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कुल्लू दशहराः भगवान नरसिंह की भव्य जलेब ने लगाया सुरक्षा चक्र

कुल्लू दशहराः भगवान नरसिंह की भव्य जलेब ने लगाया सुरक्षा चक्र

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कुल्लू। अंतरराष्ट्रीय दशहरा पर्व में आज भी सैंकड़ों वर्षों पुरानी परंपरा जिंदा है और लोग इसका निर्वाह कर रहे हैं। इसी कड़ी में कुल्लू शहर के रक्षक माने जाने वाले भगवान नरसिंह की अलौकिक एवं भव्य जलेब यात्रा आज से शुरू हो गई है। इस दौरान कुल्लू शहर वाद्ययंत्रों की ध्वनि से गूंज उठा। इस जलेब को राजा की जलेब भी कहा जाता है, क्योंकि इस जलेब में कुल्लू का राजा परंपरा के अनुसार पालकी में सज-धज कर यात्रा करता है। कुल्लू का राजा महेश्वर सिंह इस विशेष प्रकार की पालकी में बैठकर परिक्रमा पर निकल पड़े हैं और यह जलेब छह दिनों तक चलेगी।


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भगवान नरसिंह की जलेब चलना दशहरा पर्व में शुभ माना जाता है। उस दौरान भगवान नरसिंह की जलेब की परिक्रमा इसलिए होती थी ताकि सुरक्षा का पूरा जायजा लिया जा सके। माना जाता है कि भगवान नरसिंह इस दौरान पूरे कुल्लू शहर की किलाबंदी कर देते हैं और अपनी शक्तियों से किसी भी बुरी आत्मा को देवनगरी में प्रवेश करने नहीं देते। इस जलेब में दशहरा पर्व में भाग लेने आए सैंकड़ों देवी-देवता बारी-बारी से भाग लेते हैं। इस जलेब में जहां आगे-आगे नरसिंह भगवान की घोड़ी सज धज कर चलती है वहीं राजा की पालकी के साथ दोनों तरफ देवता के रथ चलते हैं। यह जलेब राजा की चनणी से शुरू होती है तथा पुरे ढालपुर की परिक्रमा करके चनणी के पास ही समाप्त होती है।

दरअसल यह जलेब भगवान नरसिंह की मानी जाती है तथा राजा नरसिंह का प्रतिनिधि होने के नाते इस पालकी में विराज मान होता है। यह जलेब पुराने समय में कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा बुरी आत्माओं की कुदृष्टि से बचने के लिए चलती थी। यह परंपरा आज भी जीवित है। दशहरा पर्व में पुरातन समय में कुल्लू के राजा की जो भूमिका थी वह आज भी उनके वंशज उसी तरह से पुरातन रीति रिवाजों व परंपरागत ढंग से निभा रहे हैं। बहरहाल दशहरा पर्व में आज भी सदियों से चली आ रही पुरानी प्रथाएं एवं अनूठी संस्कृति सांस ले रही है। राजा की चनणी से लेकर पूरे शहर में निकली इस जलेब में दर्जनों देवी-देवता ढोल-नगाड़ों की थाप पर परिक्रमा पर निकले और लोग नाचते-गाते रहे।

 

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