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हीरा है आखिर किसके लिए…

हीरा है आखिर किसके लिए…

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दुनिया के इस अति मूल्यवान रत्न की कुछ ऐसी विशेषताएं हैं, जो इसे एस्ट्रोलॉजी के लिहाज़ से महत्वपूर्ण  बनाता हैं। खास बात है कि इसकी पॉजिटिव एनर्जी जितनी तेजी से अपना असर छोड़ती है, उससे कहीं अधिक तेजी से इसकी निगेटिव ऊर्जा प्रभाव दिखलाती है। हीरा ही ऐसा रत्न है, जिसे केवल आभूषण के रूप में पहनने की गलती नहीं करनी चाहिए।  हीरे की सबसे खास बात है इससे निकलने वाली ऊर्जा किरण शरीर पर रिफ्लेक्शन के द्वारा ही प्रभाव कर जाती है।  यदि कोई व्यक्ति एक कैरेट से कम वजन का हीरा धारण करे तो सामान्यतया वह व्यर्थ सिद्ध हो जाता है। इसलिए इस बात की सावधानी जरूर बरतनी चाहिए कि कोई भी हीरा पहनने के लिए उसका वजन रिकमंडेड सीमा में हो साथ ही उस पर किसी भी तरह के  स्क्रेच न हों। हीरे का प्रतिनिधि ग्रह है शुक्र, जो ऐश्वर्य, विलासिता, सुखभोग, वाहन, राजसुख, स्त्री व इंद्रिय सुख आदि का प्रतिनिधित्व करता है। यानि समस्त संसार के समस्त भौतिक सुख शुक्र से प्रभावित होते हैं। जिस भी जातक की जन्म कुंडली में शुक्र की स्थिति मजबूत  होती है, उसे ऐसे सुखों का बाहुल्य होता है। किंतु विपरीत व नकारात्मक शुक्र की दशा में ठीक इससे विपरीत हालात होते हैं।

यानि यदि किसी जातक की कुंडली में शुक्र की दशा खराब है, तो ऐसा जातक जीवनभर कष्ट भोगता रहता है, उसे सुख-साधन प्राप्त होने में बड़ी कठिनाई का सामना करना पड़ता है।अब यदि खराब शुक्र की दशा मौज़ूद हो किसी ने भी भूलवश हीरा पहन लिया तो उसके लिए यह विनाशकारी साबित हो जाता है।

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