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जैव विविधता से ही हमारी सुरक्षा

जैव विविधता से ही हमारी सुरक्षा

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Biodiversity: एक पूरे ग्रह में जीवन के रूपों की विभिन्नता का परिमाण जैव विविधता है। हर साल जैव विविधता का संरक्षण दिवस 22 मई को मनाया जाता है। यह एक अंतरराष्ट्रीय पर्व है जो हमारे जीवन के लिए महत्त्वपूर्ण है और इसीलिए संयुक्त राष्ट्र ने इसे मनाना प्रारंभ किया। जीवन में जैव विविधता का अपना महत्व है क्योंकि जहां भी इसका संतुलन बिगड़ा तो इसका सीधा असर हमारे जीवन पर आता है तब हमें आपदाओं का सामना करना पड़ता है और बाढ़, सूखा, तूफान आने का खतरा और भी बढ़ जाता है लाखों विशिष्ट जैविक और कई प्रजातियों के रूप में पृथ्वी पर जीवन उपस्थित है। पेड़-पौधे, जीव-जंतु, मिट्टी, पानी, हवा, महासागर, पठार, समुद्र और नदियों की सुरक्षा तो हमें खुद ही करनी होगी क्योंकि यही हमारे अस्तित्व और विकास के काम आते हैं।

इस दिवस का उद्देश्य विशेष तौर पर वनों की सुरक्षा, संस्कृति जीवन के कला शिल्प, वस्त्र-भोजन तथा औषधीय पौधों के महत्त्व आदि को प्रदर्शित करके जागरूक किया जाना है। यह सुखद है कि विश्व के समृद्धतम जैव विविधता वाले सत्रह देशों में भारत भी है। यह एक ऐसा देश है जिसमें विश्व की 70 प्रतिशत जैव विविधता विद्यमान है। गौरतलब है कि जैवविविधता के सक्रिय क्षेत्रों में पाई जाने वाली प्रजातियां उस क्षेत्र तक ही सीमित हैं।


Biodiversity: 150 पक्षियों का अस्तित्व खतरे में

भारत में 450 प्रजातियों को विलुप्त होने की कगार पर दर्ज किया गया है। इस समय तक 150 पक्षियों का अस्तित्व खतरे में है। कीटों की अनेक प्रजातियां विलुप्तता की कगार पर हैं। यदि हालात ऐसे ही रहे तो तो 2050 तक हम एक तिहाई से ज्यादा जैव विविधता खो देंगे। इस बढ़ते हुए असंतुलन के ज्यादा कारण मानव जनित हैं। आवास की कमी, प्रदूषण, जलवायु परिवर्तन प्राकृतिक या मानव जन्य आपदाएं तथा खाद्य श्रृंखला में हो रहे बदलाव इसके कारण हैं। भारत में दो बायोलॉजिकल हॉटस्पॉट हैं जिसमें एक पूर्वी हिमालय और दूसरा पश्चिमी घाट में हैं। भारत ने देश भर में 18 बायोस्फीयर भंडार स्थापित किए हैं जो जीव-जंतुओं के प्राकृतिक भू-भाग की रक्षा करते हैं। भारतीय उपमहाद्वीप में पक्षियों की 176 प्रजातियां हैं, इसके अलावा दुनियाभर में पाए जाने वाले 1235 प्रजातियों के पक्षी भारत में हैं।

स्वयं हमने किया जैव विविधता का अवमूल्यन

गंदगी साफ करने में कौआ और गिद्ध प्रमुख हैं। गिद्ध शहरों से ही नहीं जंगलों से भी खत्म हो गए। उनके खत्म हो जाने से मृत पशुओं की सफाई बीजों के प्रकीर्णन और परागण कुछ हद तक प्रभावित हुआ है। हम सोचते हैं कि चमगादड़ पूरी तरह बेकार हैं पर अमेरिका चमगादड़ों को सुरक्षित करने में जुटा है। यह रात्रिचर पक्षी है और मच्छरों के लार्वा खाता है। हम कह सकते हैं कि उल्लू हमारे किस काम का, पर किसान जानता है कि वह खेती का मित्र है क्योंकिउसका मुख्य भोजन ही चूहा है। जैव विविधता का अवमूल्यन स्वयं हमने किया है । हमें यह नहीं भूलना चाहिए कि जाने कितने अदृश्य सूक्ष्म जीव समूह हैं जो पारिस्थितिकी चक्रों में भूमिका अदा करते हैं इस खतरे को देखते हुए जरूरी हो जाता है कि हम जैव विविधिता का संरक्षण करें इसी में हमारी भी सुरक्षा है।

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