग की है। साथ प्रदेश में रिक्त पड़े चिकित्सकों के पदों के लिए प्रदेश सरकार की नीति को गलत ठहराया है। हिमाचल प्रद्रेश के ऊना व बिलासपुर समेत अन्य जिलों में चिकित्सकों के साथ हुए अभद्र व्यवहार को देखते हुए अब हिमाचल प्रदेश मेडिकल ऑफिसर संघ के सदस्यों ने कड़ी निंदा की है।

बिलासपुर के ट्रामा सेंटर में एक बैठक के दौरान संघ के पदाधिकारियों व सदस्यों ने विभिन्न मामले को लेकर चर्चा की और प्रदेश सरकार द्वारा मेडीपर्सन एक्ट लागू करने की मांग की है, ताकि डॉक्टर्स बेफिक्री से मरीजों का इलाज कर सके। यही नहीं हिमाचल प्रदेश में चिकित्सकों के खाली पड़े पदों को लेकर पुष्पेन्द्र वर्मा ने प्रदेश सरकार की भर्ती नीति को गलत करार देते हुए वाक इन इंटरव्यू प्रणाली कोम ख़त्म करने की बात कही, जिसके चलते प्रदेश में चिकित्सकों के 600 पद खाली पड़े हैं, जबकि टांडा मेडिकल कॉलेज और आईजीएमसी से पास आउट हुए 200 छात्र पासआउट हुए है और वह पद भरे जा सकते थे। साथ ही संघ ने चिकित्सकों को 26 हजार वेतन दिए जाने के बाद 50 लाख से 01 करोड़ का बांड भरवाने को गलत बताया है, जिसके चलते चिकित्सक किसी बंधुआ मजदूर से कम नहीं लग रहे हैं।

डॉक्टर रोगियों को लिख रहे महंगी दवाइयां

घुमारवीं। राजमार्ग 103 शिमला-धर्मशाला के भगेड पर कांग्रेस ने बीजेपी का पुतला फूंका। कांग्रेस प्रकोष्ठ अध्यक्ष परवीन चन्देल ने rattan-lalकहा कि क्षेत्रीय अस्पताल बिलासपुर में कुछ एक डॉक्टर दवाई की दुकानें चलाने वालों के साथ मिलीभगत के चलते रोगियों को महंगी दवाइयां लिख रहे हैं। आजकल डॉक्टर कमीशन एजेंट बन चुके हैं। रोगियों की कोई परवाह नहीं है। बीजेपी के कुछ नेता इन दवाई विक्रेताओं को शरण दे रहे हैं।  प्रदेश सरकार ने दो करोड़ की दवाइयां उपलब्ध करवाई गई हैं और इसके बाबजूद डॉक्टर मरीजों को महंगी दवाई लिख रहे हैं।  इस मामले की उच्चस्तरीय जांच करवाई जाए।

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