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जैव विविधता का लाभ चंद कंपनियां नहीं आम लोग भी लें

जैव विविधता का लाभ चंद कंपनियां नहीं आम लोग भी लें

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Benefits of Biodiversity: जैव विविधता पर कार्यशाला में बोले अतिरिक्त मुख्य सचिव

Benefits of Biodiversity: शिमला। अतिरिक्त मुख्य सचिव (वन) तरूण कपूर ने कहा कि प्रदेश में हर साल निकलने वाली जैव विविधता में वैल्यू शेयरिंग जरूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि ऐसा करने से जैव विविधता का लाभ चंद लोग या चंद कंपनियां न लेकर प्रदेश के आम लोगों को भी इसका लाभ मिलेगा। वे आज यहां जैव विविधता अधिनियम 2002 विषय पर परस्पर संवादात्मक मीडिया कार्यशाला में बोल रहे थे।कपूर ने कहा कि जैव विविधता में अव वैल्यू शेयरिंग जरूरी हो गई है। उन्होंने कहा कि जैव विविधता एक्ट के तहत प्रदेश की 425 पंचायतों में बायो डायवर्सिटी कमेटियों (बीएमसी) का गठन हो चुका है और बाकी पंचायतों में इसके गठन की दिशा में जैव विविधता बोर्ड बढ़ रहा है। उनका कहना था कि इन कमेटियों को गांव में निकलने वाली जैव विविधता से कुछ हिस्सा मिलेगा,जिससे इन कमेटियों का संचालन किया जा सकेगा।


संरक्षण से बढ़ेगी जैव विविधता की कीमत

कपूर ने कहा कि प्रदेश में अभी एक अनुमान के मुताबिक 2500 मीट्रिक टन नॉन टिंबर उत्पाद यहां से निकल रहा है और इसके मुताबिक यह दस हजार करोड़ का उत्पाद निकल रहा है और यदि इसकी सही कीमत देखी जाए तो यह कहीं अधिक होगी। उनका कहना था कि जैव विविधता के संरक्षण की जरूरत है और इससे इसकी कीमत और बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि हिमाचल में यदि जैव विविधता का सही इस्तेमाल हो और इसका विस्तार किया जाए तो इससे यहां की आर्थिकी में भारी परिवर्तन हो सकता है।

जैव विविधता से जुड़े हैं अधिकांश हिमाचली

कपूर ने कहा कि हिमाचल में करीब -करीब सभी लोग जैव विविधता से जुड़े हैं, क्योंकि यहां अधिकतर क्षेत्र ग्रामीण हैं और यहां पर 66.5 फीसदी क्षेत्र वन के अधीन है और जो एरिया वन के अधीन नहीं है वह भी कृषि और बागवानी से जुड़ा है। उनका कहना था कि अब सरकार पतंजलि और डाबर जैसी कंपनियों से संपर्क कर रहे हैं और यहां से इस्तेमाल की जा रही जैव विविधता की जानकारी ली जा रही है। उनका कहना था कि जैव विविधता का अधिक से अधिक लाभ स्थानीय लोगों को इसके लिए जैव विविधता बोर्ड कार्य कर रहा है और इसमें मीडिया और स्थानीय लोगों की अहम भूमिका है।

जैव विविधता को सहेज कर रखना बड़ी चुनौती

इस मौके पर पर्यावरण, विग्यान एवं प्रौद्योगिकी विभाग की निदेशक डॉ अर्चना शर्मा ने कहा कि जैव विविधता को सहेज कर रखना आज बड़ी चुनौती है। उन्होंने कहा कि स्थानीय लोगों की जिसमें भागीदारी बढ़ानी है, क्योंकि उन्हें इसकी बहुत जानकरी है। उन्होंने कहा कि ग्रामीण इलाकों लोग आज कई जड़ी बूटियों का इस्तेमाल किया जाता है और उन्हें इसकी व्यापक जानकारी है और इसे सहेज कर रखना आवश्यक है। उनका कहना था कि जैव विविधता की वह सारी जानकारी जो लोगों को पता है, वह विलुप्त न हो, इसे लेकर जैव विविधता बोर्ड संवेदनशील है और इसे बचाने के लिए गांवों के लोंगों के पास जो जानकारी है, उसे डाक्यूमेंटिड किया जाएगा। इससे जैव विविधता का भी पूरा लाभ होगा और इसका विस्तार भी किया जाएगा।

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