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सत्ती @ MC Election: वैधानिक संस्थाओं से मजाक किया कांग्रेस ने

सत्ती @ MC Election: वैधानिक संस्थाओं से मजाक किया कांग्रेस ने

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Satpal Singh Satti: शिमला। बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष सतपाल सिंह सत्ती ने प्रदेश की कांग्रेस सरकार पर प्रहार करते हुए कहा है कि प्रदेश के कांग्रेसी नेता 27 अप्रैल को शिमला में हुई पीएम नरेन्द्र मोदी की रैली से इतना घबरा गए कि शिमला नगर निगम का चुनाव करवाने के लिए संवैधानिक संस्था राज्य निर्वाचन आयोग को भी कठपुतली बनाकर रख दिया है।


उन्होंने कहा कि राज्य निर्वाचन आयोग एक संवैधानिक संस्था है जिसका विवरण भारतीय संविधान की धारा 243 यू में अंकित है और यह धारा स्पष्ट करती है कि किसी भी सूरत में स्थानीय शहरी निकाय चाहे वह किसी भी स्तर के हो, का कार्यकाल 5 वर्ष से अधिक नहीं बढ़ाया जा सकता, परन्तु राज्य निर्वाचन आयोग द्वारा मतदाता सूचियों को दूसरी बार पुर्नरिक्षीत करने के आदेश से पूर्णतः स्पष्ट हो गया है  कि प्रदेश की कांग्रेस सरकार नगर निगम के चुनाव को टालना चाह रही है और इसलिए संवैधानिक संस्थाओं के साथ भी भद्दा मजाक किया जा रहा है। उन्होनें कहा कि नगर निगम क्षेत्र के मतदाता चाहते हैं कि नगर निगम के चुनाव समय पर हो ताकि वे लोकतांत्रिक तरीके से अपने प्रतिनिधियों को चुन सके।

Satpal Singh Satti: अधिसूचना को बार-बार संशोधित किया

सत्ती ने प्रदेश सरकार पर आरोप लगाया कि राज्य निर्वाचन आयोग के जिस अधिकारी ने, जो सचिव के पद पर तैनात है, असंवैधानिक कार्य करके नगर निगम के चुनाव के लिए जारी की हुई अधिसूचना को बार-बार संशोधित किया है, जिससे स्पष्ट होता है कि अधिकारी पर दबाव डाला गया और अधिकारी से दबाव में दूसरी बार संशोधन के लिए अधिसूचना जारी करने के लिए कहा गया। 

उन्होंने कहा यही नहीं उक्त अधिकारी को संविधान के दायरे से बाहर कार्य करने के लिए सरकार ने उन्हें पुरस्कृत भी किया गया और उन्हें अपने गृह क्षेत्र में प्रबन्ध निदेशक कांगड़ा सहकारी बैंक के पद पर तैनात किया गया और राज्य निर्वाचन आयोग में सचिव के पद का अतिरिक्त पदभार अपने चहेते अधिकारी को दिया गया है ।

चुनाव टालने का तीसरा असफल प्रयास

सत्ती ने कहा कि यह प्रदेश के कांग्रेस के नेताओं का नगर निगम चुनाव को टालने का तीसरा असफल प्रयास है, क्योंकि उन्हें अपनी हार का निरंतर अहसास हो रहा है इसलिए वे संविधान का उल्लंघन करने के साथ सरकारी अधिनियमों का उल्लंघन भी कर रहे हैं जिसके राज्य निर्वाचन आयोग के आयुक्त भी पूरी तरह दोषी है। 

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