Covid-19 Update

58,877
मामले (हिमाचल)
57,386
मरीज ठीक हुए
983
मौत
11,156,748
मामले (भारत)
115,765,405
मामले (दुनिया)

70 वर्ष से लोगों के सिरों पर ताज सजा रहा है Mandi का यह शख्स

70 वर्ष से लोगों के सिरों पर ताज सजा रहा है Mandi का यह शख्स

- Advertisement -

मंडी। पगड़ी को सिर का ताज कहा जाता है। यह ताज जिस किसी के सिर पर सजता है उसकी शान ही अलग हो जाती है। पगड़ी ( Turban)की क्या शान होती है इसका अंदाजा आप इसी बात से लगा सकते हैं कि देश के पीएम नरेंद्र मोदी( PM Narendra Modi) स्वतंत्रता और गणतंत्र दिवस पर पगड़ी बांधकर शामिल होने आते हैं। लेकिन इस ताज को सिर पर सजाना कोई आसान काम नहीं होता। पगड़ी बांधना अपने आप में एक कला है और इस कला में माहिर हैं मंडी जिला के बल्ह उपमंडल के दरबाथू गांव निवासी 90 वर्षीय भगत राम। भगत राम ने मात्र 20 वर्ष की आयु में अपने बुजुर्गों से इस कला को सीखा और इसमें महारत हासिल की। भगत राम बताते हैं कि पहले किसी शादी समारोह या बड़े उत्सवों में जाने वालों की तब तक इज्जत नहीं होती थी जब तक वह सिर पर पगड़ी बांधकर नहीं आते थे।

यह भी पढ़ें :-  Doctor की अनुपस्थिति में मानसिक रोगी ने कर डाला मरीजों का ‘इलाज’, ऐसे हुआ मामले का खुलासा

हालांकि आज पगड़ी की जगह रेडिमेड टोपियों ने ले ली है लेकिन फिर भी पगड़ी बांधने का रिवाज बरकरार है। भगत राम के अनुसार उन्हें 70 वर्ष हो चुके हैं लोगों के सिरों पर पगड़ी के रूप में ताज सजाते हुए। इस दौरान भगत राम सीएम जयराम ठाकुर, पूर्व सीएम वीरभद्र सिंह और प्रेम कुमार धूमल के सिरों पर भी पगड़ियां बांध चुके हैं। वहीं इलाके में जब भी कोई शादी समारोह होता है तो भगत राम को विशेष रूप से पगड़ियां बांधने के लिए बुलाया जाता है।

मंडी के अंतरराष्ट्रीय शिवरात्रि महोत्सव में भगत राम को विशेष रूप से पगड़ियां बांधने के लिए बुलाया जाता है और उनके हाथों से पगड़ी बंधवाने वालों की होड़ लगी रहती है। पगड़ी सही ढंग से बंधे और उसकी एक अलग शान नजर आए, इसलिए लोग इनके हाथों से पगड़ी बंधवाने का इंतजार करते हैं। खास बात यह है कि मंडी जिला की भावी पीढ़ी भी पगड़ी बांधने की कला को सीखने में खासी दिलचसपी दिखा रही है। 24 वर्षीय लेख राज बताते हैं कि उन्होंने पगड़ी बांधने की कला अपने बुजुर्गों से सीखी और वह आगे भावी पीढ़ी को इस कला को सीखाने का प्रयास करेंगे। बता दें कि मंडी जिला के अधिकतर स्थानों पर बड़े समारोहों में पगड़ी बांधने का रिवाज आज भी कायम है। हालांकि आजकल रेडिमेड पगड़ी टाईप टोपियों का प्रचलन भी शुरू हो गया है लेकिन कपड़े से बांधी गई पगड़ी की अपनी एक अलग ही पहचान और शान है।

हिमाचल अभी अभी की मोबाइल एप अपडेट करने के लिए यहां क्लिक करें

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है