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करेला : कड़वा तो है पर गुण हैं बड़े-बड़े

Bitter Gourd Benefits

करेला : कड़वा तो है पर गुण हैं बड़े-बड़े

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करेला बेल पर लगने वाली सब्जी है। सब्जी और औषधि के रूप में इस्तेमाल करने के लिए कच्चा करेला ही ज्यादा मुफीद होता है। करेले का जन्म स्थान अफ्रीका तथा चीन माने जाते हैं। इसमें ढेरों एंटीऑक्सीडेंट और जरूरी विटामिन पाए जाते हैं। करेले में प्रचुर मात्रा में विटामिन A, B और C पाए जाते हैं। इसके अलावा कैरोटीन, बीटा कैरोटीन, लूटीन, आइरन, जिंक, पोटैशियम, मैग्नीशियम और मैंगनीज जैसे फ्लावोन्वाइड भी पाए जाते हैं। बड़े करेले के सेवन से प्रमेह, पीलिया और आफरा में लाभ मिलता है। छोटा करेला बड़े करेले की तुलना में ज्यादा गुणकारी होता है। करेला ज्वर, पित्त, कफ रुधिर विकार, पीलिया, और कृमि रोग का नाश भी करता है। करेली के गुण भी करेले के समान हैं। करेले का साग उत्तम पथ्य है। यह आमवात, वातरक्त, यकृत, एवं त्वचा रोग में लाभदायक होता है। इसमें विटामिन ‘ए’ अधिक मात्रा में होता है। इसमें लोहा, फास्फोरस तथा कम मात्रा में विटामिन सी भी पाया जाता है।

Bitter Gourd Benefits

Bitter Gourd Benefits

  • करेला मधुमेह में रामबाण औषधि का काम करता है। करेले के टुकड़ों को छाया में सुखाकर पीसकर महीन पाउडर बना लें। रोजाना सुबह खाली पेट एक चम्मच पाउडर का पानी के साथ सेवन करने से लाभ मिलता है।
  • मधुमेह के लिए करेले का जूस काफी फायदेमंद होता है। करेले में इंसुलिन की तरह कई रसायन पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर लेवल को कम करता है। एक असाध्य बीमारी है मधुमेह ‘डायबिटीज’। करेला मधुमेह के रोगियों के लिए ‘अमृत’ तुल्य है। 100 मिली. के रस में इतना ही पानी मिलाकर दिन में तीन बार लेने से लाभ होता है।
  • हैजे के रोगी को करेले के रस में प्याज का रस और कुछ बूंदे नींबू का रस मिलाकर देना लाभदायक है। ताजा करेला कुचलकर, इसमें हल्का, नमक डालकर हैजे के रोगी को दें, 2-3 बार लेने से उल्टी-दस्त बंद हो जाते हैं।

  • सिरदर्द होने पर करेले के रस का लेप लगाने से आराम मिलता है।
  • एक बड़ा चम्मच करेले के पत्तियों के रस को एक गिलास छाछ में मिलाकर लेने से पेट के कीड़ों से छुटकारा मिल सकता है। यह लीवर को ताकत देता है तथा आंतों में कीड़ों से होने वाले विकारों से भी सुरक्षा देता है। पेट में कीड़े होने पर इसका रस रामबाण औषधि है। कीड़े होने पर करेले का रस लेना चाहिए।
  • करेले में फाइबर के गुण पाए जाते हैं, जो पाचन तंत्र को मजबूत बनाता है। साथ ही यह अपच और कब्ज की शिकायत को दूर करता है। इससे एसिडिटी, छाती में जलन और खट्टी डकारों की शिकायत भी दूर हो जाती है।
  • पीलिया और मलेरिया जैसे बुखार में करेले को पीसकर निकाले गए रस को दिन में दो बार पिलाना चाहिए। पीलिया में कच्चा करेला पीसकर खाना फायदेमंद है।

  • लीवर से संबंधित बीमारियों के लिए तो करेला रामबाण औषधि है। जलोदर रोग होने पर आधा कप पानी में 2 चम्मच करेले का रस मिलाकर ठीक होने तक रोजाना तीन-चार बार सेवन करने से फायदा होता है।
  • एक कप पानी में दो चम्मच करेले का रस, तुलसी के पत्तों का रस और शहद मिलाकर रात में सोते समय पीने से अस्थमा, ब्रोंकाइटिस जैसे रोगों में आराम मिलता है।
  • कफ की शिकायत होने पर करेले का सेवन करना चाहिए। करेले में फास्फोरस होता है, जिसके कारण कफ की शिकायत दूर होती है।

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