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रक्तदान शिविर को स्वीकृति लेने गए, तो की बदतमीजी

रक्तदान शिविर को स्वीकृति लेने गए, तो की बदतमीजी

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धर्मशाला। क्षेत्रीय चिकित्सालय धर्मशाला के वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक ने अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद द्वारा प्रस्तावित रक्तदान शिविर को स्वीकृति एवं स्वास्थ्य टीम मुहैया नहीं करवाई, जिसके चलते विद्यार्थी परिषद का क्षेत्रीय अध्ययन केंद्र मोहली खनियारा में होने वाला रक्तदान शिविर नहीं लग सका। वीरवार को होने वाले इस शिविर में करीब 75 छात्रों ने रक्तदान करना था।

  • blood-donation-camp-2एबीवीपी ने वरिष्ठ चिकित्सा अधीक्षक पर लगाया आरोप
  • शिविर को स्वास्थ्य टीम नहीं करवाई मुहैया
  • स्वास्थ्य मंत्रालय व कौल सिंह को ज्ञापन भेजा और कार्रवाई मांगी

एक तो चिकित्सा अधीक्षक ने स्वीकृति ही नहीं दी, उल्टे वीरवार सुबह जब विद्यार्थी परिषद के पदाधिकारी व सदस्य उनके पास गुहार लगाने पहुंचे तो उन्होंने कार्यकर्ताओं के साथ बदतमीजी के साथ व्यवहार किया और उन्हें अपने कमरे से बाहर निकाल दिया।

इस पर एबीवीपी ने मेडिकल सुपरिटेडेंट (एमएस) के खिलाफ स्वास्थ्य मंत्रालय व प्रदेश स्वास्थ्य मंत्री ठाकुर कौल सिंह को ज्ञापन भेजते हुए कार्रवाई की मांग की है।

protesting-handsविद्यार्थी परिषद के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य दिव्यांश चंदेल ने वीरवार को धर्मशाला पत्रकार वार्ता में बताया कि सुनील उपाध्याय पखवाड़े के तहत विद्यार्थी परिषद प्रदेश भर में रक्तदान शिविरों को आयोजन कर रही है। इसी के तहत वीरवार को रीजनल सेंटर में शिविर का आयोजन किया जाना था। इसके लिए धर्मशाला अस्पताल ब्लड बैंक की टीम मुहैया करवाने के लिए उन्होंने नौ नवंबर को एमएस धर्मशाला को पत्र भी लिखा था और फोन के माध्यम से बातचीत भी की थी। लेकिन, शाम को उन्होंने फोन पर फिर से मना कर दिया।

वीरवार सुबह वह फिर से जब उनके पास टीम भेजने के लिए गए तो उन्होंने ब्लड बैंक अधिकारी न होने का हवाला देते हुए टीम भेजने से साफ मना कर दिया और उनके साथ अभद्र व्यवहार करते हुए बाहर निकाल दिया। सदस्यों का आरोप है कि एमएस ने उन्हें पुलिस की भी धमकी दी।एबीवीपी का आरोप है कि 9 नवंबर को विद्यार्थी परिषद ने एमएस को पत्र लिखा था और वीरवार को शिविर का आयोजन होना था, लेकिन एमएस ने वीरवार सुबह छात्रों के साथ अभद्र व्यवहार करने के बाद वीरवार सुबह 10:45 पर आवेदन पत्र का जवाब दिया।

इस बारे में सीएमओ कांगड़ा डॉ. आरएस राणा का कहना है कि शिविर की स्वीकृति देना एमएस के कार्यक्षेत्र में आता है। एमएस ने टीम भेजने से क्यों मना किया है। इसकी जानकारी नही हैं।

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