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कच्ची हो या पक्की इमली तो गुणकारी है जी

कच्ची हो या पक्की इमली तो गुणकारी है जी

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tamarind: भारत में सभी इमली को पहचानते हैं। एक साल पुरानी इमली के गुण अधिक होते हैं। कच्ची तथा नयी पकी इमली कम गुणकारी होती है। कच्ची इमली खट्टी, भारी व वायुनाशक होती है। पकी इमली एसिडिटी कम करने वाली, कान्स्टीपेशन दूर करने वाली, गर्म तासीर वाली, कफ तथा वायुनाशक प्रकृति की होती है। इमली के गूदे का पानी पीने से वमन, पीलिया, प्लेग, गर्मी के ज्वर में भी लाभ होता है।


tamarind: इसके और भी कई लाभ हैं जैसे –

  • ह्रदय की दहकता या जलन को शान्त करने के लिए पकी हुई इमली के रस (गूदे मिले जल) में मिश्री मिलाकर पिलानी चाहिए।
  • पकी हुई इमली के गूदे को हाथ और पैरों के तलुओं पर मलने से लू का प्रभाव समाप्त हो जाता है। यदि इस गूदे का
  • गाढ़ा घोल बालों से रहित सर पर लगा दें तो लू के प्रभाव से उत्पन्न बेहोशी दूर हो जाती है।
  • इमली की ताजा पत्तियां उबालकर, मोच या चोट वाले अंग को सेंके या धीरे-धीरे उस स्थान को उंगलियों से हिलाएं ताकि एक जगह जमा हुआ रक्त फ़ैल जाए।
  • 10 ग्राम इमली को 1 किलो पानी में औटा कर छानें और उसमें थोड़ा सा गुलाबजल मिलाकर रोगी को गरारे या कुल्ला कराएं तो गले की सूजन में आराम मिलता है।
  • पकी इमली का रस मिश्री के साथ पिलाने से ह्रदय में जलन कम हो जाती है।
  • उल्टी होने पर पकी इमली को पाने में भिगोएं और इस इमली के रस को पिलाने से उल्टी आनी बंद हो जाती है।
  • इमली के वृक्ष की जली हुई छाल की भस्म 10 ग्राम बकरी के दूध के साथ प्रतिदिन सेवन करने से पान्डु रोग ठीक हो जाता है और गाय के घी में मिलाकर लगाने से जलने के कारण पड़े छाले व घाव ठीक हो जाते हैं।

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