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BJP का हमलाः कौन खा रहा बेरोजगारों के भत्ते, हो जांच

BJP का हमलाः कौन खा रहा बेरोजगारों के भत्ते, हो जांच

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शिमला। कौशल विकास के नाम पर प्रदेश में कई ऐसी एनजीओ को प्रशिक्षण का कार्य देने की बंदरबांट की गई है, जिनके पास प्रशिक्षण देने का अनुभव तो दूर मूल आधारभूत संरचना का भी अभाव है और कुछ एनजीओ तो कार्य आबंटन से पूर्व मात्र कागजों में ही चल रही थी। अधिकतर एनजीओ कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों और उनके चहेतों की है जो सुनियोजित तरीके से बेरोजगारों के हकों को मारकर अपनी झोलियां भर रहे हैं।


  • बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सत्ती व मुख्य प्रवक्ता बिंदल ने साधा निशाना
  • बोले, कांग्रेस नेताओं के रिश्तेदारों और उनके चहेतों की भरी झोलियां

bjp-2यह बात बीजेपी के प्रदेशाध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती व मुख्य प्रवक्ता डॉ राजीव बिंदल ने कही। बीजेपी नेताओं ने सीएम के इस दावे को कोरा झूठ करार दिया कि कौशल विकास से प्रशिक्षण के दौरान लाखों युवकों को 1000 रुपये प्रतिमाह की दर से और दिव्यांगों को 1500 रुपये की दर से कौशल विकास भत्ता दिया जा रहा है। जबकि सच्चाई यह है कि हजारों बेरोजगार युवा ऐसे हैं, जिन्हें न प्रशिक्षण के दौरान और न ही उसके पश्चात एक फूटी कौड़ी मिली है।

कौशल विकास भत्ते के नाम पर बेरोजगार युवाओं के पैसों भत्तों को कौन खा रहा है, इसकी जांच होनी चाहिए। बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती व मुख्य प्रवक्ता डॉ. राजीव बिन्दल ने कौशल विकास भत्ते के आंकड़ों पर प्रदेश सरकार को घेरते हुए कहा कि केन्द्र सरकार की योजना को अपना बताकर प्रदेश सरकार जनता को गुमराह करने की कोशिश कर रही है। प्रदेश सरकार ने तो इस योजना में केन्द्र से मिल रहे धन का दुरुपयोग करके प्रदेश के सबसे सुनियोजित भ्रष्टाचार को अंजाम दिया है।

बीजेपी नेताओं ने आरोप लगाया कि बेरोजगारी की समस्या से निपटने में विफल रही प्रदेश सरकार बेरोजगारों के आंकड़ों को कम दिखाने का प्रयास कर रही है। प्रदेश में रोजगार कार्यालयों के अनुसार बेरोजगार युवाओं की संख्या लगभग 9 लाख है, जबकि वास्तविकता में प्रदेश में बेरोजगार युवा इससे भी कहीं अधिक है। परन्तु सरकार अब सांख्यिकी और गणना विभाग द्वारा किए सर्वेक्षण का सहारा लेकर बेरोजगार युवाओं की संख्या मात्र 3 लाख 30 हजार दिखा रही हैं। अगर संख्या कम दिखाने से बेरोजगारी मिट सकती है तो सीएम का यह कदम निःसंदेह प्रशसनीय है, परन्तु वह भूल रहे हैं कि बंद आंखों पर मिट्टी डालने से न तो समस्या का समाधान होगा और न ही कांग्रेस की विफलताएं छुप पाएंगी।

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