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भूख ही नहीं बढ़ाती कचनार की कलियां और भी कई फायदे हैं इसके, पढ़े यहां

भूख ही नहीं बढ़ाती कचनार की कलियां और भी कई फायदे हैं इसके, पढ़े यहां

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कचनार का पेड़ सभी देशों में पाया जाता है। बागों की सुंदरता बढ़ाने के लिए यह पेड़ विशेष रूप से लगाया जाता है। कचनार का पेड़ 15 से 20 फुट ऊंचा होता है। यह पेड़ झुका हुआ और कमजोर शाखाओं वाला होता है। इसकी छाल लगभग 1 इंच मोटी, भूरे रंग की होती है जो लम्बाई में जगह-जगह फटी होती है। इसके पत्ते 3 से 6 इंच लंबे व 2 से 5 इंच चौडे़ होते हैं। इस पेड़ की फूल की कलियां हरी होती हैं और फूल सफेद, लाल या पीले रंग के होते हैं। कचनार के रासायनिक तत्त्वों का विश्लेषण करने पर पता चला है कि इसकी छाल में टैनिन (कषाय द्रव्य), शर्करा और एक भूरे रंग का गोंद होता है। इसके बीजों से 16.5 प्रतिशत की मात्रा में पीले रंग का तेल निकलता है। कचनार के फूल थाइरायड की सबसे अच्छी दवा हैं। इसके फूल में बीटा – सितोस्टीराल, ओक्ताकोसनाल, स्तिग्मास्तीराल, फ्लेवोनाइड आदि पाए जाते हैं। मुंह के छाले किसी दवा से ठीक न हो रहे हों तो कचनार की छाल के काढ़े से गरारे और कुल्ला कीजिए, फिर देखिये चमत्कार। कचनार के और भी बड़े फायदे हैं जैसे …


  • फरवरी-मार्च में पतझड़ के समय इस वृक्ष में फूल आते हैं और अप्रैल-मई में फल आते हैं इसकी छाल पंसारी की दुकान पर मिलती है और मौसम के समय इसके फूल सब्जी बेचने वालों के यहां मिलते हैं।
  • कचनार की जड़ को पानी में घिसकर लेप बना लें और इसे गर्म कर लें। इसके गर्म-गर्म लेप को सूजन पर लगाने से आराम मिलता है।
  • कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर उसमें थोड़ा-सा कत्था मिलाकर छालों पर लगाने से आराम मिलता है।
  • कचनार की एक चम्मच छाल को एक कप मट्ठा के साथ दिन में 3 बार सेवन करने से बवासीर में खून गिरना बंद होता है।
  • भूख न लगना-कचनार की फूल की कलियां घी में भूनकर सुबह-शाम खाने से भूख बढ़ती है।
  • गला बैठना-कचनार मुंह में रखकर चबाने या चूसने से गला साफ होता है। इसको चबाने से आवाज मधुर (मीठी) होती है और यह गाना गाने वाले व्यक्ति के लिए विशेष रूप से लाभकारी है।
  • गैस की तकलीफ-कचनार की छाल का काढ़ा बनाकर, इसके 20 मिलीलीटर काढ़ा में आधा चम्मच पिसी हुई अजवायन मिलाकर प्रयोग करने से लाभ मिलता है। सुबह-शाम भोजन करने बाद इसका सेवन करने से अफरा (पेट फूलना) व गैस की तकलीफ दूर होती है।
  • शहद के साथ कचनार की छाल का काढ़ा 2 चम्मच की मात्रा में दिन में 3 बार सेवन करने से खांसी और दमा में आराम मिलता है।
  • यदि मुंह से खून आता हो तो कचनार के पत्तों का रस 6 ग्राम की मात्रा में पीएं। इसके सेवन से मुंह से खून का आना बंद हो जाता है।
  • कचनार के सूखे फूलों का चूर्ण बनाकर लें और यह चूर्ण एक चम्मच की मात्रा में शहद के साथ दिन में 3 बार सेवन करें। इसके सेवन से रक्तपित्त में लाभ होता है। इसके फूलों की सब्जी बनाकर खाने से भी खून का विकार दूर होता है।

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