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विज्ञान विषयः अध्याय-6……… जैव प्रक्रम

LIFE PROCESSES

विज्ञान विषयः अध्याय-6……… जैव प्रक्रम

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प्रश्न 1. हमारे जैसे बहुकोशिकीय जीवों में ऑक्सीजन की आवश्यकता पूरी करने में विसरण क्यों अपर्याप्त है?


उत्तर-बहुकोशी जीवों में उनकी केवल बाहरी त्वचा की कोशिकाएं और रंध्र ही आस-पास के वातावरण से सीधे संबंधित होते हैं। उनकी सभी कोशिकाएं तथा भीतरी अंग सीधे अपने आस-पास के वातावरण से संबंधित नहीं रह सकते। वे ऑक्सीजन की अपनी आवश्यकता पूरी करने के लिए विसरण पर आश्रित नहीं रह सकते। श्वसन, गैसों के आदान-प्रदान तथा अन्य कार्यों के लिए विसरण बहुकोशी जीवों की आवश्यकता के लिए बहुत कम और धीमा है। यदि हमारे शरीर में विसरण के द्वारा ऑक्सीजन गति करती तो हमारे फुफ्फुस से ऑक्सीजन के एक अणु को पैर के अंगूठे तक पहुंचने में लगभग 3 वर्ष का समय लगता। हम स्वयं ही सोच सकते हैं कि उस अवस्था में क्या हमारा जीवन संभव होता? हमारे शरीर में विद्यमान रक्त में हीमोग्लोबिन ही तेज़ी से हमें ऑक्सीजन कराता है।

प्रश्न 2. कोई वस्तु सजीव है, इसका निर्धारण करने के लिए हम किस मापदंड का उपयोग करेंगे?

उत्तर-सभी जीवित वस्तुएं सजीव कहलाती हैं। वे रूप-आकार, रंग आदि की दृष्टि से समान भी होते हैं तथा भिन भी। पशु गति करते हैं, बोलते हैं, सांस लेते हैं, खाते हैं, वंश वृद्धि करते हैं और उत्सर्जन करते हैं। पेड़-पौधे बोलाते नहीं हैं, भागते-दौड़ते नहीं हैं पर फिर भी वे सजीव हैं। अति सूक्ष्म स्केल पर होने वाली उनकी गतियां दिखाई नहीं देती अणुओं की गतियां न होने की अवस्था में वस्तु को निर्जीव माना जाता है। यदि वस्तु में अणुओं में गति हो तो वस्तु सजीव मानी जाती है। सामान्यतः सजीवों में निम्नलिखित विशेषताएं होती हैं-

  1. सजीवों की संरचना सुसंगठित होती है।
  2. उनमें कोशिकाएं और ऊतक होते हैं।
  3. उनकी संगठित और सुव्यवस्थित संरचना समय के साथ पर्यावरण के प्रभाव से विघटित होने लगती है।
  4. सजीवों की निश्चित रूप से मृत्यु होती है।
  5. सजीव अपने शरीर की मरम्मत और अनुरक्षण करते हैं। उनकी संरचना अणुओं से हुई है और उन्हें अणुओं को लगातार गतिशील बनाए रखना चाहिए।
  6. सजीवों मे विशेष सीमा में वृद्धि होती है।
  7. उनके शरीर में रासायनिक क्रियाओं की श्रृंखला चलती है। उनमें उपचय-अपचय अभिक्रियाएं होती हैं। प्रश्न 3. किसी जीव द्वारा किन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है?

उत्तर-किसी जीव के द्वारा जिन कच्ची सामग्रियों का उपयोग किया जाता है, वे हैं-

  1. ऊर्जा प्राप्ति के लिए उचित पोषण।
  2. श्वसन के लिए पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन।

प्रश्न 4. जीवन के अनुरक्षण के लिए आप किन प्रक्रम को आवश्यक मानेंगे?

उत्तर-जीवन के अनुरक्षण के लिए जो प्रक्रम आवश्यक माने जाने चाहिएं, वे हैं-पोषण, श्वसन, परिवहन और उत्सर्जन।

प्रश्न

प्रश्न 1. स्वयंपोषी पोषण तथा विषमपोषी पोषण में क्या अंतर हैं?

(H.P. 2011, Set-A, 2013 Set C, 2014 Set C2015)

उत्तर-स्वयंपोषी पोषण और विषमपोषी (परपोषी) पोषण में अंतर-

स्वयंपोषी पोषण विषमपोषी पोषण
वे जीव जो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा सरल अकार्बनिक से जटिल कार्बनिक पदार्थों का निर्माण करके अपना स्वयं पोषण करते हैं, स्वयंपोषी जीव (Autot rophs) कहलाते हैं।

उदाहरण-सभी हरे पौधे, युग्लीना।

वे जीव जो कार्बनिक पदार्थ और ऊर्जा को अपने भोज्य पदार्थ के रूप में अन्य जीवित या मृत पौधों या जंतुओं से ग्रहण करते हैं, विषमपोषी जीव (Heterot- rophs) कहलाते हैं।

उदाहरण-युग्लीना को छोड़कर सभी जंतु। अमरबेल, जीवाणु, कवक आदि।

प्रश्न 2. प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री पौधा कहां से प्राप्त करता है?

(H.P. 2009, Set A)

अथवा

प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम लिखिए।                (H.P. 2011 Set-II, 2012 Set-III)

उत्तर-प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्ची सामग्री कार्बन-डाइऑक्साइड तथा जल है। पौधे कार्बन इऑक्साइड वातावरण से प्राप्त करते है और जल भूमि से।

प्रश्न 3. हमारे अमाशय में अम्ल की भूमिका क्या है?

(M.O.P. 2008, H.P. 2009, Set B, 2011, Set-C, 2015, 2016 Set B)

उत्तर-अमाशय की भित्ति में उपस्थित जठर ग्रंथियों से हाइड्रोक्लोरिक अम्ल उत्पन्न होता है। यह अम्लीय माध्यम तैयार करता है जो पेप्सिन एंजाइम की क्रिया में सहायक होता है। यह भोजन को सड़ने से रोकता है। यह भोजन के साथ आए जीवाणुओं को नष्ट कर देता है। भोजन में उपस्थित Ca को कोमल बनाता है। यह पाइलोरिफ छिद्र के खुलने और बंद होने पर नियंत्रण रखता है। यह निष्क्रिय एंजाइमों (enzymes) को सक्रिय अवस्था में लाता है।

प्रश्न 4. पाचक एंजाइमों का क्या कार्य है?                                        (H.P. 2011 Set-B, 2013 Set C, 2014 Set A)

उत्तर-एंजाइम वे जैव उत्प्रेरक होते हैं जो जटिल पदार्थों को सरल पदार्थों में खंडित करने में सहायता प्रदान करते हैं। पाचन क्रिया में कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा के पाचन में सहायक बनते हैं। उदर में लाइपेज नामक एंजाइम वसा को वसीय अम्ल और ग्लिसरॉल में बदलता है। रेनिन नामक एंजाइम क्रिया कर पेप्सिन की सहायता करता है और इसमें दूध- प्रोटिन पर पेप्सिन की क्रिया अवधि बढ़ जाती है। पित्त रस भोजन के माध्यम को क्षारीय बनाकर वसा को छोटे-छोटे टुकड़ों में तोड़ देता है और उनका इमल्सीकरण करता है। अग्न्याशय रस इयल्शन बने वसीय को वसा अम्ल और ग्लिसरॉल में बदल देता है। एमाइलेज भोजन के कार्बोहाइड्रेट को माल्टोस में बदल देता है। छोटी आंत की आंतरिक दीवारों से पैप्टिडेन, आंत्र लाइपेस, सुक्रेज, माल्टोज़ और लेक्टोज़ निकलकर भोजन को पचने में सहायक बनते हैं। ये एंजाइम प्रोटीन को अमीनों अम्ल, जटिल कार्बोहाइड्रेट को ग्लूकोज़ में तथा वसा को वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदल देते है।

प्रश्न 5. पचे हुए भोजन को अवशोषित करने के लिए क्षुद्रांत्र को कैसे अभिकल्पित किया गया है?

उत्तर-पचे हुए भोजन को आंत्र की भित्ति अवशोषित कर लेती है। क्षुद्रांत्र के आंतरिक आस्तर पर अंगुली जैसे अनेक प्रवर्ध होते हैं, जिन्हें दीर्घ रोम कहते हैं। ये अवशोषण के सतही क्षेत्रफल को बढ़ा देते हैं। इनमें रुधिर वाहिकाओं की अधिकता होती है जो भोजन को अवशोषित करके शरीर की प्रत्येक कोशिका तक पहुंचाने का कार्य करते हैं। यहां इसका उपयोग ऊर्जा प्राप्त करने, नए ऊतकों का निर्माण करने तथा पुराने ऊतकों की मरम्मत के लिए किया जाता है।

प्रश्न

प्रश्न 1. श्वसन के लिए ऑक्सीजन प्राप्त करने की दिशा में एक जलीय जीव की अपेक्षा स्थलीय जीव किस प्रकार  लाभप्रद हैं?                                                                                                                        (H.P. 2009, Set C)

उत्तर-जलीय जीव जल में घुली हुई ऑक्सीजन का श्वसन के लिए उपयोग करते हैं। जल में घुली हुई ऑक्सीजन की मात्रा वायु में उपस्थित ऑक्सीजन की मात्रा की तुलना में बहुत कम है। इसलिए जलीय जीवों के श्वसन की दर स्थलीय जीवों की अपेक्षा अधिक तेज़ होती है। मछलियां अपने मुंह के द्वारा जल लेती हैं और बल-पूर्वक इसे क्लोम तक पहुंचाती हैं। वहां जल में घुली हुई ऑक्सीजन को रुधिर प्राप्त कर लेता है।

प्रश्न 2. ग्लूकोज़ के ऑक्सीकरण से भिन्न जीवों में ऊर्जा प्राप्त करने के विभिन्न पथ क्या हैं?

उत्तर- श्वसन एक जटिल पर अति आवश्यक प्रक्रिया है। इसमें ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साइड का आदान-प्रदान होता है तथा ऊर्जा मुक्त करने के लिए खाद्य का ऑक्सीकरण सा है।

C6H12O6 + 6O2          I           6CO2 + 6H2O + ऊर्जा

श्वसन एक जैव रासायनिक प्रक्रिया है। श्वसन क्रिया दो प्रकार की होती है-

(क) वायवीय श्वसन (ऑक्सी श्वसन)-इस प्रकार के श्वसन में अधिकांश प्राणी ऑक्सीजन का उपयोग करके श्वसन करते हैं। इस प्रक्रिया में ग्लूकोज़ पूरी तरह से कार्बन डाइऑक्साइड और जल में विखंडित हो जाता है। यह माइटोकॉड्रिया में होती हैं।

                                          ग्लाइकोलिसिस                                                       क्रेब चक्र

ग्लूकोज़I         I                              पायरूवेट       I                               CO2+ H2O + ऊर्जा

(6-कार्बन अणु)             O2 आवश्यक नहीं                                                ऑक्सीजन उपस्थित

                                          (कोशिका द्रव्य में)

चूंकि यह प्रक्रिया वायु की उपस्थिति में होती है इसलिए इसे वायवीय श्वसन कहते हैं।

(ख) अवायवीय श्वसन (अनाक्सी श्वसन)-यह श्वसन प्रक्रिया ऑक्सीज़न की अनुपस्थिति में होती है। जीवाणु और यीस्ट इस क्रिया से श्वसन करते हैं। इस प्रक्रिया में इथाइल एल्कोहल, CO2 तथा ऊर्जा उत्पन्न होती है।

                                          ग्लाइकोलिसिस                                                       किण्वन

ग्लूकोज़I         I                              पायरूवेट       I                               इथानॉल  CO2 +  ऊर्जा

(6-कार्बन अणु)             O2 आवश्यक नहीं                                                O2ऑक्सीजन उपस्थित

                                          (यीस्ट में)

(ग) ऑक्सीजन की कमी हो जाने पर-कभी-कभी हमारी पेशी कोशिकाओं में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है। पायरूवेट के विखंडन के लिए दूसरा रास्ता अपनाया जाता है। तब पायरूवेट एक अन्य तीन कार्बन वाले अणु लैक्टिक अम्ल में बदल जाता है। इस के कारण क्रैम्प हो जाता है।

                                          साइटोप्लाज्म में                                                   

ग्लूकोज़I         I                              पायरूवेट       I                               इथानॉल  CO2 +  ऊर्जा

(6-कार्बन अणु)             O2 की कम मात्रा                                                                                                (३-कार्बन अणु)

                                          (मांसपेशियों में)

प्रश्न 3. मनुष्यों में ऑक्सीजन तथा कार्बनडाइऑक्साइड का परिवहन कैसे होता है? (H.P. 2012, Set-C)

उत्तर-जब हम श्वास अंदर लेते हैं तब हमारी पसलियां ऊपर उठती हैं और डायाफ्राम चपटा हो जाता है। इस कारण वक्षगुहिका बढ़ी हो जाती है और वायु फुफ्फुस के भीतर चली जाती है। वह विस्तृत कूपिकाओं को भर लेती है। रुधिर सारे शरीर से CO2 को कूपिकाओं में छोड़ने के लिए लाता है। कूपिका रुधिर वाहिका का रुधिर कूपिका वायु से ऑक्सीजन लेकर शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुंचाता है। श्वास चक्र के समय जब वायु अंदर और बाहर होती है तब फुफ्फुस वायु का अवशिष्ट आयतन रखते हैं। इससे ऑक्सीजन के अवशोषण और कार्बन डाइऑक्साइड के मोचन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।

213 प्रश्न 4. गैसों के विनिमय के लिए मानव-फुफ्फुस में अधिकतम क्षेत्रफल को कैसे अधिकाल्पित किया है?

उत्तर-जब हम श्वास अंदर लेते हैं तब हमारी पसलियां ऊपर उठती हैं। वे बाहर की ओर झुक जाती हैं। इसी समय डायाफ्राम की पेशियां संकुचित तथा उदर पेशियां शिथिल हो जाती हैं। इससे वक्षीय गुहा का क्षेत्रफल बढ़ता है और साथ ही फुफ्फुस का क्षेत्रफल भी बढ़ जाता है जिसके परिणामस्वरूप श्वसन पथ से वायु अंदर आकर फेफड़े में भर जाती है

प्रश्न

प्रश्न 1. मानव में वहन तंत्र के घटक कौन-से हैं ? इन घटकों के क्या कार्य हैं?                  (H.P. 2013, Set A)

उत्तर-मानव में वहन तंत्र के प्रमुख दो घटक हैं-रुधिर और लसीका।

(क) रुधिर के कार्य

(1) फेफड़ों से ऊतकों तक ऑक्सीजन का परिवहन करना।

(2) विभिन्न ऊतकों में कार्बन-डाइऑक्साइड को एकत्रित करके उसका फेफड़ों तक परिवहन करना।

(3) उपाचय में बने विषैले एवं हानिकारक पदार्थों को एकत्रित करके अहानिकारक बनाने के लिए यकृत में भेजना।

(4) विभिन्न प्रकार के उत्सर्जी पदार्थों का उत्सर्जन हेतु वृक्कों तक पहुंचाना।

(5) विभिन्न प्रकार के हॉर्मोनों का परिवहन करना।

(6) छोटी आंतों से परिजय भोज्य पदार्थों का अवशोषण भी रक्त प्लाज़्मा द्वारा होता है जिसे यकृत और विभिन्न ऊतकों में भेज दिया जाता है।

(7) शरीर के तापक्रम को उष्मा वितरण द्वारा नियंत्रित रखना।

(8) रुधिर के श्वेत रक्त कणिकाएं हानिकारक बैक्टीरियाओ, मतकोशिकाओं तथा रोगाणओं का भक्षण करके उन्हें नष्ट कर देता है।

(9) विभिन्न प्रकार के एंजाइमों का परिवहन करता है।

(10) पहिकाएं तथा फाइब्रिनोजिन नामक प्रोटीन रक्त में उपस्थित होती है जो रक्त का थक्का जमने में सहायक होते हैं।

(ख) लसीका के कार्य

(1) लसीका ऊतकों तक भोज्य पदार्थों का संवहन करती है।

(2) ऊतकों से उत्सर्जी पदार्थों को एकत्रित करती है।

(3) हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट करके शरीर की रक्षा करती है।

(4) शरीर के घाव भरने में सहायक होती है।

(5) पचे वसा का अवशोषण करके शरीर के विभिन्न भागों तक ले जाती है।

प्रश्न 2. स्तनधारी तथा पक्षियों में ऑक्सीजनित तथा विऑक्सीजनित रुधिर को अलग करना क्यों आवश्यक हैं?                                                                                                                                      (H.P. 2012, Set-C)

उत्तर-स्तनधारी तथा पक्षियों में उच्च तापमान को बनाए रखने के लिए अपेक्षाकृत अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर को हृदय के दायें और बायें भाग से आपस में मिलने से रोकना परम आवश्यक है। इस प्रकार का बंटवारा शरीर को उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन की पूर्ति करता है।

प्रश्न 3. उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के घटक क्या हैं?

उत्तर-उच्च संगठित पादप में वहन तंत्र के दो घटक हैं-

जाइलम और फ्लोयम। पादपों में जिस जल की रंध्र के द्वारा हानि होती है उसका प्रतिस्थापन पत्तियों में ज़ाइलम वाहिकाओं द्वारा हो जाता है। कोशिका से जल के अणुओं का वाष्पण एक चूषण उत्पन्न करता है, जो जल को जड़ों में उपस्थित जाइलम कोशिकाओं द्वारा खींचता है। वाष्पोत्सर्जन, जल के अवशोषण और जड़ से पत्तों तक जल और उसमें घुले हुए लवणों के उपरिमुखी गति में सहायक है। यह ताप के नियमन में भी सहायक है। जल के वहन में मूल दाब रात्रि के समय विशेष रूप से प्रभावी है। दिन के समय जब रंध्र खुले होते हैं और वाष्पों का उत्सर्जन होता है तब जाइलम ही उसका संतुलन रखता है।

प्रश्न 4. पादप में जल और खनिज लवण का वहन कैसे होता है?                                          (H.P. 2012, Set-C)

उत्तर-पादप शरीर के निर्माण के लिए आवश्यक जल और खनिज लवणों को अपने निकट विद्यमान मिट्टी से प्राप्त करते हैं।

  1. जल-हर प्राणी के लिए जल जीवन का आधार है। पौधों में जल जाइलम ऊतकों के द्वारा अन्य भागों में जाता है। जड़ों में धागे जैसी बारीक रचनाओं की बहुत बड़ी संख्या होती है। इन्हें मूलरोम कहते हैं। ये मिट्टी मे उपस्थित पानी से सीधे संबंधित होते हैं। मूलरोम में जीव द्रव्य की सांद्रता मिट्टी में जल के घोल की अपेक्षा अधिक होती है। परासरण के कारण पानी मूलरोमों में चला जाता है पर इससे मूलरोम के जीव द्रव्य की सांद्रता में कमी आ जाती है और वह अगली कोशिका में चला जाता है। यह क्रम निरंतर चलता रहता है जिस कारण पानी जाइलम वाहिकाओं में पहुंच जाता है। कुछ पौधों में पानी 10 से 100 सेमी० प्रति मिनट की गति से ऊपर चढ़ जाता है।
  2. खनिज-पेड़-पौधों को खनिजों की प्राप्ति अजैविक रूप में करनी होती है। नाइट्रेट, फॉस्फेट आदि पानी में घुल जाते हैं  और जड़ों के माध्यम से पौधों में प्रविष्ट हो जाते हैं। वे पानी के माध्यम से सीधा जड़ों से। संपर्क में रहते हैं। पानी और खनिज मिल कर ज़ाइलम ऊतक में पहुंच जाते हैं और वहां से शेष भागों में चले जाते हैं।जल तथा अन्य खनिज-लवण जाइलम के दो प्रकार के अवयवों वाहिनिकाओं एवं वाहिकाओं से जड़ों से पत्तियों तक पहुंचाए जाते हैं। ये दोनों मृत तथा स्थूल कोशिका भित्ति से युक्त होती हैं। वाहिनिकाएं लंबी, पतली, तुर्क सम कोशिकाएं हैं, जिनमें गर्त होते हैं। जल इन्हीं में से होकर एक वाहिनिका से दसरी वाहिनिका में जाता है। वांछित खनिज, नाइट्रेट तथा फॉस्फेट अकार्बनिक लवणों के रूप में मूलरोम द्वारा घुलित अवस्था में अवशोषित कर जड़ में पहुंचाए जाते हैं। यही जड़ें जाइलम ऊतकों से उन्हें पत्तियों तक पहुंचाते हैं।प्रश्न 5. पादप में भोजन का स्थानांतरण कैसे होता है? उत्तर-पादपों की पत्ति यां प्रकाश संश्लेषण क्रिया से अपना भोजन तैयार करती हैं और वह व हां से पादप के अन्य भागों में भेजा जाता है। प्रकाश संश्लेषण के विलेय उत्पादों का वहन स्थानांतरण कहलाता है। यह कार्य संवहन ऊतक के फ्लोएम नामक भाग के द्वारा किया जाता है। फ्लोएम इस कार्य के अतिरिक्त अमीनो अम्ल तथा अन्य पदार्थों का परिवहन भी करता है। ये पदार्थ विशेष रूप से जड़ के भंडारण अंगों, फलों, बीजों और वृद्धि वाले अंगों में ले जाए जाते हैं। भोजन तथा अन्य पदार्थों का स्थानांतरण संलग्न साथी कोशिका की सहायता से चालनी नलिका में उपरिमुखी तथा अधोमुखी दोनों दिशाओं में होता है।फ्लोएम से स्थानांतरण का कार्य जाइलम के विपरीत होता है। यह ऊर्जा के उपयोग से पूरा होता है। सुक्रोज़ जैसे पदार्थ फ्लोएम ऊतक में ए टी पी से प्राप्त ऊर्जा से ही स्थानांतरित होते हैं। यह दाब पदार्थों को फ्लोएम से उस ऊतक तक ले जाता है जहां दाब कम होता है। यह पादप की आवश्यकतानुसार पदार्थों का स्थानांतरण कराता है। वसंत ऋतु में यही जड़ और तने के ऊतकों में भंडारित शर्करा का स्थानांतरण कलिकाओं में कराता है जिसे वृद्धि के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

    प्रश्न (पृष्ठ 124)-

    प्रश्न 1. वृक्काण (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रिया विधि का वर्णन कीजिए।

    उत्तर-वृक्क (गुर्दे) में आधारी निस्पंदन एकक बहुत बारीक भित्ति वाली रुधिर कोशिकाओं का गुच्छ होता है। वृक्क में प्रत्येक कोशिका गच्छ एक नलिका के कप के आकार के सिरे के अंदर होता है। यह नलिका छने हुए मूत्र को इकट्ठा करती है। हर वृक्क में ऐसे अनेक निस्पंदक एकक होते हैं जिन्हें वृक्काणु (नेफ्रॉन) कहते हैं। ये आपस में निकटता से पैक रहते हैं। आरंभ में ग्लुकोस, अमीनो अम्ल, लवण, जल आदि कुछ पदार्थ निस्पंद में रह जाते हैं पर जैसे-जैसे मूल इस में प्रवाहित होता है इन पदार्थों का चयनित छनन हो जाता है वृक्काणु के डायलिसियस का थैला भी कहते है क्योंकि इसकी प्याले नुमा संरचना बाऊमैन संपुर में स्थिर कोशिका गुच्छ की दीवारों से छनता है। रक्त में उपस्थित प्रोटीन के अणु बड़े होने के कारण छन नहीं पाते हैं। ग्लूकोज़ और लवण के अणु छोटे होने के कारण छन जाते हैं।

    प्रश्न 2. उत्सर्जी उत्पाद से छुटकारा पाने के लिए पादप किन विधियों का उपयोग करते हैं?

    उत्तर-पादपों में उत्सर्जी उत्पाद हैं-कार्बन डाइऑक्साइड, ऑक्सीजन, जलवाष्पों की अधिकता, तरह-तरह के लवण, रेज़िन, टेनिन, लैटक्स आदि।

    पादपों मे उत्सर्जन के लिए कोई विशेष अंग नहीं होते। उनमें अपशिष्ट पदार्थ रवों के रूप में इकट्ठे हो जाते हैं जो कि पादपों को कोई हानि नहीं पहुंचाते। पौधों के शरीर से छाल अलग होने पर तथा पत्तियों के गिरने से ये पदार्थ निकल जाते हैं। कार्बन डाइऑक्साइड श्वसन क्रिया का उत्सर्जी उत्पाद है जिसका प्रयोग प्रकाश संश्लेषण क्रिया में कर लिया जाता है। अतिरिक्त जलवाष्प वाष्पोत्सर्जन से बाहर निकाल दिया जाता है। ऑक्सीजन रंध्रों से वातावरण में छोड़ दी जाती है। अतिरिक्त लवण जल वाष्पों के माध्यम से उत्जर्जित कर दिए जाते हैं। कुछ उत्सर्जी पदार्थ फलों, फूलों और बीजों के द्वारा उत्सर्जित कर दिए जाते हैं। जलीय पादप उत्सर्जी पदार्थों को सीधा जल में ही उत्सर्जित कर देते हैं।

    प्रश्न 3. मूत्र बनने की मात्रा का नियमन किस प्रकार है?

    उत्तर-मूत्र बनने की मात्रा इस प्रकार नियंत्रित की जाती है कि जल की मात्रा का शरीर में संतुलन बना रहे। जल की बाहर निकलने वाली मात्रा इस आधार पर निर्भर करती है कि उसे कितना विलेय वर्ण्य पदार्थ उत्सर्जित करना है। अतिरिक्त जल का वृक्क में पुनरावशोषण कर लिया जाता है और उसका पुन: उपयोग हो जाता है।

    अभ्यास के प्रश्नों के उत्तर

    प्रश्न 1. मनुष्य में वृक्क एक तंत्र का भाग है जो संबंधित है–                                             (H.P. 2009, Set A)

    (a) पोषण                                                                  (b) श्वसन

    (c) उत्सर्जन                                                             (d) परिवहन।

    उत्तर-(c) उत्सर्जन।

    प्रश्न 2. पादप में जाइलम उत्तरदायी है–                                                                                    (H.P. 2009, Set B)

    (a) जल का वहन                                                  (b) भोजन का वहन

    (c) अमीनो अम्ल का वहन                               (d) ऑक्सीजन का वहन।

    उत्तर-(a) जल का वहन।

    प्रश्न 3. स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक है

    (a) कार्बन डाइऑक्साइड तथा जल                (b) क्लोरोफिल

    (c) सूर्य का प्रकाश                                                (d) उपरोक्त सभी।

    उत्तर-(d) उपरोक्त सभी।

    प्रश्न 4. पायरुवेट के विखंडन से यह कार्बनडाइऑक्साइड, जल तथा ऊर्जा देता है और यह क्रिया होती है-

    (H.P. 2009, Set C)

    (a) कोशिका द्रव्य                                                  (b) माइटोकांड्रियामा

    (c) हरित लवक                                                      (d) केंद्रक।

    उत्तर-(b) माइटोकांड्रिया।

    प्रश्न 5. हमारे शरीर में वसा का पाचन कैसे होता है? यह प्रक्रम कहां होता है?

    उत्तर-उदर से प्राप्त अम्लीय और अधपची वसा का पाचन क्षुद्रांत्र में होता है। यह भाग यकृत से पित्त रस प्राप्त करता है। इसे अग्नाशयी रस से लाइपेज़ प्राप्त हो जाता है। अग्नाशयिक एंजाइमों की क्रिया के लिए पित्त रस इसे क्षारीय बनाता है। क्षुद्रांत्र में वसा बड़ी गोलिकाओं के रूप में होता है जिस कारण उस पर एंजाइम का कार्य कठिन हो जाता है। पित्त लवण उन्हें छोटी-छोटी गोलिकाओं में खंडित कर देता है जिससे एंजाइम की क्रियाशीलता बढ़ जाती है। अग्नाशय से प्राप्त होने वाले अग्नाशयिक रस में इमल्सीकृत वसा का पाचन करने के लिए लाइपेज़ एंजाइम होता है। क्षुद्रांत्र की भित्ति में ग्रंथि होती है जो आंत रस स्रावित करती है जो वसा को वसा अम्ल तथा ग्लिसरॉल में बदल देती है।

    प्रश्न 6. भोजन के पाचन में लार की क्या भूमिका है?                    (H.P. 2010 Set B, 2014 Set C, 2016 Set B)

    उत्तर- भोजन के पाचन में लार की अति महत्त्वपूर्ण भूमिका है। लार एक रस है जो तीन जोड़ी लाल ग्रंथियों से मुंह में उत्पन्न होता है। लार में एमिलेस नामक एक एंजाइम होता है जो मंड जटिल अणु को लार के साथ पूरी तरह मिला देता है। लार के प्रमुख कार्य हैं-

    (i) यह मुख के खोल को साफ़ रखती है।

    (ii) यह मुख खोल में चिकनाई पैदा करती है जिससे चबाते समय रगड़ कम होती है।

    (iii) यह भोजन को चिकना एवं मुलायम बनाती है।

    (iv) यह भोजन को पचाने में भी मदद करती है।

    (v) यह भोजन के स्वाद को बढ़ाती है।

    (vi) इसमें विद्यमान टायलिन नामक एंजाइम स्टार्च का पाचन कर उसे माल्टोज़ में बदल देता है।

    प्रश्न 7. स्वपोषी पोषण के लिए आवश्यक परिस्थितियां कौन-सी हैं और उनके उपोत्पाद क्या हैं?

    उत्तर-स्वपोषी पोषण के लिए प्रकाश-संश्लेषण आवश्यक है। हरे पौधे सूर्य के प्रकाश की उपस्थिति में क्लोरोफिल नामक वर्णक से CO2 और जल के द्वारा कार्बोहाइड्रेट का निर्माण करते हैं। इस क्रिया में ऑक्सीजन गैस बाहर निकलती है।

    सूर्य प्रकाश

    6CO2 + 12H2O             I                     C6H12O6 + 6H2O + 6O2

    क्लोरोफिल

    स्वपोषी पोषण की आवश्यक परिस्थितियां हैं-सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल, कार्बन डाइऑक्साइड और जल। इसके उपोत्पाद आणविक ऑक्सीजन है।

    प्रश्न 8. वायवीय तथा अवायवीय श्वसन में क्या अंतर है? कुछ जीवों के नाम लिखिए जिनमें अवायवीय श्वसन होता है।                                                                                                            (H.P. 2013 Set B, Set C, 2015)

    उत्तर-वायवीय (Aerobic Respiration) और अवायवीय (Anaerobic Respiration) में अंतर-

    वायवीय अवायवीय
    (1) वायवीय क्रिया ऑक्सीजन की उपस्थिति में होती है।

    (2) यह क्रिया कोशिका के जीव द्रव्य एवं माइटोकांड्रिया दोनों में पूर्ण होती है।

    (3) इस क्रिया में ग्लूकोज़ का पूर्ण ऑक्सीकरण होता है।

    (4) इस क्रिया से CO, एवं H,0 बनता है।

    (5) इस क्रिया में ग्लूकोज़ के एक अणु में 38 ATP अणु मुक्त होते हैं।

    (6) ग्लूकोज़ के एक अणु के पूर्ण ऑक्सीकरण से 673 किलो कैलोरी ऊर्जा मुक्त होती है।

    (7) इस क्रिया को निम्नलिखित समीकरण द्वारा दिखा सकते हैं-

    C6H12O6 + 6O2 I 6CO2 + 6H2O + 673 Kcal

     

    (1) अवायवीय क्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होती है।

    (2) यह क्रिया केवल जीव द्रव्य में ही पूर्ण होती है।

    (3) इस क्रिया में ग्लूकोज़ का अपूर्ण ऑक्सीकरण होता है।

    (4) इस क्रिया में एल्कोहल एवं CO, बनती है।

    (5) इस क्रिया में ग्लूकोज़ के एक अणु में 2 ATP अणु मुक्त होते हैं।

    (6) ग्लूकोज़ के अणु के अपूर्ण ऑक्सीकरण से 21 किलो कैलोरी ऊर्जा मुक्त होती है।

    (7) इस क्रिया को निम्नलिखित समीकरण द्वारा दिखा सकते हैं-

    C6H12O6I 2C2H5OH + 2 CO2 + 21 kcal

     

    कुछ जीवों में अवायवीय श्वसन होता है, जैसे यीस्ट।

    प्रश्न 9. गैसों के अधिकतम विनिमय के लिए कूपिकाएँ किस प्रकार अभिकल्पित हैं?

    उत्तर-श्वसन तंत्र में फुफ्फुस के अंदर अनेक छोटी-छोटी नलियों का विभाजित रूप होता है जो अंत में गुब्बारों जैसी रचना में अंतकृत हो जाता है, जिसे कूपिका कहते हैं। यह एक सतह उपलब्ध करती हैं जिस से गैसों का विनिमय हो सके। यदि कूपिकाओं की सतह को फैला दिया जाए तो यह लगभग 80 वर्ग मीटर क्षेत्र को ढांप सकता है। कूपिकाओं की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का बहुत विस्तृत जाल होता है। जब हम सांस अंदर लेते हैं तो पसलियां ऊपर उठ जाती हैं और हमारा डायाफ्राम चपटा हो जाता है जिससे वक्षगुहिका बड़ी हो जाती है। इस कारण वायु फुफ्फुस के भीतर चूस ली जाती है। रक्त शरीर से लाई गई CO2 कूपिकाओं को दे देता है। कूपिका रक्त वाहिका का रक्त कूपिका वायु से ऑक्सीजन लेकर शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुंचा देती हैं।

    प्रश्न 10. हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी के क्या परिणाम हो सकते हैं?

    उत्तर-हमारे शरीर में हीमोग्लोबिन की कमी से रक्ताल्पता (anaemia) हो जाता है। हमें श्वसन के लिए आवश्यक ऑक्सीजन की प्राप्ति नहीं होगी जिस कारण हम शीघ्र थक जाएंगे। हमारा भार कम हो जाएगा। हमारा रंग पीला पड़ जाएगा। हम कमज़ोरी अनुभव करेंगे।

    प्रश्न 11. मनुष्य में दोहरा परिसंचरण की व्याख्या कीजिए। यह क्यों आवश्यक है?

    उत्तर-हृदय दो भागों में बंटा होता है। इस का दायां और बायां भाग ऑक्सीजनित और विऑक्सीजनित रुधिर को आपस में मिलने से रोकने में उपयोगी सिद्ध होता है। इस तरह का बंटवारा शरीर को उच्च दक्षतापूर्ण ऑक्सीजन की पूर्ति कराता है। जब एक ही चक्र में रुधिर दोबारा हृदय में जाता है तो उसे दोहरा परिसंचरण कहते हैं। इसे इस प्रकार स्पष्ट किया जा सकता है :-

    ऑक्सीजन को प्राप्त कर रुधिर फुफ्फुस में आता है। इस रुधिर को प्राप्त करते समय बायां अलिंद हृदय में बांयी ओर स्थित कोष्ठ बायां अलिंद शिथिल रहता है। जब बायां निलय फैलता है, तब यह संकुचित होता है, जिससे रुधिर इसमें चला जाता है। अपनी बारी पर जब पेशीय बाँया निलय संकुचित होता है, तब रुधिर शरीर में पंपित हो जाता है।

    जब दायां अलिंद फैलता है तो शरीर से विऑक्सीजनित रुधिर इसमें आ जाता है। जैसे ही दायां अलिंद संकुचित होता है, नीचे वाला दायां निलय फैल जाता है। यह रुधिर को दाएं निलय में भेज देता है जो रुधिर को ऑक्सीजनीकरण के लिए फुफ्फुस में पंप कर देता है। अलिंद की अपेक्षा निलय की पेशीय भित्ति मोटी होती है क्योंकि निलय को पूरे शरीर में रुधिर भेजना होता है। जब अलिंद या निलय संकुचित होते हैं तो वाल्व उल्टी दिशा में रुधिर प्रवाह को रोकना सुनिश्चित करते हैं।

    दोहरे परिसंचरण का संबंध रक्त परिवहन से है। परिवहन के समय रक्त दो बार हृदय से गुज़रता है। अशुद्ध रक्त दायें निलय से फेफड़ों में जाता है और शुद्ध हो कर बायें आलिंद के पास आता है।

    अशुद्ध रक्त                                                        शुद्ध रक्त

    दायां निलयIII    I                                 फेफड़े       I                     बायां आलिंद

    इस पल्मोनरी परिसंचरण कहते हैं।

    शुद्ध होने के बाद रक्त दायें आलिंद से पूरे शरीर में चला जाता है और फिर अशुद्ध होकर बायें निलय में प्रवेश कर जाता है। इसे सिस्टेमिक परिसंचरण कहते हैं।

    शुद्ध रक्त                                                            अशुद्ध रक्त                                           

    दायां आलिंदIII   I                               शरीर          I                     बायां निलय

    द्विगुण परिसंचरण को निम्नलिखित चित्रों से स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है।

    दोहरे परिसंचरण के कारण शरीर को पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन प्राप्त हो जाती है। उच्च ऊर्जा की प्राप्ति होती है जिससे शरीर का उचित तापमान बना रहता है।

    प्रश्न 12. जाइलम तथा फ्लोएम में पदार्थों के वहन में क्या अंतर है?                                   (H.P. 2010, 2015)

    उत्तर-ज़ाइलम निर्जीव ऊतक हैं। ये जड़ों से जल और घुले हुए लवणों को पत्तियों में पहुंचाते हैं। फ्लोएम सजीव ऊतक हैं। ये पत्तियों में तैयार शर्करा को पौधे के सभी भागों तक पहुंचाते हैं। जाइलम ऊपर की तरह गति करने में सहायक होते हैं और फ्लोएम नीचे की तरफ गति कराते हैं।

    प्रश्न 13. फुफ्फुस में कूपिकाओं की तथा वृक्क में वृक्काणु (नेफ्रॉन) की रचना तथा क्रिया विधि की तुलना

    कीजिए।

    उत्तर

    फुस्फुस में कूपिकाएं

    1. मानव शरीर में विद्यमान दोनों फेफड़ों में बहुत अधिक संख्या में कूपिकाएं होती हैं।
    2. प्रत्येक कृपिका प्याले के आकार जैसी होती है।
    3. कूपिका दोहरी दीवार से निर्मित होती है।
    4. कूपिका की दोनों दीवारों के बीच रुधिर कोशिकाओं का सघन जाल बिछा रहता है।
    5. कूपिकाएं वायु भरने पर फैल जाती हैं।
    6. यहां रुधिर की लाल रुधिर कणिकाओं में हीमोग्लोबिन ऑक्सीजन प्राप्त कर लेती है तथा प्लाज्मा में उपस्थित कार्बन डाइऑक्साइड कूपिका में चली जाती है।
    7. कूपिकाओं में गैसीय आदान-प्रदान के बाद फेफडे के संकुचन से कूपिकाओं में भरी वायु शरीर के बाहर निकल जाती है।

     

    वृक्क में वृक्काणु

    1. मानव शरीर में वृक्क संख्या में दो होते हैं। प्रत्येक वृक्क में लगभग 10 लाख वृक्काणु होते हैं।
    2. प्रत्येक वृक्काणु महीन धागे की आकृति जैसा होता है।
    3. वृक्काणु के एक सिरे पर प्याले के आकार की मैल्पीघियन सम्पुट विद्यमान होती है।
    4. बोमैन सम्पुट में रुधिर कोशिकाओं का गुच्छ उपस्थित होता है जिसे कोशिका गुच्छ कहते हैं।
    5. वृक्काणु में ऐसी क्रिया नहीं होती।
    6. कोशिका गुच्छ में रुधिर में उपस्थित वज् पदार्थ छन जाते हैं।
    7. मूत्र निवाहिका से मूत्र बहकर मूत्राशय में इकट्ठा हो जाता है और वहां से मूत्रमार्ग द्वारा शरीर के बाहर निकाल दिया जाता है।

    अन्य महत्त्वपूर्ण प्रश्न

    (OTHER IMPORTANT QUESTIONS)

    दीर्घ उत्तरात्मक प्रश्न

    (Long Answer Type Questions)

    प्रश्न 1. विषमपोषी जीवों को पोषण के आधार पर किन-किन भागों में बांटा गया है?

    उत्तर-विषमपोषी जीवों को पोषण के आधार पर निम्नलिखित भागों में बांटा गया है-

    1. मृतोपजीवी-वे जीव जो अपना भोजन मृत एवं सड़े-गले कार्बनिक पदार्थों से प्राप्त करते हैं, मृतोपजीवी कहलाते हैं। उदाहरण- फफूंद (कवक), खमीर, मशरूम एवं जीवाण आदि।
    2. परजीवी-वे जीव जो अपना भोजन अन्य जीवों के शरीर के बाहर अथवा भीतर रहकर प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त करते हैं परजीवी कहलाते हैं। उदाहरण-खटमल, एस्केरिस, मच्छर, अमरबेल आदि।
    3. प्राणीसमभोजी-वे जीव जिनमें पाचन तंत्र पाया जाता है तथा जो भोज्य पदार्थ को अंतर्ग्रहित करके पाचन करते हैं तथा पचे भोजन का अवशोषण करके शेष अपचित भोजन को उत्सर्जित करते हैं। प्राणी समभोजी जीव कहलाते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं-

     (i) शाकाहारी-ये जंतु अपना भोजन केवल पौधों से प्राप्त करते हैं। जैसे-गाय, चूहा, हिरन और बकरी आदि। (ii) मांसाहारी-ये वे जंतु होते हैं जो अन्य जंतुओं के मांस को भोजन के रूप रूप में ग्रहण करते हैं। जैसे-शेर, चीता, भेड़िया, सर्प, बाज आदि।

    (ii) सर्वाहारी-ये जंतु केवल पौधों और जंतुओं के मांस दोनों को भोजन के रूप में लेते हैं। जैसे-कॉकरोच, मनुष्य, कौआ आदि।

    प्रश्न 2. प्रकाश संश्लेषण क्रिया को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं? स्पष्ट कीजिए।

    (H.P. 2010, Set-A, 2011, Set-B, 2012 Set C)

    उत्तर-1. प्रकाश (Light)-प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया सूर्य-प्रकाश में होती है, इसलिए प्रकाश का प्रकार तथा उसकी तीव्रता (intensity) इस क्रिया को प्रभावित करती है। प्रकाश की लाल एवं नीली किरणों तथा 100 फुट कैंडल से 3000 फुट कैंडल तक प्रकाश तीव्रता प्रकाश-संश्लेषण की दर को बढाती है जबकि इससे उच्च तीव्रता पर यह क्रिया रुक जाती है।

    1. CO2वातावरण में CO2 की मात्रा 0.03% होती है। यदि एक सीमा तक CO2 की मात्रा बढ़ाई जाए तो प्रकाश-संश्लेषण दर भी बढ़ती है लेकिन अधिक होने से घटने लगती है।
    2. तापमान (Temperature)-प्रकाश-संश्लेषण के लिए 25-35°C का तापक्रम सबसे उपयुक्त होता है। इससे अधिक या कम होने पर दर घटती-बढ़ती रहती है।
    3. जल (Water)-इस क्रिया के लिए जल एक महत्त्वपूर्ण यौगिक है। जल की कमी होने से प्रकाश-संश्लेषण

    की क्रिया प्रभावित होती है क्योंकि जीव द्रव्य की सक्रियता घट जाती है, स्टोमेटा बंद हो जाते हैं और प्रकाश-संश्लेषण दर घट जाती है।

 

  1. ऑक्सीजन (O2)-प्रत्यक्ष रूप से ऑक्सीजन की सांद्रता से प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया प्रभावित नहीं होती है लेकिन यह पाया गया है कि वायुमंडल में O2 की मात्रा बढ़ने से प्रकाश-संश्लेषण की दर घटती है।

प्रश्न 3. प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं? पत्ती की अनुप्रस्थ काट के आरेख की सहायता से उन कोशिकाओं को प्रदर्शित करें जिनमें क्लोरोफिल पाया जाता है। इसका महत्त्व लिखिए।                                     (H.P.2010)

उत्तरं-प्रकाश-संश्लेषण हरे पौधे सूर्य के प्रकाश द्वारा क्लोरोफिल नामक वर्णक की उपस्थिति में CO2 और जल के द्वारा कार्बोहाइड्रेट (भोज्य पदार्थ) का निर्माण करते हैं और ऑक्सीजन गैस बाहर निकालते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।

 

                                                सूर्य प्रकाश

6CO2 + 12H2O     I       C6H12O6 + 6O2 + 6O2

यह पत्तियों में पाये जाने वाला एक प्रकाशग्राही वर्णक है तथा प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया को पूरा करता है। यह हरे बिंदु कोशिकांगों में पाया जाता है जिन्हें हरित लवक या क्लोरोप्लास्ट कहते हैं। ये पत्ती की ऊपरी बाह्य त्वचा के नीचे स्थित कोशिकाओं में पाये जाते हैं।

महत्त्व-(1) इस प्रक्रिया के द्वारा भोजन का निर्माण होता है जिससे मनुष्य तथा अन्य जीव-जंतुओं का पोषण होता है।

(2) इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन का निर्माण होता है, जो कि जीवन के लिए अत्यावश्यक है। जीव श्वसन द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं जिससे भोजन का ऑक्सीकरण होकर शरीर के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है।

(3) इस क्रिया में CO2 ली जाती है तथा O2 निकाली जाती है जिससे पर्यावरण O2 एवं CO2 की मात्रा संतुलित रहती है।

(4) कार्बन डाइऑक्साइड के नियमन से प्रदूषण दूर होता है।

(5) प्रकाश-संश्लेषण के ही उत्पाद खनिज, तेल, पेट्रोलियम कोयला आदि हैं, जो करोड़ों वर्ष पूर्व पौधों द्वारा संग्रहित किये गये थे।

प्रश्न 4. पादप किस प्रकार खाद्य प्राप्त करते हैं? प्रकाश संश्लेषण में क्लोरोफिल की भूमिका का विवरण दीजिए।                                                                                                                                              (H.P. 2012, Set-C)

उत्तर-हरे पौधे अपना भोजन प्रकाश संश्लेषण विधि से प्राप्त करते हैं। सूर्य प्रकाश की उपस्थिति में CO2 और जल जैसे सरल यौगिकों का हरे पौधों द्वारा स्थिरीकरण कर जटिल कार्बनिक पदार्थ कार्बोहाइड्रेट के निर्माण की प्रक्रिया को ही प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।

प्रकाश संश्लेषण क्रिया हेतु पौधों को CO2 जल क्लोरोफिल और सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है। स्थलीय पौधे CO2 को बाह्य वातावरण से जबकि जलीय पौधे जल में घुली CO2 को ग्रहण करते हैं। पौधों को जड़ें पानी का अवशोषण करके उसे जाइलम द्वारा पत्तियों तक पहुंचाती हैं। क्लोरोफिल पत्तियों में पाया जाता है, जो प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित कर इसे कार्बनिक यौगिकों के बंधों के रासायनिक ऊर्जा के रूप में संचित कर देता है। प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया को निम्नलिखित रासायनिक समीकरण द्वारा प्रदर्शित किया जा सकता है

प्रकाश

CO2 + 12 H2O        I                 C6H12O6 + 6H2O + 6O2

                                                   क्लोरोफिल

प्रकाश संश्लेषण की दो प्रावस्थाएं होती हैं जो निम्नलिखित हैं-

(A) प्रकाशिक अभिक्रिया (Light Reaction)-इसके लिए प्रकाश आवश्यक है।

(B) अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark Reaction)-इसके लिए प्रकाश आवश्यक नहीं है।

(A) प्रकाशिक अभिक्रिया (Light Reaction)-यह कोशिका के क्लोरोप्लास्ट के ग्रेना में होती है तथा इसमें कई कार्य होते हैं, जैसे-

(i) सूर्य के प्रकाश से पर्णहरित के इलेक्ट्रॉन उत्तेजित होकर अपनी कक्षा छोड़ देते हैं। जब यह इलेक्ट्रॉन इस ऊर्जा को मुक्त करता है तो ADP + P संयुक्त होकर ATP बनाते हैं। इस प्रकार सूर्य की प्रकाश ऊर्जा रासायनिक ऊर्जा के रूप में पोषित (Trap) हो जाती है।

(ii) उत्तेजित इलेक्ट्रॉनों द्वारा जल के अणुओं का हाइड्रोजन (H+) एवं हाइड्रॉक्सिल (OH) आयनों में अपघटन

हो जाता है-

4H2O I 4H+ + 40H

(iii) 4H+ को NADP ग्रहण करके NADP.H2 में परिवर्तित हो जाता है।

4H+ + 2NADAP I 2NADP.H2

(iv) 40H संघनित होकर पानी एवं ऑक्सीजन बनाते हैं-

                           संघनन

4OH–             I             2H2O + H2O2 + O2 K 4e

ऑक्सीजन वायु में विमुक्त हो जाती है। इलेक्ट्रॉन वापस क्लोरोफिल में चले जाते हैं। स्पष्ट है कि O2 की विमुक्ति जल से हुई न कि CO2 से।

इस प्रकार प्रकाशिक क्रिया से-

(a) ATP बनते हैं।

(b) NADP.H, बनता है।

(c) O2 विमुक्त होती है।

(B) अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark Reaction)-इस चरण में वायुमंडल से अवशोषित CO2 का अपचय न होकर कार्बोहाइड्रेट बनता है। यह क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा में होती है-

6CO2 + 12 ATP + 12NADP.H I C6H12O6 + 12ADP + 12NADP + 6H2O

प्रकाश संश्लेषण की पूरी क्रिया को संक्षेप में अति सरल रूप में इस प्रकार दिखाया जा सकता है।

प्रश्न 5. उस कोशिकांग का नाम लिखें जिसमें प्रकाश संश्लेषण होता है। प्रकाश संश्लेषण में क्लोरोफिल की भूमिका का विवरण दीजिए।

उत्तर-प्रकाश संश्लेषण की क्रिया पत्ती की कोशिका के अंदर पाए जाने वाले क्लारोप्लास्ट में होती है। क्लोरोफिल (पर्णहरित) पत्तियों में पाया जाने वाला हरा वर्णक होता है। प्रकाश संश्लेषण में क्लोरोफिल की विशेष भूमिका है। इसके अणु प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित करते हैं। पौधे में लगभग आठ प्रकार के क्लोरोफिल पाये जाते हैं। इसमें से क्लोरोफिल a और क्लोरोफिल b सबसे अधिक महत्त्वपूर्ण होते हैं और जीवाणु को छोड़कर शेष सभी प्रकाश संश्लेषी पौधों में पाये जाते हैं। प्रकाश संश्लेषण के लिए क्लोरोफिल अति आवश्यक है। इसलिए जिन कोशिकाओं में क्लोरोफिल होता है, केवल वे ही प्रकाश संश्लेषण कर पाती हैं। क्लोरोफिल मुख्यतः पत्तियों में ही पाया जाता है। इसलिए पत्तियों को प्रकाश संश्लेषी अंग कहते हैं। पत्तियों के कोशिकांग क्लोरोप्लास्ट क्लोरोफिल पाया जाता है इसलिए क्लोरोप्लास्ट को प्रकाश

संश्लेषी अंगक कहते हैं। छोटे हरे तनों तथा फलों में भी प्रायः काफ़ी मात्रा में क्लोरोफिल पाया जाता है, परंतु ज्यों-ज्यों ये परिपक्व होते जाते हैं, क्लोरोफिल कम होता जाता है।

प्रश्न 6. अमीबा के पोषण की प्रक्रिया का विवरण दीजिए। 

उत्तर-अमीबा प्राणीसम भोजी विधि से पोषण करता है। यह एक सर्वाहारी जंतु है। इसका भोजन जल में में तैरते हुए जीवाणु, शैवाल, डायटम आदि के सूक्ष्म जीवों के रूप में होता है। इन सूक्ष्म जीवों के निगलने (Ingestion) में जो विधि अपनाई जाती है, उसे फैगोसाइटॉसिस (Phagocytosis) कहते हैं। यह अपने भोजन को शरीर के किसी भी सतह से कूटपाद द्वारा ग्रहण करता है। पोषण विधि के निम्नलिखित चरण हैं-

अंतर्ग्रहण, पाचन, अवशोषण वहिक्षेपण। जब यह किसी भोज्य पदार्थ के संपर्क में आता है तो उसे पकड़ने के लिए कूटपाद बनावन् उसकी ओर बढ़ता है तो यह कूटपादों (Pseudopodia) द्वारा चारों ओर से घेर लेता है जिससे एक प्यालेनुमा रचना बनती जिसे फूड कप (Food cup) कहते हैं। बाद में कूदपाद अपने सिरों पर परस्पर संगलित होकर खाद्य रिक्तिका (Food vacoule) का निर्माण करके इसे एंडोरलाज्म में डाल देते हैं।

अमीबा में अंतः कोशिकीय पाचन (Intracellular Digestion) होता है। भोजन का पाचन खाद्य रिक्तिका (Food Vacuole) में होता है। भोजन पचाने के लिए ट्रिप्सिन, पेटिसन, एमाइलेज एंजाइम पाये जाते हैं।

खाद्य रिक्तिका में पचा हुआ भोजन एंडोप्लाज्म में विसरित (Diffuse) हो जाता है। बाद में पचा हुआ भोजन शरीर (Cell) के अंदर जीव द्रव्य (प्रोटोप्लाज्म) में बदल जाता है। शरीर में यदि भोजन की अधिक मात्रा पाई जाती है तो यह ग्लाइकोजन, पैरामाइलोन तथा लिपिड्स आदि के रूप में संचित कर ली जाती है।

इसमें अपच पदार्थ को बाहर निकालने के लिए विशेष एनस नहीं पाया जाता है। अपच भोजन (भोजन अविशेष) शरीर के किसी भी स्थान से बाहर निकाल दिया जाता है। इस प्रक्रिया को वहिक्षेपण (Egestion) कहते हैं।

प्रश्न 7. निम्नलिखित में अंतर लिखिए–                                                                                          (H.P. 2015)

(क) शाकाहारी एवं मांसाहारी

(ख) स्वपोषी एवं परपोषी।

उत्तर-(क) शाकाहारी एवं मांसाहारी –

शाकाहारी (Herbivore) मांसाहारी (Carnivore)
वे जीव जो केवल पौधे या पौधे से प्राप्त उत्पादों को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं, शाकाहारी कहलाते हैं। उदाहरण-गाय, खरगोश, बकरी आदि। वे जीव जो अपना भोजन अन्य जीवों के मांस से ग्रहण करते हैं, मांसाहारी कहलाते हैं। उदाहरण-शेर, चीता, भेड़िया आदि।

(ख) स्वपोषी एवं विषमपोषी परपोषी

स्वपोषी परपोषी
वे जीव जो प्रकाश संश्लेषण की क्रिया द्वारा सरल अकार्बनिक से जटिल कार्बनिक पदार्थों का निर्माण करके अपना स्वयं पोषण करते हैं, स्वपोषी जीव (Autotrophs) कहलाते हैं।

उदाहरण-सभी हरे पौधे, युग्लीना।

वे जीव जो कार्बनिक पदार्थ और ऊर्जा को अपने भोज्य पदार्थ के रूप में अन्य जीवित या मृत पौधों या जंतुओं से ग्रहण करते हैं, परपोषी जीव (Heterotrophs) कहलाते हैं।

उदाहरण-युग्लीना को छोड़कर सभी जंतु। अमरबेल, जीवाणु, कवक आदि। ।

 

प्रश्न 8. मनुष्यों में पाचन की प्रक्रिया का विवरण दीजिए।

(H.P. 2012, Set-C, 2015 Set B, 2016 Set-A)

उत्तर-मनुष्य में पांचन क्रिया (Digestion in Human)-मनुष्य की पाचन क्रिया निम्नलिखित चरणों में विभिन्न अंगों में पूर्ण होती है-

  1. मुखगुहा में पाचन (Digestion in Mouth Cavity)-मनुष्य मुख के द्वारा भोजन ग्रहण करता है। मुख में स्थित दांत भोजन के कणों को चबाते हैं जिससे भोज्य पदार्थ छोटे-छोटे कणों में विभक्त हो जाता। लार-ग्रंथियों (Salivary Glands) से निकली लार भोजन में अच्छी तरह से मिल जाती है। लार में उपस्थित एंजाइम भोज्य पदार्थ में उपस्थित मंड (स्टार्च) को शर्करा (ग्लूकोज) में बदल देता है। लार भोजन को लसदार चिकना और लुग्दीदार बना देती है, जिससे भोजन ग्रसिका में से होकर आसानी से आमाशय में पहुंच जाता है।
  2. आमाशय में पाचन क्रिया (Digestion in Stomach)-जब भोजन आमाशय में पहुंचता है तो वहां भोजन का मंथन होता है जिससे भोजन और छोटे-छोटे कणों में टूट जाता है। भोजन में नमक का अम्ल मिलता है जो माध्यम को अम्लीय बनाता है तथा भोजन को सड़ने से रोकता है। आमाशयी पाचक रस में उपस्थित एंजाइम प्रोटीन को छोटे-छोटे अणुओं में तोड़ देते हैं।
  3. ग्रहणी में पाचन (Digestion in Duodenum)-आमाशय में पाचन के बाद जब भोजन ग्रहणी में पहुंचता है तो यकृत से आया पित्त रस भोजन से अभिक्रिया करके वसा का पायसीकरण कर देता है तथा माध्यम को क्षारीय बनाता है जिससे अग्नाशय से आये पाचक रस में उपस्थित एंजाइम क्रियाशील हो जाते हैं और भोजन में उपस्थित प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट एवं वसा का पाचन कर देते हैं।
  4. क्षुद्रांत्र में पाचन (Digestion in Ileum)-ग्रहणी में पाचन के बाद जब भोजन क्षद्रांत्र में पहुंचाता है तो वहां आंत्र रस में उपस्थित एंजाइम बचे हुए अपचित प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट तथा वसा का पाचन कर देते हैं। क्षुद्रांत्र की विलाई द्वारा पचे हुए भोजन का अवशोषण कर लिया जाता है तथा अवशोषित रक्त में पहुंचा दिया जाता है।
  5. बड़ी आंत्र (मलाशय) में पाचन (Digestion in Rectum)- क्षुद्रांत्र में भोजन के पाचन एवं अवशोषण के बाद जब भोजन बड़ी आंत्र में पहुंचाता है तो वहां पर अतिरिक्त जल का अवशोषण कर लिया जाता है, बड़ी क्षुद्रांत्र में भोजन का पाचन नहीं होता। भोजन का अपशिष्ट (अतिरिक्त) भाग यहां पर एकत्रित होता रहता है तथा समय-समय पर मल द्वारा शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।

प्रश्न 9. ‘श्वसन शरीर की एक अनिवार्य क्रिया है।इस कथन की पुष्टि कीजिए।

उत्तर-सभी जीवों को अपनी विभिन्न क्रियाओं हेतु ऊर्जा की आवश्यकता होती है जिसे ये अपनी कोशिकाओं में संचित भोजन से प्राप्त करते हैं। जीवों में इस ऊर्जा का ऑक्सीजन एवं विकरों द्वारा ऑक्सीकरण (Oxidation) होता है जिसके फलस्वरूप ऊर्जा मुक्त होती है। साथ ही इस क्रिया के अंतर्गत प्रदूषित वायु के रूप में CO2 गैस उत्पन्न होती है जो शरीर से बाहर निकाल दी जाती है। इस CO2 का उपयोग पौधे प्रकाश संश्लेषण में करते हैं-

श्वसन प्रत्येक जीव तथा कोशिका का एक अनिवार्य लक्षण है। इसे निम्नलिखित प्रकार से परिभाषित कर सकते हैं-

श्वसन जीवित कोशिकाओं या जीवों में होने वाली वह क्रिया है जिसमें जटिल कार्बनिक भोज्य पदार्थों का कृत्रिम अपघटन या विघटन होता है और इसके फलस्वरूप जल CO2 तथा ऊर्जा मुक्त होती है।

चूंकि श्वसन की क्रिया में जीवित कोशिका के अंदर भोज्य पदार्थों का ऑक्सीकरण होता है। इस कारण श्वसन को जैविक ऑक्सीकरण कहते हैं। जैविक ऑक्सीकरण में प्रयुक्त प्रत्येक ऑक्सीजन के अणु से लगभग 100 kcal ऊर्जा निकलती है जो ATP के 6 उच्च ऊर्जा बंधनों का संश्लेषण करती है। जैविक ऑक्सीकरण से बने ATP का उपयोग जीव अपने जैविक कार्यों में करते हैं।

 

प्रश्न 10. श्वास लेना एवं श्वसन के बीच अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर

श्वसन श्वास लेना
(1) यह क्रिया कोशिकाओं के भीतर होती है।

(2) इस क्रिया में ऊर्जा उत्पन्न होती है।

(3) यह जैव रासायनिक क्रिया है।

(4) इसमें श्वास अंगों की आवश्यकता नहीं होती है।

(5) इस क्रिया में ग्लूकोज़ का ऑक्सीकरण होता है।

(6) इसमें एंजाइमों की आवश्यकता होती है।

(7) इसमें कार्बन डाइऑक्साइड तथा ऊर्जा उत्पन्न होते है।

(1) यह क्रिया कोशिकाओं के बाहर होती है।

(2) इस क्रिया में ऊर्जा उत्पन्न नहीं होती है।

(3) यह एक भौतिक क्रिया है।

(4) इसमें श्वास अंगों की आवश्यकता होती है।

(5) इस क्रिया में ऑक्सीजन गैस का अंतर्ग्रहण होता है।

(6) इसमें एंजाइमों की आवश्यकता नहीं होती।

(7) इसमें कार्बन डाइऑक्साइड का वृद्धि क्षेपण होता है।

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प्रश्न 11. स्टोमेटा के खुलने और बंद होने की प्रक्रिया का सचित्र वर्णन कीजिए।

उत्तर-रुधिरों का खुलना एवं बंद होना रक्षक कोशिकाओं की सक्रियता पर निर्भर करता है। इसकी कोशिका भित्ति असमान मोटाई की होती है। जब यह कोशिका स्फीत दशा में होती है तो छिद्र खुलता है व इसके ढीली हो जाने पर यह बंद हो जाता है। ऐसा इसलिए होता है कि क्योंकि द्वार कोशिकाएं आस-पास की कोशिकाओं से पानी को अवशोषित कर स्फीत की जाती हैं। इस अवस्था में कोशिकाओं में पतली भित्तियां फैलती हैं, जिसके कारण छिद्र के पल मोटी भित्ति बाहर की ओर खिंचती है, फलतः रंध्र खुल जाता है। जब इसमें पानी की कमी हो जाती है तो तनाव मुक्त पतली भित्ति पुनः अपनी पुरानी अवस्था में आ जाती है, फलस्वरूप छिद्र बंद हो जाता है।

प्रकाश-संश्लेषण के दौरान पत्तियों में कार्बन डाइऑक्साइड का स्तर गिरता जाता है और शर्करा का स्तर रक्षक कोशिकाओं के कोशिका द्रव्य में बढ़ता जाता है। फलस्वरूप परासरण दाब और स्फीति दाब में परिवर्तन हो जाता है। इससे रक्षक कोशिकाओं में एक कसाव आता है जिससे बाहर की भित्ति बाहर की ओर खिंचती है। इससे अंदर की भित्ति भी खिंच जाती है। इस प्रकार स्टोमेटा चौड़ा हो जाता है अर्थात खुल जाता है।

अंधकार में शर्करा स्टार्च में बदल जाती है। जो अविलेय होती है। रक्षक कोशिकाओं को कोशिका द्रव्य में शर्करा का स्तर गिर जाता है। इससे रक्षक कोशिकाएं ढीली पड़ जाती हैं। इससे स्टोमेटा बंद हो जाता है।

प्रश्न 12. मनुष्य के हृदय की संरचना और क्रिया विधि समझाइए।        (H.P. 2010 Set-C, 2013 Set C)

उत्तर-

संरचना-मनुष्य का हृदय चार भागों में कोष्ठों में बंटा रहता है अग्र दो भाग आलिंद (Auricle) कहलाते हैं। इनसे एक बायां आलिंद तथा दूसरा दायां आलिंद होता है। पश्य दो भाग निलय (Vevtricle) कहलाता हैं। जिनमें एक बायां निलय तथा दूसरा दायां निलय होता है। बायें आलिंद एवं बायें निलय के बीच दिवलनी कपाट (Bicuspid Valvel तथा दाएं आलिंद एवं दाएं निलय के बीच त्रिवलीन कपाट (Tricuspid Valve) होते हैं। ये वाल्व निलय की ओर खुलते हैं। बाएं निलय का संबंध अर्धचंद्राकार (Semilunar Valve) द्वारा महाधमनी (Aorta) से तथा दाएं निलाया का संबंध अर्धचंद्राकार कपाट द्वारा फुफ्फुसीय धमनी से होता है। दाएं आलिंद से महाशिरा (Vena Cava) आकर मिलती है तथा बाएं आलिंद से फुफ्फुस शिरा आकर मिलती है।

हृदय की क्रियाविधि-हृदय के आलिंद और निलय में संकुचन (Systole) और शिथिलन (diastole) दोनों क्रियाएं होती हैं। ये क्रियाएं एक निश्चित क्रम में निरंतर होती हैं। हृदय की एक धड़कन या स्पंदन के साथ एक कार्डियक चक्र (Cardiac Cycle) पूर्ण होता है। एक चक्र में निम्नलिखित चार अवस्थाएं होती हैं-

  1. शिथिलन (Diastole)-इस अवस्था में दोनों आलिंद शिथिलन अवस्था में रहते हैं और रुधिर दोनों आलिंदों में एकत्रित होता है।
  2. आलिंद संकुचन-आलिंदों के संकुचित होने को आलिंद संकुचन कहते हैं। इस अवस्था में आलिंद निलय कपाट खुल जाते हैं और आलिंदों से रुधिर निलयों में जाता है। दायां आलिंद सदैव बायें आलिंद से कुछ पहले सकुंचित होता है।
  3. निलय संकुचन-निलयों के संकुचन को निलय संकुचन कहते हैं, जिसके फलस्वरूप आलिंद-निलय कपाट बंद हो जाते हैं एवं महाधमनियों के अर्धचंद्राकार कपाट खुल जाते हैं और रुधिर महाधमनियों में चला जाता है।
  4. निलय शिथिलन-संकुचन के पश्चात निलयों में शिथिलन होता है और अर्धचंद्राकार कपाट बंद हो जाते हैं। निलयों के भीतर रुधिर दाब कम हो जाता है जिससे आलिंद निलय कपाट खुल जाते हैं।

प्रश्न 13. मानव श्वसन तंत्र का सचित्र वर्णन कीजिए।      (H.P. 2016, Set-B)

उत्तर-मानव के श्वसन तंत्र का कार्य शुद्ध वायु को शरीर के भीतर भोजन तथा अशुद्ध वायु को बाहर निकलना है। इसके प्रमुख भाग निम्नलिखित हैं-

(i) नासाद्वार एवं नासागुहा-नासाद्वार से वायु शरीर के भीतर प्रवेश करती है। नाक में छोटे-छोटे और बारीक बाल होते हैं जिनसे वायु छन जाती है। उसकी धूल उनसे स्पर्श कर वहीं रुक जाती है इस मार्ग में श्लेष्मा की परत इस कार्य में सहायता करती है। वायु नम हो जाती है।

(ii) ग्रसनी-ग्रसनी ग्लॉटिस नामक छिद्र से श्वासनली में खुलती है। जब हम भोजन करते हैं तो ग्लॉटिस त्वचा के एक उपास्थियुक्त कपाट एपिग्लाटिस से ढंका रहता है।

(iii) श्वास नली-उपास्थि से बनी हुई श्वासनली गर्दन से नीचे आकर श्वसनी बनाती है। यह वलयों से बनी होती जो सुनिश्चित करते हैं कि वायु मार्ग में रुकावट उत्पन्न न हो।

(iv) फुफ्फुस-फुफ्फुस के अंदर मार्ग छोटी और छोटी नलिकाओं में विभाजित हो जाते हैं जो गुब्बारे जैसी रचना में बदल जाता है। इसे कूपिका कहते हैं। कूपिका एक सतह उपलब्ध कराती है जिससे गैसों का विनिमय हो सकता है। कूपिकाओं की भित्ति में रुधिर वाहिकाओं का विस्तीर्ण जाल होता है।

(iv) कार्य (H.P. 2012 Set-C)जब हम श्वास अंदर लेते हैं, हमारी पसलियां ऊपर उठती हैं और हमारा डायाफ्राम चपटा हो जाता है। इससे वक्षगुहिका बड़ी हो जाती है और वायु फुफ्फुस के भीतर चूस ली जाती है। वह विस्तृत कूपिकाओं को ढक लेती है। शेष शरीर से कार्बन डाइऑक्साइड कूपिकाओं में छोड़ने के लिए लाता है। कूपिका रुधिर वाहिका का रुधिर कूपिका वायु से ऑक्सीजन लेकर शरीर की सभी कोशिकाओं तक पहुंचाता है। श्वास चक्र के समय जब वायु अंदर और बाहर होती है, फुफ्फुस सदैव वायु का विशेष आयतन रखते हैं जिससे ऑक्सीजन के अवशोषण तथा कार्बन डाइऑक्साइड के मोचन के लिए पर्याप्त समय मिल जाता है।

प्रश्न 14. वृक्क की आंतरिक संरचना में नामांकित चित्र बनाइए। 

उत्तर-वृक्क उत्सर्जन तंत्र का प्रमुख अंग है जो उदर गुहा में कशेरूक दंड के दोनों तरफ एक-एक की संख्या में स्थित होता है।

लंबाकार में देखने पर वृक्क के अंदर दो भाग दिखाई देते हैं। बाहरी भाग कॉर्टेक्स तथा भीतरी भाग मेड्यूला कहलाता है। कॉर्टेक्स थोड़ी-थोड़ी दूरी पर मेड्यूला (Medulla) में फंसकर कगारें बना लेता है जिन्हें बार्टिनी के वृक्कीय स्तंभ (Renal Columns of Bertini) कहते हैं। कगारों के मध्य पिरामिड्स (Pyramids) कहते हैं। पिरामिड का चौड़ा भाग कॉर्टेक्स की ओर होता है। वृक्क की संग्रह नलिका (Collecting doct) इन्हीं पिरामिड से निकलती है।

कॉर्टेक्स में प्रत्येक वृक्क नलिका का बोमेंस संपुट (Bowman’s Capsule), कोशिका गुच्छ, समीपस्थ तथा दूरस्थ कुंडलित नलिका का भाग होता है। वृक्क नलिका की हेनले पाशी तथा संग्रह नलिकाएं मेडूला में स्थित होती हैं। समस्त संग्रह नलिकाएं वृक्क की भीतरी सतह पर मूत्रवाहिनी (Ureter) में खुलती हैं। मूत्रवाहिनी का अग्र भाग चौड़ा और कीप के आकार का होता है। इसे वृक्क गोणिका (Renal Pelvis) कहते हैं। वृक्क में बना हुआ मूत्र संग्रह नलिकाओं से वृक्क गोणिका में आता है और फिर मूत्रवाहिनी में पहुंचता है। मूत्रवाहिनी पीछे की ओर मूत्राशय में खुलती है।

प्रश्न 15. वृक्क द्वारा नाइट्रोजनी उत्सर्जी पदार्थों के उत्सर्जन की क्रिया विधि समझाइए।

उत्तर-वृक्क उत्सर्जन तंत्र का प्रमुख अंग है। वृक्क में वृक्कीय धमनी द्वारा रक्त पहुंचता है। वृक्कीय धमनीमा से रक्त असंख्य कुंडलित कोशिका-गुच्छों में पहुंचता है जो बाऊमैन-संपुट में स्थित होते हैं। यही यक्त का छानन होता है जिसमें ग्लूकोज, विलेय लवण, यूरिया तथा यूरिक अम्ल जल में घुला होता है।

यह छानित द्रव अत्यंत छोटी-छोटी नलिकाओं में गुज़रता है जहां ग्लूकोज़ एवं अन्य उपयोगी लवण पुनः अवशोषित करके वृक्कीय शिराओं द्वारा पुनः रक्त में वापस भेज दिये जाते हैं।

शेष द्रव (मूत्र) नलिका द्वारा मूत्राशय में एकत्रित हो जाता है तो समय-समय पर शरीर से बाहर निकाल दिया जाता है।

प्रश्न 16. मनुष्य के उत्सर्जी तंत्र का सचित्र वर्णन कीजिए।   

(H.P. 2013, Set-B, 2014 SetB)

उत्तर-वृक्क एवं इसके अनेक सहायक अंग मनुष्य के उत्सर्जी तंत्र (Excretory System) कहते हैं।

वृक्क उत्सर्जन तंत्र का प्रमुख अंग है जो केवल उत्सर्जी पदार्थों को उपयोगी पदार्थों से छानकर अलग कर देता है। वृक्क (Kidney) भूरे रंग का, सेम के बीज के आकार (Bean shaped) की संरचनाएं हैं, जो कि उदरगुहा (Abdomen) में कशेरूक दंड के दोनों तरफ होती है। प्रत्येक वृक्क लगभग 10 सेमी० लंबा, 6 सेमी० चौड़ा और 2.5 सेमी० मोटा होता है। यकृत की वजह से दायां वृक्क का बाहरी किनारा उभरा (Convex) हुआ होता है जबकि भीतरी किनारा धंसा (Concave) होता है जिसे हाइलम (Hilum) कहते हैं और इसमें से मूत्र नलिका (Ureter) निकलती है। मूल नलिका जाकर एक पेशीय थैले जैसी संरचना में खुलती है जिसे मूत्राशय (Urinary Bladder) कहते हैं।

लघु उत्तरात्मक प्रश्न

(Short Answer Type Questions)

 प्रश्न 1. जैव प्रक्रम से क्या तात्पर्य है?

उत्तर-सभी जीवों का अनुरक्षण कार्य हर समय चलता रहना चाहिए। यह कार्य उनके शरीर में तब भी चलता रहना चाहिए जब वे कोई विशेष कार्य न भी कर रहे हों। वे सभी प्रक्रम जो सम्मिलित रूप से अनुरक्षण का कार्य करते हैं, उन्हें जैव प्रक्रम कहते हैं। हमारे शरीर में सदा टूट-फूट होती रहती है। पुरानी कोशिकाएं मरती हैं, नई कोशिकाएं बनती हैं। इसलिए अनुरक्षण प्रक्रम को समुचित रूप से चलाने के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है जो श्वसन, भोजन आदि से हम प्राप्त करते हैं। शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालना आवश्यक होता है। इसके लिए उत्सर्जन तंत्र है। जैव प्रक्रम के अंतर्गत जीवन का अनुरक्षण करने वाले पोषण, श्वसन, परिसंचरण, उत्सर्जन आदि प्रक्रम समाहित किए जाते हैं।

उत्सर्जन तंत्र है। जैव प्रक्रम के अंतर्गत जीवन का अनुरक्षण करने वाले पोषण, श्वसन, परिसंचरण, उत्सर्जन आदि प्रक्रम समाहित किए जाते हैं।

प्रश्न 2. पोषण की परिभाषा दीजिए। पोषण की विभिन्न विधियां कौन-कौन सी हैं?

उत्तर-पोषण (Nutrition)-वह समस्त प्रक्रम जिसके द्वारा जीवधारी बाह्य वातावरण से भोजन ग्रहण करते हैं तथा भोज्य पदार्थ से ऊर्जा मुक्त करके शरीर की वृद्धि करते हैं, उसको पोषण (Nutrition) कहते हैं।

पोषण की विधियां-जीवों में पोषण की दो विधियां हैं-(i) स्वपोषी या स्वयंपोषी पोषण (Autotrophic nutrition) परपोषी पोषण या विषमपोषी पोषण (Heterotrophic nutrition)।

परपोषी पोषण निम्नलिखित तीन प्रकार का होता है

(i) मृतोपजीवी पोषण या मृतजीवी पोषण (Saprophytic nutrition)

(ii) परजीवी पोषण (Parasitic nutrition)

(iii) प्राणी समभोजी पोषण (Holozoic nutrition)।

प्रश्न 3. कवकों में पोषण किस विधि द्वारा होता है?

उत्तर-जिस पोषण में भोज्य पदार्थ मृत जीवों के शरीर से प्राप्त किया जाता है, उसे मृतोपजीवी पोषण (Saprophytic nutrion) कहते हैं। मृतोपजीवी जीव (कवक) विशेष प्रकार के पाचक रस तैयार करते हैं जिसके द्वारा वे मृत शरीर के जटिल पदार्थों को रासायनिक क्रियाओं द्वारा तोड़कर सरल घुलनशील पदार्थों में विघटित कर अवशोषित कर लेते हैं।

प्रश्न 4. उन वर्णकों का नाम लिखिए जो सौर ऊर्जा को ग्रहण करते हैं?                          (H.P. 2009, Set B)

उत्तर-क्लोरोफिल (Chlorophyll) पत्तियों में पाए जाने वाला हरा वर्णक है जो सौर ऊर्जा को अवशोषित करता है।

प्रश्न 5. प्रकाश संश्लेषण के दो चरण कौन-से हैं?

उत्तर-प्रकाश संश्लेषण की दो मुख्य प्रावस्थाएं निम्नलिखित हैं-

(i) प्रकाशिक अभिक्रिया (Light reaction) जिसके लिए प्रकाश आवश्यक है तथा

(ii) अप्रकाशिक अभिक्रिया (Dark reaction) जिसके लिए प्रकाश आवश्यक नहीं है।

प्रश्न 6. प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम लिखिए।

उत्तर-प्रकाश संश्लेषण को प्रभावित करने वाले कारकों के नाम निम्नलिखित हैं-

प्रकाश (Light), ऑक्सीजन (O2) कार्बन डाइऑक्साइड (CO2), तापमान (Temperature) और जल (Water)। प्रश्न 7. रंध्र एवं वातरंध्र क्या हैं ? श्वसन में इनकी क्या भूमिका है?

उत्तर-पौधों की पत्तियों की सतह पर असंख्य छोटे-छोटे छिद्र पाये जाते हैं, जो भीतरी पादप ऊतकों और बाहरी पर्यावरण के बीच गैसों का आदान-प्रदान करते हैं। इन छिद्रों को स्टोमेटा (रंध्र) कहते हैं। वायु अन्य जीवित कोशिकाओं तक विसरण (Diffusion) के द्वारा पहुंचती है, वातरंध्र तनों के छाल में उपस्थित छिद्र है, जिनके द्वारा तना वातावरण से गैसों का आदान-प्रदान करता है। द्वितीयक वृद्धि के बाद वात रंध्रों का निर्माण इसलिए होता है, क्योंकि कार्क कोशिकाएं अवकाश विहीन एवं सुवेरिन युक्त होने के कारण अपारगम्य होती हैं।

वातरंध्र स्टोमेटा के नीचे तथा कॉर्क कैंबियम की क्रियाशीलता से बनते हैं। इनके निर्माण के दौरान कॉर्क कैंबियम बाहर की ओर पतली भित्ति वाली पैरेनकाइमा कोशिकाएं बनाता है जिन्हें पूरक कोशाएं (Complementary Cells) कहते हैं। इन कोशिकाओं की संख्या में वृद्धि होती है जिससे बाह्य त्वचा टूट जाती है। उन स्थानों पर पूरक कोशिकाएं सूक्ष्म छिद्र वातरंध्र सहित उभर आती हैं। इन कोशिकाओं के बीच में पर्याप्त अंतरकोशिकीय अवकाश होते हैं जिससे गैसों का विनिमय तथा जल वाष्प के रूप में निकलता रहता है।

प्रश्न 8. प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए कि प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया में ऑक्सीजन निकलती है।

उत्तर-प्रयोग-इसे सिद्ध करने के लिए एक बड़े बीकर में जल लेकर उसमें हाइड्रिला के कुछ पौधे डालकर उसे कीप से ढक देते हैं।

ऑक्सीजन इस कीप में सोडियम बाइकार्बोनेट की कुछ मात्रा डाल देते हैं जिससे हाइड्रिला के पौधों को प्रकाश संश्लेषण के लिए पर्याप्त मात्रा में CO2 मिलती रहे। अब कीप के ऊपर पानी से एक परखनली को उलटकर रख देते हैं। अब इस पूरे उपकरण को सूर्य के प्रकाश में रखकर कुछ देर बाद देखते हैं कि हाइड्रिला के पौधे से बुलबुले उठकर परखनली के ऊपरी सिरे में एकत्रित होते हैं तथा परखनली के पानी का तल नीचे की ओर गिरने लगता है। परीक्षण के बाद पता चलता है कि यह गैस ऑक्सीजन है, जिससे सिद्ध होता है कि प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया में ऑक्सीजन निकलती है।

प्रश्न 9. प्रयोग द्वारा सिद्ध कीजिए कि प्रकाश संश्लेषण के लिए CO2 आवश्यक है।

उत्तर-उपकरण-गमले में लगा पौधा, KOH के घोल से भरी बोतल, कॉर्क KI घोल आदि।

विधि-गमले के पौधे को 36 से 48 घंटे अंधेरे में रखते हैं। एक हरी पत्ती को चौड़े मुंह की बोतल में कॉर्क के बीच इस प्रकार लगाते हैं कि पत्ती का आधा भाग KOH युक्त बोतल के अंदर रहे। बोतल के मुंह पर ग्रीस लगाकर वायुरुद्ध कर देते हैं। उपकरण को कुछ समय के लिए धूप में रखते हैं। कुछ घंटे बाद पत्ती को तोड़कर, पानी में उबालकर एल्कोहल से धोकर उस पर KI का घोल डालते हैं।

निरीक्षण-पत्ती का अग्र भाग जो बोतल में था पीला हो जाता है, क्योंकि बोतल में रखे KOH के द्वारा बोतल की CO2 गैस सोख ली जाती है जिससे प्रकाश संश्लेषण क्रिया पूरी न होने से पत्ती के अग्र भाग में मंड का निर्माण नहीं हो पाता है। शेष भाग मंड के कारण नीला हो जाता है।

परिणाम-प्रयोग से सिद्ध होता है कि प्रकाश संश्लेषण के लिए CO2 गैस आवश्यक है।

प्रश्न 10. सिद्ध कीजिए कि प्रकाश-संश्लेषण के लिए पर्णहरिम (Chlorophyll) आवश्यक है।

उत्तर-प्रकाश-संश्लेषण के लिए पर्णहरिम आवश्यक होता है, इसकी पुष्टि के लिए निम्नलिखित प्रयोग किया जाता है-

एक क्रोटन पौधे के गमले को 24-48 घंटे के लिए अंधकार में रख दिया जाता है। फिर एक निश्चित अवधि (समय) के पश्चात इसकी एक पत्ती को तोड़कर उसका स्टार्च परीक्षण आयोडीन से किया जाता है। निरीक्षण करने पर यह देखा जाता है कि पत्ती का वह स्थान जो हरा था, वह नीला हो गया और पीले भाग पर आयोडीन का कोई प्रभाव नहीं पड़ा। प्रयोग द्वारा यह स्पष्ट हो जाता है कि हरे भाग में पर्णहरिम उपस्थित होता है जिससे वहां प्रकाश संश्लेषण द्वारा स्टार्च का निर्माण हुआ अन्य स्थानों पर नहीं। अत: इससे सिद्ध होता है कि प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के लिए क्लोरोफिल आवश्यक है।

 

प्रश्न 11. प्रकाश संश्लेषण के लिए प्रकाश आवश्यक है। सिद्ध कीजिए।

उत्तरप्रयोग विधि-एक गमले में पौधे को 36 घंटे अंधेरे में (स्टार्च मुक्त करने के लिए) रखते हैं। गमले के पौधे की एक पत्ती के दोनों ओर काला कागज़ क्लिप से लगा देते हैं। इसके पश्चात् पौधे को तीन-चार घंटे के लिए सूर्य के तीव्र प्रकाश में रख देते हैं। उक्त पत्ती को तोड़कर पानी में उबालकर एल्कोहल से धोकर उस पर KI का घोल डालते हैं।

निरीक्षण-पत्ती का जो भाग काले कागज़ से ढका था पीला है, शेष भाग मंड के कारण नीला हो जाता है।

निष्कर्ष-इससे सिद्ध होता है कि प्रकाश संश्लेषण के लिए सूर्य के प्रकाश की आवश्यकता होती है

प्रश्न 12. श्वसन और श्वास में अंतर लिखिए।

उत्तर- श्वसन और श्वास में अंतर-

श्वसन (Respiration) श्वास (Breathing)
(1) यह एक भौतिक क्रिया है।

(2) इस क्रिया में ऊर्जा का उत्पादन होता है, जो ATP के रूप में संचित की जाती है।

(3) यह क्रिया कोशिका के अंदर होती है।

(4) इस क्रिया में एंजाइमों की आवश्यकता होती है।

(5) श्वसन की क्रिया सभी जीवधारियों में होती है।

(1) यह एक जैव रासायनिक क्रिया है। इस क्रिया में गैसों का आदान-प्रदान होता है।

(2) ऊर्जा का उत्पादन नहीं होता है।

(3) यह क्रिया कोशिका के बाहर होती है।

(4) इस क्रिया में एंजाइमों की आवश्यकता नहीं होती है।

(5) श्वासोच्छ्वास की क्रिया केवल उच्च जंतुओं में होती है।

 

प्रश्न 13. पादपों एवं प्राणियों के श्वसन के बीच दो अंतर बताइए।

उत्तर-(1) पौधों में श्वसन दर जंतुओं की अपेक्षा धीमी होती है।

(2) पौधों के द्वारा बहुत कम मात्रा में गैसों का परिवहन होता है, जबकि जंतुओं में ऐसा नहीं होता है।

प्रश्न 14. एपीग्लोटिस के कार्य लिखिए।

उत्तर-लैरिक्स के निकट एक पतला पत्ती के समान कपाट होता है जिसे एपीग्लोटिस कहते हैं। जब भोजन को निगलना होता है, एपीग्लोटिस घाटी द्वार (glottis) को बंद कर देता है जिससे भोजन के टुकड़े ट्रेक्रिया अथवा श्वासनली में नहीं जा पाते हैं।

प्रश्न 15. श्वास नली की भित्ति कम वायु के रहने पर भी क्यों नहीं ढहती है?

उत्तर-वायु की उपस्थिति बहुत कम हो जाने पर भी ट्रेकिया की भित्ति गिरती नहीं है क्योंकि इसे भीतर से उपस्थि (Cartilage) से सहारा मिलता रहता है।

प्रश्न 16: फुफ्फुस को ढकने वाली झिल्ली का नाम बताइए।

उत्तर-मनुष्य के फेफड़े दोहरी झिल्ली से ढके रहते हैं। इन झिल्लियों (membranes) को फुफ्फुसावरण (Pleura) कहते हैं।

प्रश्न 17. मानव ऊतकों में एकत्रित कार्बन डाइऑक्साइड का क्या होता है?

उत्तर-ऊतकों में एकत्रित कार्बन डाइऑक्साइड (CO2) फेफड़ों के वायुकोष्ठकों (Alveoli) पहुंचती है, जहां से यह श्वसन मार्ग के (Exhalation) द्वारा शरीर से बाहर निकाल दी जाती है।

प्रश्न 18. जीवधारियों के लिए पोषण क्यों अनिवार्य है?

उत्तर-जीवधारियों (जीवों) को पोषण की आवश्यकता निम्नलिखित कारणों से होती है-

(i) ऊर्जा उत्पादन के लिए-शरीर की जैविक क्रियाओं के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है और जीवधारियों को यह ऊर्जा भोज्य पदार्थों के ऑक्सीकरण से प्राप्त होती है।

(ii) शरीर की टूट-फूट की मुरम्मत के लिए-विभिन्न जैविक क्रियाओं में शरीर के ऊतकों की टूट-फूट होती है, इनकी मुरम्मत के लिए पोषण की आवश्यकता होती है।

(iii) वृद्धि क लिए नये जीवद्रव्य से नई कोशिकाएं बनती हैं। इनसे जीवों की वृद्धि होती है।

(iv) उपापचयी क्रियाओं के नियंत्रण के लिए-भोजन को पचाने तथा श्वसन आदि उपापचयी क्रियाओं में कुछ निर्माणकारी और कुछ विनाशकारी क्रियाएं होती रहती हैं। इन क्रियाओं के संपन्न होने में तथा इन क्रियाओं पर नियंत्रण के लिए ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 19. मनुष्य में श्वास लेने की क्रिया विधि के प्रमुख दो आधारों का विवरण दीजिए।

उत्तर-श्वासोच्छ्वास की क्रिया में गैसीय आदान-प्रदान के लिए वायुमंडलीय वायु को फेफड़ों के अंदर लिया जाता है तथा श्वसन के पश्चात् फेफड़े की वायु (CO2) को शरीर से बाहर किया जाता है। मनुष्य के श्वासोच्छ्वास की क्रिया-विधि दो चरणों में पूरी होती है-

(i) निश्वसन (Inspiration) तथा (ii) निःश्वसन (Expiration)।

(i) निश्वसन (Inspiration)-वायुमंडलीय या वातावरणीय वायु फेफड़ों में भरने की क्रिया को निश्वसन कहते हैं। इस क्रिया में मस्तिष्क के श्वसन केंद्र से प्राप्त उद्दीपन के कारण बाह्य इंटरकॉस्टल पेशियां संकुचित होती हैं, जिससे पसलियां बाहर की ओर झुक जाती हैं। इसी समय डायफ्राम की अरीय पेशियां संकुचित तथा उदर पेशियां शिथिल हो जाती हैं, जिससे वक्षीय गुहा का आयतन बढ़ने के साथ फेफड़े का आयतन भी बढ़ जाता है, फलतः श्वसन पथ से वायु अंदर आकर फेफड़े में भर जाती है।

(ii) निःश्वसन (Expiration)-वह क्रिया है जिसके द्वारा फेफड़ों की वायु को वायु पथ द्वारा शरीर से बाहर किया जाता है। इस क्रिया में मस्तिष्क के श्वसन केंद्र की उद्दीपन के कारण अंत: इंटरकॉस्टल पेशियां संकुचित, डायफ्राम की पेशियां शिथिल तथा उदर गुहा की पेशियां संकुचित होती हैं, फलतः वक्षीय गुहा के साथ फेफड़े का आयतन कम हो जाता है और फेफड़े की वायु श्वसन पथ से होते हुए बाहर निकल जाती है।

प्रश्न 20. कठिन व्यायाम का श्वसन दर पर क्या प्रभाव पड़ता है और क्यों?

उत्तर-सामान्य अवस्था में मनुष्य की श्वास दर (Breathing rate) 15 से 18 प्रति मिनट होती है, लेकिन कठोर व्यायाम के बाद यह दर बढ़कर 20 से 25 प्रति मिनट हो जाती है, क्योंकि व्यायाम के समय अधिक ऊर्जा की आवश्यकता होती है। अधिक ऊर्जा प्राप्त करने के लिए अधिक ऑक्सीजन की जरूरत होती है जिसके फलस्वरूप कठोर व्यायाम के बाद श्वास की दर बढ़ जाती है।

प्रश्न 21. ऊतकों एवं रक्त के बीच गैसीय विनिमय की क्रिया समझाइए।

उत्तर-जब प्राणी सांस लेते हैं तो ऊतकों और रक्त में गैसों की उपस्थिति परिवर्तित होती है। ऊतकों को ऑक्सीजन मिलती है और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकलती है। वह रक्त जो फेफड़ों से ऑक्सीजन लाता है, ऊतकों के पास ऑक्सीजन को पहुँचाता है। यहां ऑक्सीजन की उच्च सांद्रता और कार्बन डाइऑक्साइड की सांद्रता निम्न हो जाती है। सांद्रता के अंतर के कारण ऊतकों और रक्त वाहिकाओं में गैसों में बदलाव आ जाता है।

प्रश्न 22. विषमपोषी जीवों को पोषण के आधार पर किन-किन भागों में बांटा गया है?

उत्तर-विषमपोषी जीवों को पोषण के आधार पर निम्नलिखित भागों में बांटा गया है-

(i) मृतोपजीवीवे जीव जो अपना भोजन मत एवं सडे-गले कार्बनिक पदार्थों से प्राप्त करते हैं, मृतोपजीवी कहलाते हैं। उदाहरण-फफूंद (कवक), खमीर, मशरूम, जीवाणु आदि।

  1. परजीवी-वे जीव जो अपना भोजन अन्य जीवों के शरीर के बाहर अथवा भीतर रहकर प्रत्यक्ष रूप से प्राप्त करते हैं परजीवी कहलाते हैं। उदाहरण-खटमल, एस्केरिस मच्छर, अमरबेल आदि।
  2. प्राणी समभोजी-वे जीव जिनमें पाचन तंत्र पाया जाता है तथा जो भोज्य पदार्थ को अंतर्ग्रहित करके पाचन करते हैं तथा पचे भोजन का अवशोषण करके शेष अपचित भोजन को उत्सर्जित करते हैं। प्राणी समभोजी जीव कहलाते हैं। ये तीन प्रकार के होते हैं-

(i) शाकाहारी-ये जंतु अपना भोजन केवल पौधों से प्राप्त करते हैं। जैसे-गाय, चूहा, हिरन और बकरी आदि।

(ii) मांसाहारी-ये वे जंतु होते हैं जो अन्य जंतुओं के मांस को भोजन के रूप में ग्रहण करते हैं। जैसे-शेर, चीता, भेड़िया, सर्प, बाज आदि।

(iii) सर्वाहारी-ये जंतु केवल पौधों और जंतुओं के मांस दोनों को भोजन के रूप में लेते हैं। जैसे-कॉकरोच, मनुष्य, कौआ आदि।

प्रश्न 23. प्रकाश संश्लेषण क्रिया को कौन-कौन से कारक प्रभावित करते हैं? स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-1. प्रकाश (Light)-प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया सूर्य-प्रकाश में होती है, इसलिए प्रकाश का प्रकार तथा उसकी तीव्रता (intensity) इस क्रिया को प्रभावित करती है। प्रकाश की लाल एवं नीली किरणों तथा 100 फुट कैंडल से 3000 फुट कैंडल तक प्रकाश तीव्रता प्रकाश-संश्लेषण की दर को बढ़ाती है जबकि इससे उच्च तीव्रता पर यह क्रिया रुक जाती है।

  1. CO2– वातावरण में CO2 की मात्रा 0.03% होती है। यदि एक सीमा तक CO2 की मात्रा बढ़ाई जाए तो प्रकाश-संश्लेषण दर भी बढ़ती है लेकिन अधिक होने से घटने लगती है।
  2. तापमान (Temperature)-प्रकाश-संश्लेषण के लिए 25-35°C का तापक्रम सबसे उपयुक्त होता है। इससे अधिक या कम होने पर दर घटती-बढ़ती रहती है।
  3. जल (Water)-इस क्रिया के लिए जल एक महत्त्वपूर्ण यौगिक है। जल की कमी होने से प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया प्रभावित होती है क्योंकि जीवद्रव्य की सक्रियता घट जाती है, स्टोमेटा बंद हो जाते हैं और प्रकाश-संश्लेषण दर घट जाती है।
  4. ऑक्सीजन (O2)-प्रत्यक्ष रूप से ऑक्सीजन की सांद्रता से प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया प्रभावित नहीं होती है लेकिन यह पाया गया है कि वायुमंडल में O2 की मात्रा बढ़ने से प्रकाश-संश्लेषण की दर घटती है।

प्रश्न 24. प्रकाश संश्लेषण किसे कहते हैं? इसका महत्त्व लिखिए।

उत्तर-प्रकाश-संश्लेषण हरे पौधे सूर्य के प्रकाश द्वारा क्लोरोफिल नामक वर्णक की उपस्थिति में CO2 और जल के द्वारा कार्बोहाइड्रेट (भोज्य पदार्थ) का निर्माण करते हैं और ऑक्सीजन गैस बाहर निकालते हैं। इस प्रक्रिया को प्रकाश संश्लेषण कहते हैं।

                                                         सूर्य प्रकाश

6CO2 + 12 H2O          I                         C6H12O6 + 6H20 + 6O2

                                                         क्लोरोफिल

महत्त्व-(1) इस प्रक्रिया के द्वारा भोजन का निर्माण होता है जिससे मनुष्य तथा अन्य जीव-जंतुओं का पोषण होता है।

(2) इस प्रक्रिया में ऑक्सीजन का निर्माण होता है, जो कि जीवन के लिए अत्यावश्यक है। जीव श्वसन द्वारा ऑक्सीजन ग्रहण करते हैं जिससे भोजन का ऑक्सीकरण होकर शरीर के लिए ऊर्जा प्राप्त होती है।

(3) इस क्रिया में CO2 ली जाती है तथा O2 निकाली जाती है जिससे पर्यावरण में O2 एवं CO2 की मात्रा संतुलित रहती है।

(4) कार्बन डाइऑक्साइड के नियमन से प्रदूषण दूर होता है।

(5) प्रकाश संश्लेषण के ही उत्पाद खनिज, तेल, पेट्रोलियम, कोयला आदि हैं, जो करोड़ों वर्ष पूर्व पौधों द्वार संग्रहित किये गये थे।

प्रश्न 25. छोटी आंत में पचे हुए भोजन का अवशोषण किस प्रकार होता है? सचित्र वर्णन कीजिए।

उत्तर-पाचन क्रिया के बाद भोजन के प्रोटीन, अमीनो अम्ल से स्टार्च, शर्करा में तथा वसा-वसीय अम्ल एवं ग्लिसरॉल में रूपांतरित हो जाते हैं। ये पदार्थ आहार नाल की गुहा में पाये जाते हैं तथा इनका अवशोषण छोटी आंत की सूक्ष्मांकुर द्वारा होता है। छोटी आंत में स्थित पदार्थ या तो निष्क्रिय या सक्रिय रूप से पराश्रित होकर आंत की म्यूकस झिल्ली की रुधिर कोशिकाओं या लसिका कोशिकाओं में कोशिका से होते हुए चले जाते हैं।

निष्क्रिय अवशोषण में कोशिकीय ऊर्जा का उपयोग नहीं होता। इसमें पदार्थ सांद्रता प्रवणता के अनुसार कोशिकाओं में चले जाते हैं, जबकि सक्रिय अवशोषण द्वारा पदार्थ के अवशोषण में कोशिकीय ऊर्जा का उपयोग होता है। रुधिर कोशिकाएं आपस में मिलकर यकृत निवाहिका शिरा बनाती हैं, जिसके द्वारा वे अवशोषित पदार्थ यकृत (Liver) में पहुंचा दिये जाते हैं। लसिका कोशिकाएं, आपस में मिलकर लसिका परिसंचरण तंत्र की वक्षीय वाहिनी में खुलती हैं, जो सब क्लेवियल शिरा में खुलती है। अब ये पदार्थ परिसंचरण तंत्र द्वारा संपूर्ण शरीर में पहुंचाए जाते हैं। छोटी आंत अवशोषण कार्य के लिए पूरी तरह से अनुकूलित होती है।

प्रश्न 26. पचे हुए खाद्य पदार्थों के अवशोषण हेतु छोटी आंत उपयुक्त सतह प्रदान करती है। समझाइए।

उत्तर-मुख्यतः छोटी आंत (Small intestine) में ही भोज्य पदार्थों का अवशोषण होता है। इसके लिए इसकी सतह उपयुक्त होती है। इसकी दीवार में अवशोषण सतह को बढ़ाने के लिए अनेक वर्तुल एवं अनुलंब सलवटें पायी जाती हैं, जो अवशोषण सतह को सामान्य की अपेक्षा तीन गुना बढ़ा देती हैं। इसके अलावा इनकी सतह पर सूक्ष्मांकुर पाये जाते हैं, जो इसकी सतह को दस गुना बढ़ा देते हैं। श्लेष्मा स्तर की प्रत्येक कोशिका की स्वतंत्र सतह पर 600 अति सूक्ष्मांकुर पाये जाते हैं, जो अवशोषण सतह को 20 गुना बढ़ाते हैं। इस प्रकार मनुष्य की छोटी आंत की सतह सामान्य से 600 गुना अधिक होती है। इसकी दीवार की सतह की कोशिकाओं में अवशोषण का विशेष गुण पाया जाता है। इस कारण भी इसकी अवशोषण क्षमता बढ़ जाती है।

प्रश्न 27. प्रकाश संश्लेषण और श्वसन में अंतर बताइए।                                                              (H.P. 2013, Set-A)

उत्तर-प्रकाश संश्लेषण और श्वसन में अंतर-

प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) श्वसन (Respiration)
(1) यह क्रिया पौधे की पर्णहरित युक्त कोशिकाओं में होती है।

(2) यह क्रिया सूर्य के प्रकाश में संपन्न होती है।

(3) इस क्रिया में ऊर्जा भोजन के रूप में संग्रहित होती है।

(4) इसमें O2 निकलती है एवं CO2 अवशोषित होती है।

(5) यह उपचय (Anabolic) क्रिया है।

(6) यह रचनात्मक क्रिया है।

(7) इस क्रिया के बाद के जीव के भार में वृद्धि होती है।

(8) इसमें सूर्य के विकिरण ऊर्जा पोटेंशियल ऊर्जा (स्थितिज ऊर्जा) में परिवर्तित होती है।

 

(1) यह क्रिया सभी जीवित कोशिकाओं में होती है।

(2) यह क्रिया प्रकाश एवं अंधकार दोनों में होती है।

(3) इस क्रिया में भोजन में से ऊर्जा निर्मुक्त होती है।

(4) इसमें O­2 प्रयुक्त होती है एवं CO2 निकलती है।

(5) यह अपचय (Catabolic) क्रिया है।

(6) यह विनात्मक (विनाशकारी) क्रिया है।

(7) इस क्रिया के बाद जीव के भार में कमी होती है।

(8) इसमें पोटेंशियल काइनेटिक ऊर्जा (गतिज) में परिवर्तित होती है।

 

प्रश्न 28. बाहय श्वसन एवं अंतः श्वसन में अंतर बताइए।

उत्तर-बाह्य श्वसन एवं अंतः श्वसन में अंतर-

बाह्य श्वसन (External Respiration) अंतः श्वसन (Internal Respiration)
(1) इस क्रिया में वायु की ऑक्सीजन को अंतः श्वसन के लिए कोशिका के जीव-द्रव्य तक पहुँचाया जाता है।

(2) विभिन्न प्रकार के जीवों में इस क्रिया के लिए विभिन्न प्रकार के श्वासनांग होते हैं।

(3) इस क्रिया में प्राय: निम्नलिखित चरण होते हैं-

(i) श्वासोच्छ्वास (Breathing)

(ii) श्वसनांगों में गैसों का आदान-प्रदान।

(iii) श्वासनांगों से वायु की 0, का ऊतकों (Tissues) तक पहुँचना।

(iv) कोशिकाओं में गैसों का आदान-प्रदान।

(v) निष्कासित CO, को श्वासनांगों तक लगाकर बाहर वायुमंडल में छोड़ना।

(1) इस क्रिया में कोशिका के अंदर भोज्य पदार्थों का ऑक्सीकरण होता है।

(2) यह क्रिया कोशिका के अंदर कोशिका-द्रव्य एवं माइटोकांडिया में संपन्न होती है।

(3) इस क्रिया में प्रायः दो मुख्य चरण होते हैं-

(i) ग्लूकोज़ अणु को पाइरूविक अम्ल में तोड़ना।

(ii) पाइरूविक अम्ल को ऑक्सीजन की उपस्थिति में विघटित कर निकली ऊर्जा को ATP नामक अणुओं में उच्च ऊर्जा बंधों के रूप में अनुबंधित करना।

 

 

प्रश्न 29. अनॉक्सीश्वसन एवं किण्वन में अंतर लिखिए।

उत्तर-अनॉक्सीश्वसन एवं किण्वन में अंतर

अनॉक्सीकरण

(Anaerobic Respiration)

किण्वन

(Fermentation)

(1) यह क्रिया ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में जीवित माध्यम में होती है।

(2) यह क्रिया कोशिका के अंदर होती है।

(3) अनॉक्सी श्वसन माइमेन कंपलैक्स विकर की सहायता से होता है जो उच्च पौधों की कोशिकाओं में पाया जाता है।

(4) इसमें ऑक्सीकरण की क्रिया पूर्ण रूप से संपन्न नहीं होती इस कारण इसमें एक माध्यमिक यौगिक एथिल एल्कोहल बनता है तथा अल्प मात्रा में ऊर्जा बनती है।

(1) यह क्रिया भी ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में लेकिन निर्जीव माध्यम में होती है।

(2) यह क्रिया कोशिका के बाहर होती है।

(3) किण्वन की क्रिया भी जाइमेज कंपलैक्स विकर की सहायता से होती है जो सूक्ष्म जीव (यीस्ट) की कोशिकाओं में पाया जाता है।

(4) इसमें भी ऑक्सीकरण की क्रिया पर्ण रूप से संपन्न नहीं होती है इस कारण इसमें भी माध्यमिक यौगिक (एथिल एल्कोहल) तथा अन्य रसायन बनते हैं तथा कम मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है।

 

प्रश्न 30. जंतुओं में गैसीय आदान-प्रदान की विभिन्न विधियों का संक्षेप में वर्णन कीजिए।

उत्तर-जंतुओं में गैसीय आदान-प्रदान निम्नलिखित विधियों द्वारा होता है-

  1. सामान्य कोशिकाओं में सतह द्वारा-इसमें प्रक्रम श्वसन एक कोशिकीय जीवों (Unicellular Animals) अमीबा, पैरामीशियन, स्पंजों तथा सीलेंटेटम में होता है। इसमें जीव की कोशिकाएं सीधे जल के संपर्क में रहती हैं तथा सामान्य विसरण द्वारा O2 को ग्रहण तथा CO2 को त्यागती हैं।
  2. त्वचा द्वारा-ऐनेलिडा (केंचुआ, जोंक, नेरीज) ऐम्फिविया (मेंढक) संध के जंतुओं की त्वचा में कोशिकाओं का जाल फैला होता है, जिसकी सहायता से त्वचा (Skin) गैसीय आदान-प्रदान करती है।
  3. श्वसन नलियों द्वारा-आर्थोपोडा समूह में जंतुओं जैसे-कीटों, काकरोच, बिच्छू आदि में श्वसन (गैसीय आदान-प्रदान एवं परिवहन) पतली पतली-नलिकाओं द्वारा होता है जिन्हें ट्रैकिया (श्वसन नलिका) कहते हैं। ये पूरे शरीर में एक जाल-सा बनाती है, जिसे ट्रेकियल सिस्टम कहते हैं।
  4. गिल्स द्वारा– विकसित जलीय जीवों जैसे मछलियों, झींगों, मोलास्कों, इकाइकोडर्मेट्स, मेंढक के टेडपोलों

आदि में गैसीय आदान-प्रदान गिल्स के द्वारा होता है।

  1. फेफड़ों द्वारा-उभयचरों, स्तनियों, सहित कोर्डेटा के सभी जीवों में गैसीय आदान-प्रदान फेफड़ों द्वारा होता है। फेफड़ों द्वारा होने वाली श्वसन क्रिया को फुफ्फुसी श्वसन (Pulmonary Respiration) कहते हैं। इनमें जीवों में एक विकसित श्वसन तंत्र पाया जाता है। जिसके द्वारा वायु को फेफड़ों तक लाया जाता है तथा उससे बाहर निकाला जाता है। इस तरह फेफड़ों की सतह द्वारा गैसों का आदान-प्रदान होता है।

प्रश्न 31. किण्वन क्या है ? इसके महत्त्व का वर्णन कीजिए।

उत्तर-किण्वन वह क्रिया है, जिसमे सूक्ष्म जीव ग्लूकोज़ या शर्करा का अपूर्ण विघटन (Incomplete oxidation) कोशिका के बाहर करके CO2 तथा सरल कार्बनिक पदार्थ जैसे-इथाइल एल्कोहल, लैक्टिक एसिड, मैलिक एसिड, ऑक्जैलिक एसिड, साइट्रिक एसिड इत्यादि का निर्माण करते हैं, जिसके फलस्वरूप कुछ ऊर्जा मुक्त होती है।

किण्वन का महत्त्व (Importance of Fermentation)-किण्वन की क्रिया का निम्नलिखित महत्त्व है-

(1) इसकी सहायता से एल्कोहल, बीयर आदि का उत्पादन किया जाता है।

(2) इस क्रिया के द्वारा कई महत्त्वपूर्ण कार्बनिक यौगिकों जैसे ऐसिटिक अम्ल, ल्यूटेरिक अम्ल आदि का उत्पादन किया जाता है।

(3) इस तकनीक का उपयोग बेकरी तथा सिरका उद्योग में किया जाता है।

(4) जूट, सन, तंबाकू, चाय, चमड़ा इत्यादि उद्योग में इस तकनीक का प्रयोग किया जाता है।

(5) इसका उपयोग रंग, साबन, प्लास्टिक, रेज़िन, ईथर के निर्माण में किया जाता है।

प्रश्न 32. निम्नलिखित श्वासनांगों पर टिप्पणी लिखिए

(i) लेरिक्स (ii) ट्रैकिया (ii) ब्रौंकाई (iv) फेफड़े।

उत्तर-(i) लेरिक्स (Larynx)—यह श्वास नली का वह भाग है जहां ग्रसनी ट्रैकिया से जुड़ती है। इसे स्वर या कंठ भी कहते हैं। यह भोजन नली की प्रतिपृष्ठ सतह पर स्थित होता है। इसकी गुहा (कंठ कोष) आगे की तरफ ग्लॉटिस छिद्र द्वारा ग्रसनी से जुड़ता है। इसके ऊपर इपीग्लॉटिस नामक एक उपस्थि होती है जो भोजन निगलते समय ग्लॉटिस को बंद कर देती है। इसका मुख्य कार्य ध्वनि उत्पादन है।

(ii) ट्रैकिया (Trachea)– यह लगभग 12 सेमी लंबी उपास्थि की एक नली है जो हवा को लेरिंक्स से ब्रौंकस तक लाती है।

(ii) ब्रौंकाई (Bronchi)-ट्रैकिया वक्षीय गुहा में जाकर दो शाखाओं में बंट जाते हैं। जिन्हें ब्रौंकाई कहते हैं। इससे होकर वायु फेफड़ों में पहुंचती है।

(iv) फेफड़े (Lungs)-प्रत्येक ब्रौंकस अपनी तरफ के फेफड़ों में खुलते हैं। ये ब्रौंकस फेफड़ों में प्रवेश करने के बाद अनेक पतली-पतली शाखाओं में बंट जाते हैं। ये शाखाएं पुनः छोटे-छोटे कोष्ठकों में बंट जाती हैं, जिन्हें कूपिका (Alveoli) कहते हैं। इसी के लिए पतली एवं दीवार द्वारा वायु का आदान-प्रदान होता है।

प्रश्न 33. परजीवी कितने प्रकार के होते हैं? उदाहरण दीजिए।

उत्तर-परजीवी दो प्रकार के होते हैं-

(i) बाहय परजीवी (Ectoparasite)-इस प्रकार के परजीवी पोषक के शरीर के बाहर रहकर उनसे भोजन प्राप्त करते हैं, जैसे-जूं, खटमल आदि।

(ii) अंतः परजीवी (Endoparasite)– ये परजीवी पोषक के शरीर के अंदर रहकर उनसे भोजन प्राप्त करते हैं, जैसे-एस्केरिस, टेपवर्म आदि।

प्रश्न 34. प्रकाशिक और अप्रकाशिक क्रियाओं में अंतर बताएं।

उत्तर-प्रकाशिक और अप्रकाशिक क्रियाओं में अंतर-

प्रकाशिक क्रिया (Light Reaction) अप्रकाशिक क्रिया (Dark Reaction)
(i) प्रकाश संश्लेषण की यह क्रिया दिन में होती है।

(ii) यह क्रिया क्लारोप्लास्ट के ग्रेनम भाग में होती है।

(iii) इस क्रिया में प्रकाश ऊर्जा को अवशोषित ATP के रूप में स्थिर कर लिया जाता है।

(iv) इसमें जल का विघटन होता है जिसमें ऑक्सीजन गैस निकलती है।

(i) यह क्रिया रात्रि (अंधकार) में होती है।

(ii) यह क्रिया क्लोरोप्लास्ट के स्ट्रोमा भाग में होती है।

(iii) इसमें ATP में संचित ऊर्जा का उपयोग होता है।

 

(iv) इसमें CO) का अपचयन होता है।

 

प्रश्न 35. पाचन में हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (HCI) का कार्य लिखिए।

(H.P. 2010, 2011 Set-C, 2013 Set-C)

उत्तर-अमाशय द्वारा स्रावित जठर रस (Gastric Juice) में तनु HC1 उपस्थित होता है। पाचन में यह निम्नलिखित प्रकार से सहायक है-

(1) मुख गुहा में आए भोजन को अम्लीय बनाता है जिससे अमाशयी प्रकीण्व (Enzyme) इस पर कार्य कर सकें।

(ii) यह निष्क्रिय विकरों (inactive enzyme) को सक्रिय अवस्था में लाता है।

(iii) यह भोजन के साथ आए जीवाणुओं (Bacteria) को नष्ट कर देता है।

(iv) भोजन में उपस्थित Ca युक्त भाग को कोमल बनाता है।

(v) यह पाइलोरिक छिद्र के खुलने और बंद होने पर नियंत्रण रखता है।

प्रश्न 36 पाचन में पित्त रस का महत्त्व लिखिए।

उत्तर-पित्त रस (Bile Juice) प्रत्यक्ष रूप से भोजन के पाचन में भाग नहीं लेता है, लेकिन इसमें विभिन्न प्रकार के रसायन होते हैं जो पाचन क्रिया में सहायता करते हैं। इस तरह पित्त रस निम्नलिखित महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाता है-

(i) यह अमाशय से आए भोजन के अम्लीय प्रभाव को क्षारीय बनाता है।

(ii) यह जीवाणुओं को मारता है तथा इसकी उपस्थिति में ही अग्नाशयी रस (Pancreatic Juice) कार्य करता है।

(iii) यह आंत की दीवार को क्रमाकुचन के लिए उत्तेजित करता है।

(iv) यह वसा में घुलनशील विटामिनों (A,D,E,K) के अवशोषण में सहायक होता है।

(v) यह कुछ विषैले पदार्थों जैसे-कोलेस्ट्रॉल और धातुओं के उत्सर्जन में सहायक होता है।

प्रश्न 37. मृतोपजीवी तथा परजीवी पोषण में अंतर लिखिए।

उत्तर-मृतोपजीवी तथा परजीवी पोषण में अंतर-

मृतोपजीवी पोषण परजीवी पोषण
पोषण की इस विधि में जीव भोज्य पदार्थ को पचाने के लिए विशेष पाचक एंजाइम निर्मित करते हैं। यह पाचक रस मृत शरीर के जटिल कार्बनिक पदार्थ को रासायनिक प्रतिक्रियाओं द्वारा तोड़कर सरल पदार्थों में विघटित कर उपयोग में लाते हैं।

उदाहरण-फफूंद, मोल्ड आदि अघुलनशील कार्बोहाइड्रेट को घुलनशील कार्बोहाइड्रेट में बदलकर अपना पोषण करते हैं।

परजीवी की विधि में एक जीव अपने पोषण के लिए दूसरे जीवों पर आश्रित रहता है। इस विधि द्वारा कई पौधे एवं जन्तु अपना पोषण करते हैं। उदाहरण-फीताकृमि, गोलकृमि, अमरबेल आदि।

 

प्रश्न 38. मनुष्य के मुख में भोजन का क्या पाचन होता है?

उत्तर-ठोस भोजन जब मनुष्य के मुख में होता है तो इसे दाँतों द्वारा चबाया जाता है। साथ ही लार ग्रंथियों द्वारा लार (Saliva) का स्रावण होता है जिससे जीभ द्वारा मिलकर भोजन लुग्दी के रूप में परिवर्तित हो जाता है। लार में उपस्थित टाइलिन (Ptylin) या इमाइलेज (Amylase) नामक एंजाइम भोजन को चिकना करने के साथ-साथ मंड (Starch) का पाचन करता है।

प्रश्न 39. मनुष्य में पायी जाने वाली लार ग्रंथियों के नाम एवं उनकी मुख गुहा में स्थिति लिखिए।

उत्तर-मनुष्य के मुख गुहा में तीन जोड़ी लार ग्रंथियाँ (Salivary glands) होती हैं जो मुख गुहा में लार स्रावित करती हैं। ये हैं-

(i) उपकर्ण ग्रंथि (Parotid glands)–एक जोड़ी दोनों कर्णों के नीचे एक-एक की संख्या में।

(ii) अधोजिह्वा ग्रंथियाँ (Sublingual glands)-एक जोड़ी जिह्वा के नीचे दोनों तरफ।

(ii) अधोहनु ग्रंथियाँ (Submaxillary glands)-मैक्जिला अस्थि के नीचे दोनों तरफ एक-एक की संख्या में। प्रश्न 40. प्रोटीन के पाचन में HC1 के महत्त्व को समझाइए।

उत्तर-प्रोटीन के पाचन में HC1 (हाइड्रोक्लोरिक अम्ल) का महत्त्वपूर्ण योगदान है, क्योंकि यह प्रोटीन पाचक एंजाइमों को सक्रिय बनाता है। यह प्रोटीन पाचक एंजाइम पेप्सिनोजेन को उसके रूप पेप्सिन में परिवर्तित करता है।

HC1

Pepsinogen            I                           Pepsin

Activator

यह पेप्सिन प्रोटीन को प्रोटीओजेज और पेट्टोन में बदल देता है।

                                                            H2O                                    H2O

Proteins + Pepsin     I                 Protcoses      I             Peptone

इसी प्रकार HC1 दूसरे पाचक रेनिन को सक्रिय अवस्था में लाता है।

HC1

Prorenin      I           Renin

यह रेनिन दूध के प्रोटीनों का पाचन करता है।

प्रश्न 41. अग्न्याशयी रस में पाये जाने वाले विकरों के नाम तथा कार्य लिखिए। (H.P. 2011 Set-B)

अथवा

पाचक एंजाइमों के कार्य लिखिए।                                                               (H.P. 2013 Set-C, 2014 Set-A)

 उत्तर-अग्न्याशयी रस (Pencreatic Juice) को पूर्ण पाचक रस कहा जाता है, क्योंकि इसमें तीनों प्रमुख भोज्य पदार्थों कार्बोहाइड्रेट, वसा तथा प्रोटीन को पचाने वाले पाचक एंजाइम उपस्थित होते हैं। इनमें प्रमुख विकरों के नाम एवं कार्य निम्नलिखित हैं-

विकर (Enzyme) कार्य (Function)
(i) अग्न्याशयी एमाइलेज (Amylopsin)

 

(ii) अग्न्याशयी लाइपेज (Steapsin)

 

(ii) ट्रिप्सिन एवं काइमोंटित्सिन

 

(iv) कार्बोक्सी पेप्टाइड्स

 

यह ग्लाइकोजन तथा स्टार्च को मालोज (डाइसैकेराइड) में बदल देता है।

यह काइम में उपस्थित वसा को वसीय अम्ल एवं ग्लिसरॉल में बदल देता है।

यह काइम में शेष बचे प्रोटीन को पालीपेप्टाइड तथा पेप्टोनस में तोड़ देता है।

इसके द्वारा पालीपेप्टाइड श्रृंखला अमीनो में बदल जाती है।

 

प्रश्न 42. मुख गुहा में पाचन क्रिया समझाइए।

उत्तर-मुख गुहा में पाचन क्रिया-मुख गुहा में भोजन को दाँतों द्वारा चबाया और पीसा जाता है। चबाते समय भोजन से लार (Saliva) अच्छी तरह मिलकर उसे लुग्दी (Pulp) में बदल देता है। अब लार में उपस्थित एंजाइमों द्वारा भोजन का निम्नलिखित प्रकार पाचन होता है-

(i) म्यूसिन (Mucin)– यह भोजन को चिकना बनाता है जिससे यह आसानी से सरक कर आहार नाल में बढ़ जाता है।

(ii) टायलिन (Ptyline)– यह भोजन में उपस्थित मंड (स्टार्च) को माल्टोज शर्करा में बदल देता है। यदि टायलिन बहुत देर तक क्रिया करता रहे तो माल्टोज ग्लूकोज में बदल जाता है। इसलिए अधिक देर तक भोजन चबाने से मीठा लगने लगता है।

(ii) लाइसोजाइम (Lysozyme)—यह भोजन में उपस्थित जीवाणुओं की कोशिकाभित्ति के पॉलीसेकेराइड्स को पचाकर जीवाणुओं को मारता है।

प्रश्न 43. सहजीविता पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर-जब दो जीव आपस में संयुक्त रूप में साथ-साथ रहकर जीवन-यापन करते हैं, तब इन्हें सहजीवी जीव तथा इस क्रिया को सहजीविता कहते हैं, जबकि इस प्रकार का पोषण सहजीवी पोषण कहलाता है; जैसे-लाइकेन एक सहजीवी पौधा है, जिसमें एक कवक तथा एक शैवाल सहजीवी रूप में रहते हैं।

प्रश्न 44. श्वसन में गैसीय आदान-प्रदान हेतु श्वसन सतह में क्या विशेषताएं होनी चाहिएं?

उत्तर-गैसीय आदान-प्रदान हेतु श्वसन सतह में निम्नलिखित विशेषताएं होनी चाहिएं-

(1) श्वसन सतह पतली तथा पारगम्य होनी चाहिए।

(2) ऑक्सीजन तथा कार्बन-डाइऑक्साइड को घुलने के लिए श्वसन सतह नम होनी चाहिए।

(3) श्वसन सतह हमेशा O2 के संपर्क में होनी चाहिए।

(4) श्वसन सतह का क्षेत्रफल अधिक होना चाहिए, जिससे अधिक-से-अधिक गैसीय आदान-प्रदान हो सके। प्रश्न 45. निश्वसन तथा निःश्वसन में अंतर बताइए।

उत्तर-निश्वसन तथा निःश्वसन में अंतर-

निश्वसन

(Inspiration)

निःश्वसन

(Expiration)

(1) इस क्रिया में वायुमंडलीय CO2 युक्त वायु फेफड़ों में प्रवेश करती है।

(2) इसमें बाह्य अंतरापर्युक पेशियों तथा डायफ्राम की रेडियल पेशियों में संकचन होता है।

(3) इसमें डायाफ्राम चपटा तथा स्टर्नम नीचे की ओर झुका होता है।

(4) इस क्रिया के दौरान पसलियाँ बाहर और आगे की ओर खिसकती हैं।

(5) प्लुरल गुहाओं (Pleural Cavities) का आयतन बढ़ जाता है।

इसमें फेफड़ों से CO2 युक्त वायु बाहर निकाली जाती है।

इसमें अंत: अंतरापर्युक पेशियों तथा रेडियल पेशियों में संकुचन होता है।

इसमें डायाफ्राम गुंबदनुमा तथा स्टर्नम ऊपर खिसक जाता है।

इसमें पसलियाँ भीतर और पीछे की ओर खिसकती हैं।

प्लुरल गुहाओं का आयतन कम हो जाता है।

 

 

प्रश्न 46. श्वसन एवं दहन में अंतर बताइए।

उत्तर-श्वसन एवं दहन में अंतर-

श्वसन दहन
(1) श्वसन एक जैव रासायनिक क्रिया है।

(2) इसमें पदार्थों का धीमी गति से ऑक्सीकरण होता है।

(3) इस क्रिया में निकली ऊर्जा ATP के रूप में संचित रहती है।

(4) यह एक नियंत्रित क्रिया है तथा कम ताप पर होती है।

(1) यह एक अजैविक क्रिया है।

(2) इसमें तीव्र गति से ऑक्सीकरण होता है।

 

(3) इस क्रिया में ऊर्जा प्रकाश एवं ताप के रूप में निकलती है।

(4) यह एक अनियमित क्रिया है जो उच्च तापक्रम का होती है।

 

प्रश्न 47. श्वसन में माइट्रोकाँड्रिया की क्या भूमिका है?

उत्तर-श्वसन में माइट्रोकाँड्रिया की भूमिका-श्वसन की ग्लाइकोलिसिस क्रिया कोशिका द्रव्य में लेकिन पाइरूविक अम्ल तथा श्वसन के दौरान बने NADH2 का ऑक्सीकरण माइट्रोकाँड्रिया के अंदर होता है। इसके लिए आवश्यक प्रोटीन माइट्रोकाँड्रिया के क्रिस्टी में उपस्थित रहते हैं। इसके अलावा माइट्रोकाँड्रिया ATP जंतुओं संचय भी करती है। अत: माइट्रोकाँड्रिया ऑक्सीकरण द्वारा जीव कोशिकाओं के लिए ऊर्जा का उत्पादन करता। इसी कारण इसे कोशिका का ऊर्जा गृह (पावर हॉउस) भी कहते हैं।

प्रश्न 48. किण्वन की क्रिया में यीस्ट का क्या महत्त्व है?

उत्तर-किण्वन वह क्रिया है जिसमें शर्करा के घोल में से शर्करा को कार्बनिक-पदार्थों जैसे-एल्कोहल, लैक्टिक अम्ल, एसीटिक अम्ल इत्यादि तथा CO2 में अपघटित कर दिया जाता है। एल्कोहॉलिक किण्वन में यीस्ट का महत्त्वपूर्ण योगदान होता है। इसकी कोशिका में बना जाइमेज प्रकीण्व बाह्य परसारण के द्वारा कोशिका से बाहर आकर शर्करा को एल्कोहल तथा CO2 में तोड़ देता है। इसी कारण यीस्ट का उपयोग एल्कोहल उद्योग में किया जाता है।

yeast

CH6H12O6           I               2CO2 + 2C2H5OH

Zymase

प्रश्न 49. कूपिकाओं में होने वाले गैसीय आदान-प्रदान को समझाइए।

उत्तर-फुफ्फुसीय श्वसन में गैसीय आदान-प्रदान कूपिकाओं में ही होता है। पल्मोनरी धमनी शाखाओं की कोशिकाएँ कूपिका के चारों तरफ जाल के रूप में फैली रहती हैं और आपस में मिलकर पल्मोनरी शिरा बनाती हैं। जब फेफड़े में आने वाले वायु कूपिका में भरती है, तब सांद्रता प्रवणता के कारण कूपिका के वायु की O2 परासारित होकर कोशिका और कोशिका की CO2 कूपिका में आ जाती है। कूपिका तथा कोशिका की दीवारें अत्यंत पतली होती हैं। इसके अलावा कूपिका की दीवार हमेशा नम ही रहती है, जिससे गैसीय आदान-प्रदान में मदद मिलती है।

प्रश्न 50. श्वसन कितने प्रकार का होता है? ऑक्सी श्वसन की क्रियाविधि बताइए।

उत्तर-सभी जीवधारियों (जीवों) में श्वसन क्रिया दो प्रकार की होती है-

(1) ऑक्सी श्वसन (2) अनॉक्सी श्वसन

  1. ऑक्सी श्वसन (Aerobic Respiration)-ऑक्सीजन की उपस्थिति में होने वाला श्वसन ऑक्सीकरण कहलाता है। अधिकतर जीवधारियों (मनुष्य, पेड़-पौधों आदि) में इसी प्रकार का श्वसन होता है। इसमें भोज्य पदार्थों का पूर्ण ऑक्सीकरण (Complete Oxidation) होता है जिसके फलस्वरूप CO2 जलवाष्प तथा अधिक ऊर्जा निकलती है, जो ATP के रूप में संचित हो जाती है।

ऑक्सीजन

C6H12O6 + 6O2                  I                   6 CO2 + 6H2O + 673 Kcal (ऊर्जा)

(विकर)

ग्लूकोज़           ऑक्सीजनकार्बन डाइऑक्साइड          जल

ऑक्सी श्वसन की क्रिया का कुछ भाग कोशिका द्रव्य (Cytoplasm) में और शेष भाग माइट्रोकांड्रिया में होता श्वसन का कोशिका द्रव्य में होने वाला भाग ग्लाइकोलाइसिस (Glycolysis) तथा माइट्रोकांड्रिया में होने वाला भाग क्रेब्स-चक्र (Creb’s Cycle) कहलाता है।

प्रश्न 51. वातरंध्र पर टिप्पणी लिखिए।

उत्तर-वातरंध्र (Lenticels)-वातरंध्र पौधों के तनों में उपस्थित छिद्र हैं, जिनके द्वारा तना वातावरण से गैसों का आदान-प्रदान करता है। चूँकि द्वितीयक वृद्धि (Secondary growth) के बाद बनी कार्क कोशिकाएँ अंतरकोशिकीय अवकाशविहीन तथा सुबेरिन युक्त होने का कारण आपारगम्य होती हैं, इसी कारण वातरंध्रों के निर्माण की आवश्यकता पड़ती है। वातरंध्र सामान्यतः उसी स्थान पर बनते हैं जहाँ रंध्र (Stomata) पाये जाते हैं। इनका निर्माण कार्क या पेरिडर्म के निर्माण के साथ ही प्रारंभ हो जाता है।

इनके निर्माण के समय कागजन (Cork Combium) बाहर की ओर कार्क न बनाकर पतली भित्ति वाली पैरनकाइमा कोशिकाओं को बनाता है, जिन्हें पूरक कोशिकाएँ (Complementary Cells) कहते हैं। इन पूरक कोशिकाओं के निर्माण के कारण बाह्य त्वचा (Epidermis) टूट जाती हैं, यही वातरंध्र (Lenticel) बन जाता है।

प्रश्न 52. द्वार कोशिकाओं पर संक्षिप्त टिप्पणी लिखिए।

उत्तर-पत्तियों की बाह्य त्वचा पर असंख्य छोटे छिद्र होते हैं, जिन्हें रंध्र (Stomata) कहते हैं। ये रंध्र दो अर्धचंद्राकार या वृक्काकार रक्षक कोशिकाओं से घिरे रहते हैं जिन्हें द्वारा कोशिकाएं (Guard cells) कहते हैं।

इनकी भीतरी दीवार मोटी तथा बाहरी दीवार पतली होती है। इस कारण जब ये स्फीत दशा में रहती हैं, तो स्टोमेटा बंद रहता है। ये स्टोमेटा खुला रहता है। लेकिन जब ये ढीली अवस्था में रहती हैं, तो स्टोमेटा को चारों तरफ से घेरे रहती हैं तथा स्टोमेटा के बंद होने तथा खुलने का नियंत्रण करती हैं।

प्रश्न 53. पदार्थों में स्थानांतरण की आवश्यकता क्यों होती है?

उत्तर-पौधों में पदार्थों का परिवहन बहुत आवश्यक होता है। पौधे जड़ों और पत्तों के द्वारा भोजन तैयार करते हैं। पत्तों के द्वारा तैयार किया भोजन जड़ों की ओर तथा जड़ों के द्वारा तैयार भोजन पत्तों की ओर जाना आवश्यक है। परिवहन के द्वारा भोजन पौधे के सभी भागों के पास पहुँच जाता है।

प्रश्न 54. उन विविध कोशिकाओं के नाम लिखिए जिनके द्वारा जल पत्तियों तक पहुँचता है।

उत्तर-ज़ाइलम ट्रेकीड्स, वैसल्स अथवा वाहिका, जाइलम पैरेंकाइमा, जाइलम स्कलेरेंकाइमा।

प्रश्न 55. वह तकनीकी शब्द बताइए जो पत्तियों से पादप के अन्य भागों तक भोजन की प्रक्रिया के लिए प्रयोग किया जाता है।

उत्तर-स्थानांतरण (Translocation)।

प्रश्न 56 लाल रुधिर कणिकाओं का रंग लाल क्यों होता है?

उत्तर-लोहे का यौगिक हीमोग्लोबिन के कारण।

प्रश्न 57. श्वेत रक्त कणिकाओं को शरीर का सैनिक क्यों कहते हैं?

उत्तर-श्वेत रक्त कणिकाएँ शरीर की रक्षक हैं। ये प्रतिरक्षियों का निर्माण करती हैं। जब कभी शरीर में रोग फैलाने वाले रोगाणु प्रविष्ट हो जाते हैं या कोई चोट लग जाती है तो ये रोगाणुओं का भक्षण कर लेती हैं। इसीलिए इन्हें शरीर का सैनिक कहा जाता है।

प्रश्न 58. धमनी एवं शिरा में दो अंतर कौन-कौन से हैं?

उत्तर

धमनी (Artery) शिराएं (Veins)
(1) धमनी हृदय से रक्त का संवहन शरीर के विभिन्न भागों में करती है।

(2) इनमें कपाट (वाल्व) नहीं होते हैं।

(3) इनकी दीवारें मोटी होती हैं।

(4) फुफ्फुस धमनी को छोड़कर शेष धमनियां ऑक्सीजन युक्त शुद्ध रक्त का परिवहन करती हैं।

(5) माँस के अंदर अधिक गहराई में स्थित होती हैं।

(6) रक्त का बहाव तेज़ और झटके से होता है।

(1) शिराएं शरीर के विभिन्न भागों से रक्त को  एकत्रित करके उसका संवहन हृदय तक करती है।

(2) इनमें कपाट (वाल्व) होते हैं।

(3) इनकी दीवारें पतली होती हैं।

(4) फुफ्फुस शिरा को छोड़कर शेष शिराएं CO2 युक्त अशुद्ध रक्त का परिवहन करती हैं।

(5) माँस के अंदर कम गहराई में स्थित होती हैं।

(6) रक्त का बहाव धीमी चाल से होता है।

 

प्रश्न 59. मूत्रमार्ग से क्या अभिप्रायः है?

उत्तर-शरीर से मूत्र को बाहर निकालने के लिए झिल्लीमय नालिका को मूत्र मार्ग कहते हैं जिसका सीधा संबंध मूत्राशय से होता है।

प्रश्न 60. वृक्कक निस्यंद के वृक्क-नालिका में प्रवाहित होते समय उसमें उपस्थित ग्लूकोज़ का क्या होता है?

उत्तर-वृक्कक निस्यंद के वृक्क-नालिका में प्रवाहित होते समय उसमें उपस्थित ग्लूकोज़, अमीनो अम्ल जैसे उपयोगी पदार्थ वृक्क नालिका के चारों ओर बने कोशिका जाल के द्वारा फिर से अवशोषित कर लिए जाते हैं जबकि अपशिष्ट पदार्थ वृक्कक के भीतरी भाग में प्रवाहित कर दिए जाते हैं ताकि वे मूत्राशय में मूत्र विसर्जन के लिए चले जाएं।

प्रश्न 61. मनुष्य में वृक्कक के दो प्रमुख कार्यों का वर्णन कीजिए

उत्तर-(i) यह रक्त में घुले अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालते हैं।

(ii) यह पानी और लवण का उचित संतुलन बनाए रखते हैं।

प्रश्न 62. पादपों तथा प्राणियों में पदार्थों के परिवहन के लिए विशिष्ट ऊतकों अथवा अंगों की क्या आवश्यकता है?

उत्तर-पौधों और जंतुओं में पदार्थों के परिवहन की अति आवश्यकता होती है। यह आवश्यकता विशेष ऊतकों या अंगों के द्वारा पूरी होती है। सभी कोशिकाओं को जीवित रहने के लिए ऑक्सीजन, पानी और भोजन की ज़रूरत होती है। जीव-जंतु इन पदार्थों को विशेष अंगों से प्राप्त तो कर लेते हैं पर दूसरे अंगों तक इन्हें पहुँचाने के लिए विशेष व्यवस्था करनी पड़ती है जैसे पेड़-पौधे जाइलम और फ्लोयम ऊतकों से अपने भोजन को शेष भागों के पास भेजते हैं और जीव-जंतु भोजन के पाचन के बाद रक्त के माध्यम से उसका परिवहन करते हैं।

प्रश्न 63. धमनी, शिरा तथा कोशिका में अंतर स्पष्ट कीजिए।

उत्तर-1. धमनियाँ-ये साफ़ रक्त को हृदय से शरीर के अन्य अंगों के पास ले जाती हैं। ये चौड़ी होती हैं और माँस के अंदर गहराई में विद्यमान होती हैं।

  1. शिराएँ-ये अशुद्ध रक्त को शरीर के अंगों से हृदय की ओर लाती हैं। इनकी दीवारें पतली होती हैं। माँस में बहुत गहराई में नहीं बल्कि ऊपरी त्वचा के पास होती हैं।
  2. केशिकाएँ-ये बहुत पतली और बारीक होती हैं। यही रक्त को सभी अंगों के पास पहुँचाती हैं।

प्रश्न 64. मनुष्य के लसीका तंत्र पर टिप्पणी लिखिए तथा लसीका के प्रमुख कार्यों का उल्लेख कीजिए।

उत्तर-हमारे शरीर में रक्त लगातार हृदय की ओर जाता है और वापिस अंगों के पास जाता है पर इसके अतिरिक्त एक और भी परिसंचरण तंत्र है जो बंद वाहिनियों का परिसंचरण कहलाता है-इसे लसीका तंत्र कहते हैं। लसीका या लिंफ स्वच्छ तरल है जो रक्त कोशिकाओं से बाहर आ जाता है और सभी ऊतक गुहाओं को गीला रखता है। यह हीमोग्लोबिन को अनुपस्थिति के कारण रक्त की तरह लाल नहीं होता।

इसका रंग हल्का पीला होता है। यह ऊतकों की ओर से हृदय की ओर ही बहता है। यह किसी पंप के द्वारा गति नहीं करता। इस तंत्र में अनेक वाहिनियाँ, ग्रंथियाँ और वाहिनिकाएँ होती हैं। इनके कुछ प्रमुख कार्य हैं-

 

 

(i) हानिकारक जीवाणुओं को समाप्त कर रोगों से शरीर की रक्षा करती हैं।

(ii) शरीर पर लगे घावों को ठीक करने में सहायता करती हैं।

(ii) लिंफ नोड में छानने का कार्य करती हैं।

(iv) छोटी आंत में वसा का अवशोषण करती हैं।

(v) लिंफोसाइट्स का निर्माण करती हैं।

प्रश्न 65. अमीबा में उत्सर्जन किस प्रकार होता है?

उत्तर-एक कोशी जीव अमीबा ताज़े पानी में रहता है और कुंचनशील धानी से उत्सर्जन क्रिया करता है, यह अपनी कोशिका से अपशिष्ट पदार्थ और अतिरिक्त धानी कोशिका द्रव्य से कुंचनशील धानी में प्रवेश कराता है जिस कारण कुंचनशील धानी का आकार अपेक्षाकृत बढ़ जाता है। वह कोशिका भित्ति के पास पहुँचकर फट जाती है और अपशिष्ट पदार्थ उससे बाहर निकल जाते हैं।

 

प्रश्न 66. यकृत एवं अग्न्याशय के क्या-क्या कार्य हैं?                                                             (H.P. 2010, Set-C)

 उत्तर-यकृत के कार्य (Functions of Liver)-

(i) यकृत हमारे शरीर का ऊर्जा बैंक कहलाता है। यह पाचन क्रिया के फलस्वरूप बने अतिरिक्त ग्लूकोज़ को ग्लाइकोजन के रूप में संचित करता है।

(ii) यकृत के अंदर यूरिया का निर्माण होता है।

(iii) यकृत कोशिकाएँ हानिकारक जीवाणुओं का भक्षण कर उनको नष्ट कर देती हैं।

(iv) यकृत कोशिकाएँ प्रोथोंबिन एवं फाइब्रिनोजन रक्त प्रोटीन का संश्लेषण करती हैं।

अग्न्याशय (पैंक्रियाज़) का कार्य (Functions of Pancreas)

(i) अग्न्याशय, अग्न्याशय रस (Pancreatic Juice) का निर्माण करता है। इस रस में तीन प्रकार के एंजाइम होते हैं-ट्रिप्सिन, एमाइलोसिन एवं स्टीएत्सिन जो प्रोटीन को पेटटोन, स्टार्च को ग्लूकोस तथा वसा को वसा अम्ल और ग्लिसरॉल में परिवर्तित करते हैं।

(ii) यह इंसुलिन हार्मोन को स्रावित करता है। यह शरीर में ग्लूकोस की सांद्रता को स्थिर बनाए रखता है एवं उसके उपापचय की गति को नियंत्रित करता है।

(iii) यह ग्लूकेगीन हार्मोन स्रावित करता है जो कार्बोहाइड्रेट उपापचय में भाग लेता है।

प्रश्न 67. परासरण नियमन किसे कहते हैं? मनुष्य में यह किस प्रकार संपन्न होता है?

उत्तर-शरीर में पानी और आयनिक संतुलन के उचित स्तर को बनाए रखने की प्रक्रिया को परासरण नियमन कहते हैं। मनुष्यों में यह प्रक्रिया गुर्दो के द्वारा होती है। विभिन्न स्थानों पर रहने वाले जीव-जंतुओं में इसकी दर बदलती रहती है। पानी में रहने वाले जीव शरीर से पानी को शीघ्रता से उत्सर्जित करते हैं पर रेगिस्तानी जीव ऐसा जल्दी-जल्दी नहीं करते।

प्रश्न 68. मनुष्य में मूत्र बनाने की क्रियाविधि का संक्षिप्त विवरण लिखिए।

उत्तर-शरीर में पाचन के द्वारा नाइट्रोजन विभिन्न लवणों में बदलती है। अमोनियम लवण यूरिया में बदलते हैं यकृत कोशिकाओं के द्वारा जब इसे परिसंचरण तंत्र से वृक्क में पहुँचाया जाता है तो मूत्र निर्माण आरंभ होता है। मूत्र में मुख्य रूप से पानी तथा शेष अपशिष्ट पदार्थ होते हैं। इसमें पानी की मात्रा 95% तथा अन्य पदार्थ 5% तथा यूरिया प्रमुख यौगिक के रूप में इसमें घुला रहता है।

प्रश्न 69. मनुष्य में पाए जाने वाले प्रमुख नाइट्रोजन अपशिष्ट पदार्थ का नाम लिखिए। स्पष्ट कीजिए कि यह शरीर से किस प्रकार निष्कासित किया जाता है?

उत्तर- मनुष्य में मुख्य नाइट्रोजन युक्त अपशिष्ट पदार्थ यूरिया है। यह शरीर के गुर्दो के द्वारा बाहर निकल जाता है।

प्रश्न 70. निम्नलिखित में अंतर स्पष्ट कीजिए

(i) रक्त एवं लसिका (ii) जाइलम एवं फ्लोएम।

उत्तर- (i) रक्त एवं लसिका

 

 

लसीका (Lmyph) रक्त (Blood)
(1) लसीका रंगहीन ऊतक है।

(2) इसमें प्रोटीन की मात्रा कम होती है।

(3) इसमें लाल रक्त कणिकाओं का पूर्ण अभाव होता है।

(4) इसमें उत्सर्जी पदार्थ अधिक मात्रा में पाये जाते हैं।

(5) ऑक्सीजन एवं पोषक पदार्थ की मात्रा अपेक्षाकृत कम होती है।

(6) श्वेत रक्त कणिकाओं (W.B.C.) की संख्या अत्यधिक होती है।

(7) इसमें लिंफोसाइट्स (Lymphocytes) की संख्या सबसे अधिक होती है।

(1) रक्त लाल रंग का द्रवीय ऊतक है।

(2) इसमें प्रोटीन की मात्रा अधिक होती है।

(3) इसमें लाल रक्त कणिकाएं पायी जाती हैं।

 

(4) इसमें उत्सर्जी पदार्थ कम मात्रा में पाये जाते हैं।

 

 

(5) ऑक्सीजन एवं पोषक पदार्थ अधिक पाए जाते हैं।

(6) श्वेत रक्त कणिकाओं की संख्या उपेक्षाकृत कम होती है।

(7) इसमें न्यूट्रोफिल्स (Neutrophils) की संख्या अधिक होती है।

 

 (i) जाइलम एवं फ्लोएम

जाइलम फ्लोएम
(1) जाइलम द्वारा जल और उसमें घुले लवणों का संवहन होता है।

(2) यह निर्जीव ऊतक है।

(3) इसमें मुख्यतः संवहन नलिकाएं होती हैं।

(4) इसकी भित्ति बहुत मोटी होती है।

(1) फ्लोएम में पत्तियों द्वारा निर्मित भोज्य पदार्थों का संवहन होता है।

(2) यह सजीव ऊतक है।

(3) इसमें मुख्यतः चलनी नलिकाएं होती हैं।

(4) इसकी भित्ति कम मोटी होती है।

 

प्रश्न 71. वृक्क के मुख्य कार्यों को लिखिए

उत्तर-(1) वृक्क का मुख्य कार्य नाइट्रोजन युक्त उत्सर्जी पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने का होता है।

(2) वृक्क जल की मात्रा को संतुलित बनाये रखने का कार्य करता है।

(3) वृक्क शरीर में अम्ल क्षार का संतुलन बनाये रखते हैं।

(4) वृक्क लवण संतुलन में सहायक होते हैं।

(5) वृक्क शरीर में अनावश्यक रूप से उत्सर्जी पदार्थों जैसे विष, दवाइयों इत्यादि को मूत्र के साथ बाहर निकालते हैं।

प्रश्न 72. जंतुओं में गैसीय पदार्थों का उत्सर्जन कैसे होता है?

उत्तर-जंतुओं में मुख्य गैसीय उत्सर्जी कार्बन डाइऑक्साइड होती है। श्वसन में उत्पन्न हुई कार्बन डाइऑक्साइड रक्त की लाल रक्त कणिकाओं में उपस्थित हीमोग्लोबिन से संयुक्त होकर तथा जल में घुलकर न केवल संवाहित होकर फेफड़ों की सतह पर पहुँच जाती है बल्कि वहाँ से उच्छवास की क्रिया द्वारा शरीर के बाहर निष्कासित कर दी जाती है।

प्रश्न 73. क्या कारण है कि पौधों में उत्सर्जी अंगों की आवश्यकता नहीं होती?

उत्तर-पौधों में अपचय की क्रिया (Catabolic activity) बहुत कम होती है। पौधों में अपचय क्रिया से उत्पन्न उत्सर्जी पदार्थ उपचय क्रिया (Anabolic activity) में उपयोग कर लिए जाते हैं। इन सभी कारणों से पौधों में उत्सर्जी पदार्थों की मात्रा से कम होती है। फलस्वरूप पौधों में उत्सर्जन के लिए विशेष उत्सर्जी अंगों की आवश्यकता नहीं होती है।

प्रश्न 74. नेफ्रान को डायलिसियस थैला क्यों कहते हैं?

उत्तर-नेफ्रान को डायलिसियस थैला इसलिए कहा जाता है क्योंकि नेफ्रान की प्यालेनमा संरचना बाऊमैन संपुट में स्थिर कोशिका गुच्छ की दीवारों से रक्त छनता है। रक्त में उपस्थिति प्रोटीन के अणु बड़े होने के कारण छन नहीं पाते तथा ग्लूकोज़ और लवण के अणु छोटे होने से छन जाते हैं। इस प्रकार नेफ्रान को डायलिसियस थैली के समान कार्य करती है।

प्रश्न 75. परासरण नियमन क्या है?

उत्तर-परासण नियमन (Osmoregulation) का प्रयोग सर्वप्रथम हेवर ने 1902 में किया था। प्रत्येक जंतु का उसके वातावरण के साथ जल एवं लवणों का एक निकट का संबंध रहता है। शरीर के अंदर जल एवं लवणों का एक अनुकूलतम सांद्रण बनाये रहना अत्यंत आवश्यक है। ऐसे सांद्रण को बनाये रखना ही परासरण नियमन कहलाता है। मानव शरीर में वृक्क परासरण नियमन को असंतुलित बनाए रखता है।

प्रश्न 76. होमिओस्टेसिस (Homeostasis) को समझाइए।

उत्तर-मूत्र निर्माण तथा उत्सर्जी पदार्थों को शरीर से बाहर निकालने के अतिरिक्त वृक्क शरीर में जल, अम्ल, क्षार तथा लवणों का संतुलन बनाये रखने में सहायता देता है। वृक्क रुधिर से अतिरिक्त जल की मात्रा को मूत्र के रूप में शरीर से बाहर निकालता है। इसी प्रकार वृक्क के कारण रुधिर में लवण सदैव एक निश्चित मात्रा में ही मिलते हैं। अमोनिया रुधिर के H+ की अधिकता को कम करके रुधिर में अम्ल-क्षार संतुलन बनाने में सहायता देती है। वृक्कों द्वारा ही विष, दवाइयाँ आदि हानिकराक पदार्थों का भी शरीर से विसर्जन होता है। अतः वह समस्त क्रियाएँ जिनके द्वारा शरीर में एक स्थायी अवस्था बनी रहती है उसको होमिओस्टेसिस कहते हैं।

प्रश्न 77. हृदय रोग होने या इसकी शंका के निवारण के लिए डॉक्टरों के द्वारा प्रायः कौन-सा परीक्षण किया जाता है? वे हृदय की प्रसमता को किस प्रकार मापते हैं?

उत्तर-किसी व्यक्ति को हृदय रोग होने या इसकी शंका होने पर प्रायः सबसे पहले ई० सी० जी० (Electro Cardio Gram) के द्वारा हृदय की कार्य विधि का अध्ययन करते हैं।

हृदय के निकट के हिस्से में शरीर पर विशिष्ट स्थानों पर इलैक्ट्रोड लगा दिये जाते हैं। हृदय संकुचन के समय जो विद्युत् विभव S.A. Node से उत्पन्न होकर हृदय के विशिष्ट संवाही पेशी तंतुओं से प्रवाहित होकर हृदय की पेशियों को सिकुड़ने के लिए प्रेरित करता है। इस अध्ययन के द्वारा उसे मापा जाता है। अगर हृदय में कोई दोष होता है तो वह ग्राफ से पता लग सकता है। एक आदर्श ECG नीचे दिया गया है-

(i) सामान्य ECG

(ii) ECG के घटक।

प्रश्न 78. मनुष्य के वृक्क की अनुप्रस्थ काट का चित्र बनाइए।

उत्तर-वृक्क की अनुप्रस्थ काट का नामांकित चित्र-

प्रश्न 79. मनुष्य के परिसंचरण तंत्र का चित्र बनाइए।

उत्तर-

 

प्रश्न 80. अपोहन (Dialysis) क्रिया किसे कहते हैं ? इस प्रकिया को समझाइए।

अथवा

डायलिसिस प्रक्रिया को समझाइए।                                (H.P. 2014 Set-A)

उत्तर-अपोहन (Dialysis)– यदि किसी लवण और स्टार्च के विलयन को सैलोफेन की थैली भरकर उसे आसवित जल में लटका दिया जाए तो लवण के आयन सैलोफेन से होते हुए आसवित जल में प्रवेश कर जाते हैं और स्टार्च थैली के भीतर रह जाता है। यह प्रक्रिया अपोहन (Dialysis) कहलाती है।

कई बार विपरीत परिस्थितियों के कारण गुर्दे अपना कार्य ठीक प्रकार से नहीं करते। शरीर में बनने वाला यूरिया तथा अन्य उत्सर्जी पदार्थों को ये रक्त से छानने में असमर्थ हो जाते हैं जिस कारण रक्त में ये विषैले पदार्थ बढ़ने लगते हैं। तब डायलिसिस यंत्र का प्रयोग कर रक्त को साफ़ किया जाता है। इस यंत्र में रक्त सेलोफोन झिल्ली की बनी नलिकाओं में बहता है।

इन नलिकाओं के बाहर रक्त का समपरासी लवण द्रव को बहाया जाता है। जिस कारण नलिकाओं के अंदर बहते रक्त से उत्सर्जी पदार्थ अलग होकर यंत्र के द्रव में आ जाते हैं और रक्त यूरिया तथा उत्सर्जी पदार्थों से मुक्त हो जाता है। इस क्रिया के बाद रक्त को शरीर में वापिस भेज दिया जाता है।

प्रश्न 81. रक्त दाब किसे कहते हैं? इसे कैसे मापते हैं? रक्त चाप अधिक बढ़ जाने से क्या क्षति हो सकती है?

उत्तर-रक्त वाहिकाओं की दीवारों के विरुद्ध जो दाब लगता है उसे रक्तदाब कहते हैं। यह दाब शिराओं की अपेक्षा धमनियों में बहुत अधिक होता है। धमनी के अंदर रक्त का दाब निलय प्रकुंचन के दौरान प्रकुंचन दाब तथा निलय अनुशिथिलन के दौरान धमनी के अंदर का दाब अनुशिथिलन दाब कहलाता है। सामान्य प्रकुंचन दाब लगभग 120 मिमी (पारा) तथा अनुशिथिलन दाब लगभग 80 मिमी (पारा) होता है।

स्फाईग्मोमैनोमीटर नाम यंत्र से रक्तदाब मापा जाता है। उच्च रक्तदाब को अति तनाव भी कहते हैं और इसका कारण धमनिकाओं का सिकुड़ना है। इससे रक्त प्रवाह में प्रतिरोध बढ़ जाता है। इससे आँख, मस्तिष्क आदि अंगों की धमनी फट सकती है। इससे आंतरिक रक्तस्रावण हो सकता है।

अति लघु उत्तरात्मक प्रश्न

(Very Short Answer Tvpe Questions)

प्रश्न 1. क्या दिखाई देने वाली गति जीवन के परिभाषित लक्षण के लिए पर्याप्त है?

उत्तर-नहीं, अति सूक्ष्म स्केल पर होने वाली गतियाँ आँखों से दिखाई नहीं देतीं।

प्रश्न 2. हमारे शरीर की सभी संरचनाएँ किससे बनी हुई हैं?

उत्तर-अणुओं से।

प्रश्न 3. जीवितों के शरीर का अनुरक्षण कार्य कब-कब चलता है?

 उत्तर-यह सदा चलता रहता है, जब तक उनमें जीवन रहता है।

प्रश्न 4. जैव प्रक्रम क्या हैं?

उत्तर-वे सभी प्रक्रम जो सम्मिलित रूप से अनुरक्षण का कार्य करते हैं, जैव प्रक्रम कहलाते हैं।

प्रश्न 5. अनुरक्षण प्रक्रम के लिए शरीर को किस की आवश्यकता होती है?

उत्तर-ऊर्जा की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 6. पोषण क्या है?

उत्तर-ऊर्जा के स्रोत को भोजन के रूप में शरीर के अंदर लेने के प्रक्रम को पोषण कहते हैं।

प्रश्न 7. पृथ्वी पर जीवन मूल रूप से किस प्रकार के खादय अणुओं पर आधारित है?

उत्तर-कार्बन के अणुओं पर।

प्रश्न 8. शरीर के भीतर ऊर्जा के समान स्रोत में परिवर्तन के लिए क्या आवश्यक होता है?

उत्तर-स्रोतों के विघटन या निर्माण की आवश्यकता।

प्रश्न 9. उपचयन-अपचयन अभिक्रियाएँ क्या हैं?

उत्तर-ये अभिक्रियाएँ अणुओं के विघटन की कुछ सामान्य रासायनिक युक्तियाँ हैं।

प्रश्न 10. श्वसन क्या है?

उत्तर-शरीर के बाहर से ऑक्सीजन को ग्रहण करना तथा कोशिकीय आवश्यकता के अनुसार खाद्य स्रोत के विघटन में उसका उपयोग श्वसन कहलाता है।

प्रश्न 11. एक कोशिका जीव की पूरी सतह किसके संपर्क में रहती है?

उत्तर-पर्यावरण के संपर्क में।

प्रश्न 12. बहुकोशी जीवों में विभिन्न कार्यों को करने के लिए विभिन्न अंग क्या करते हैं?

उत्तर-वे विभिन्न कार्य करने के लिए विशिष्टीकृत हो जाते हैं।

प्रश्न 13. भोजन तथा ऑक्सीजन का अंतः ग्रहण किनका कार्य है?

उत्तर-विशिष्टीकृत ऊतकों का कार्य।

प्रश्न 14. उत्सर्जन क्या है?                               (H.P. 2010, Set-B)

उत्तर-शरीर से अपशिष्ट पदार्थों को बाहर निकालना उत्सर्जन है।

प्रश्न 15. भोजन क्या है?

उत्तर-ऊर्जा की प्राप्ति के लिए जो पदार्थ खाए जाते हैं वे भोजन हैं।

प्रश्न 16. स्वपोषी जीव किसे कहते हैं?

 उत्तर-जो जीव अकार्बनिक स्रोतों से CO2 तथा जल के रूप में सरल पदार्थ प्राप्त करते हैं उन्हें स्वपोषी कहते हैं।

प्रश्न 17. हरे पौधे और कुछ जीवाणु कैसे जीवों के उदाहरण हैं?

उत्तर-स्वपोषी जीव।

प्रश्न 18. सभी विषमपोषी उत्तरजीविता के लिए किन पर आश्रित होते हैं?

उत्तर-स्वपोषियों पर।

प्रश्न 19. विषमपोषियों के दो उदाहरण दीजिए।

उत्तर-जंतु और कवक।

प्रश्न 20. पौधों में सूर्य के प्रकाश में होने वाली किसी एक अभिक्रिया का उदाहरण दीजिए।

(H.P. 2012, Set-A, 2013 Set-A)

उत्तर-प्रकाश संश्लेषण प्रक्रिया से।

प्रश्न 21. अमीबा में किस प्रकार का पाचन होता है?

उत्तर-अमीबा में अंतः कोशिकीय प्रकार का पाचन होता है।

प्रश्न 22. प्रकाश संश्लेषण की क्रिया के लिए आवश्यक कच्चे पदार्थों के नाम लिखिए।

उत्तर-प्रकाश संश्लेषण के लिए आवश्यक कच्चे पदार्थ हैं-सूर्य का प्रकाश, क्लोरोफिल, CO2 तथा जल।

प्रश्न 23. हरे पौधों को उत्पादक क्यों कहते हैं?

उत्तर-पौधे CO2, H2O, सूर्य प्रकाश तथा हरित लवक की सहायता से अपने तथा जीव-जगत् के दूसरे जीवों के लिए भोज्य पदार्थों का निर्माण करते हैं, इसलिए इन्हें उत्पादक कहा जाता है।

प्रश्न 24. पौधे हरे क्यों दिखाई देते हैं?

उत्तर-क्लोरोफिल की उपस्थिति के कारण पौधे हरे दिखाई देते हैं, जो श्वेत प्रकाश में उपस्थित हरे रंग के प्रकाश को परावर्तित तथा शेष रंगों के प्रकाश को अवशोषित कर लेता है। हरा प्रकाश हमारे आँखों के दृष्टि पटल पर पड़ता है, तो हमें हरे रंग का अहसास होता है। यही कारण है कि पौधे हरे दिखाई देते हैं।

प्रश्न 25. प्रकाश संश्लेषण की दर किस दृश्य प्रकाश में सर्वाधिक होती है?

उत्तर-प्रकाश संश्लेषण की दर लाल प्रकाश में सर्वाधिक होती है।

प्रश्न 26. पत्तियों के जिस कोशिकांग में क्लोरोफिल पाया जाता है, उसका नाम बताइए।

उत्तर-पत्तियों के क्लोरोप्लास्ट (Chloroplast) में क्लोरोफिल पाया जाता है।

प्रश्न 27. संतुलन प्रकाश तीव्रता बिंदु किसे कहते हैं?

उत्तर-संतुलन प्रकाश तीव्रता बिंदु (Compensation Point)-जब प्रकाश संश्लेषण की क्रिया मंद होती है (सूर्योदय और संध्या के समय) तो श्वसन में निर्मुक्त कार्बन डाइऑक्साइड प्रकाश संश्लेषण के लिए पर्याप्त होती है। यह अवस्था जिसमें बाहर (पर्यावरण) की CO2 नहीं ली जाती है, संतुलन प्रकाश तीव्रता बिंदु कहलाती है।

प्रश्न 28. प्रकाश संश्लेषण के समय उत्पन्न ऑक्सीजन पत्तियों से निकलकर वायुमंडल में कैसे प्रविष्ट होती है?

उत्तर-प्रकाश संश्लेषण की क्रिया में शर्करा के निर्माण के पश्चात् कोशिका से विसरण क्रिया द्वारा ऑक्सीजन पर्यावरण में मुक्त होती है।

प्रश्न 29. प्रकाश संश्लेषण में कार्बन डाइऑक्साइड के महत्त्व को बताइए।                             (H.P. 2010. Set-A)

उत्तर-प्रकाश संश्लेषण क्रिया में CO2 का अवशोषण करके पानी की सहायता से इसका उपाचयन कार्बोहाइड्रेट के रूप में किया जाता है अर्थात् प्रकाश संश्लेषण CO2 के बिना संभव नहीं है और यह भोजन निर्माण के लिए आवश्यक है।

प्रश्न 30. पौधों की पत्तियों तक जल कैसे पहुँचता है?

उत्तर-पौधों की जड़ें जल अवशोषित कर जाइलम द्वारा इसे पत्तियों तक पहुँचाती हैं। यह क्रिया परासरण कहलाती है।

प्रश्न 31. प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया कहाँ होती है?

उत्तर-प्रकाश-संश्लेषण की क्रिया हरित लवकों में होती है।

प्रश्न 32. प्रकाश संश्लेषण क्रिया में बनने वाली O2 किस क्रिया कारक से निकलती है?

उत्तरप्रकाश संश्लेषण की क्रिया में बनने वाली O2 जल से आती है।

प्रश्न 33. प्रकाश संश्लेषण की रासायनिक क्रिया लिखिए।

                                                               क्लोरोफिल

उत्तर-6CO2 + 6H2O    I             C6H12O6 + 6O2

                     सूर्य का प्रकाश                                        (ग्लूकोज़)

प्रश्न 34. मरुद्भिद पौधे अपने भोजन के लिए कार्बन डाइऑक्साइड कब प्राप्त करते हैं?

उत्तर-रात के समय।

प्रश्न 35. मरुद्भिद पौधे CO2 से क्या करते हैं?

उत्तर-वे CO2 से एक मध्यस्थ उत्पाद बनाते हैं और दिन के समय क्लोरोफिल ऊर्जा अवशोषित करके अंतिम उत्पाद तैयार कर लेते हैं।

प्रश्न 36. पौधों की पत्तियाँ रंधों से क्या करती हैं?

उत्तर-गैसों का आदान-प्रदान करती हैं।

प्रश्न 37. पत्तों में छिद्रों का खुलना और बंद होना किस पर निर्भर करता है?

उत्तर- द्वार कोशिकाओं पर।

प्रश्न 38. द्वार कोशिकाएं कब फूल जाती हैं?

उत्तर-द्वार कोशिकाएं जल के भीतर जाने पर फूल जाती हैं।

प्रश्न 39. स्थलीय पौधे मिट्टी से किन पदार्थों को प्राप्त करते हैं?

उत्तर-नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, लोहा, मैग्नीशियम तथा अन्य पदार्थ।

प्रश्न 40. पौधों में नाइट्रोजन तत्व की क्या उपयोगिता है?

उत्तर-यह प्रोटीन बनाता है तथा अन्य यौगिकों का संश्लेषण करता है।

प्रश्न 41. विषमपोषियों में पोषण की विधि किस आधार पर भिन्न होती है?

उत्तर-भोजन के स्वरूप और उपलब्धता के आधार पर।

प्रश्न 42. जो जीव भोज्य पदार्थों का विघटन शरीर से बाहर ही कर देते हैं उनके उदाहरण दीजिए।

उत्तर-फफूंदी, यीस्ट, मशरूम आदि कवक।

प्रश्न 43. दो बाह्य परजीवियों के नाम लिखिए।

उत्तर-(i) खटमल (ii) जूं।

प्रश्न 44. दो अंतः परजीवियों के नाम लिखिए।

उत्तर-फीताकृमि, प्लाजमोडियम (मलेरिया परजीवी)।

प्रश्न 45. उन जीवों के उदाहरण दीजिए जो अन्य जीवों को मारे बिना ही उनसे पोषण प्राप्त करते हैं?

उत्तर-अमरबेल, आर्किड, जूं, लीच, किलनी, फीताकृमि आदि।

प्रश्न 46. एक कोशी जीव भोजन किससे प्राप्त करते हैं?

उत्तर-पूरी सतह से।

प्रश्न 47. अमीबा अपना भोजन किस की सहायता से ग्रहण करता है?

उत्तर-अँगुली जैसे अस्थायी प्रवर्ध की सहायता से।

प्रश्न 48. कौन-सा एक कोशी जीव एक विशिष्ट स्थान से भोजन ग्रहण करता है?

उत्तर-पैरामीशियम।

प्रश्न 49. मनुष्य में आहार नाल कहाँ से कहाँ तक फैली होती है?

उत्तर-मुँह से गुदा तक।

प्रश्न 50. लार क्या है?

उत्तर-मुँह में लाल ग्रंथियों से निकलने वाला रस लार कहलाता है।

प्रश्न 51. लार में कौन-सा एंजाइम विद्यमान होता है?

उत्तर-लार एमिलेस।

प्रश्न 52. लार क्या काम करती है?

उत्तर-यह मंड जटिल अणु को शर्करा में खंडित करती है और भोजन को गीला कर निगलने में सहायता देती है।

प्रश्न 53. मुँह से भोजन आमाशय तक किस के द्वारा ले जाया जाता है?

उत्तर- भोजन ग्रसिका या ईसोफेगस।

प्रश्न 54. भोजन को प्राप्त कर कौन फैल जाता है?

उत्तर-आमाशय।

प्रश्न 55. आमाशय में उपस्थित जठर ग्रंथियाँ क्या उत्पन्न करती हैं?

उत्तर-हाइड्रोक्लोरिक अम्ल और प्रोटीन पाचक एंजाइम पेप्सिन तथा श्लेष्मा।

प्रश्न 56. आहार नली का सबसे लंबा भाग कौन-सा है?                       (H.P. 2010, Set-A, 2014 Set-C)

उत्तर-क्षुद्रांत्र।

प्रश्न 57. किन प्राणियों के लंबी क्षुद्रांत्र की आवश्यकता होती है?

उत्तर-घास खाने वाले शाकाहारियों को सेल्युलोज़ पचाने के लिए लंबी क्षुद्रांत्र की आवश्यकता होती है।

प्रश्न 58. बाघ/शेर/चीता/भेड़िया आदि माँसाहारियों की क्षुद्रांत्र कैसी होती है?

उत्तर-इनमें छोटी क्षुद्रांत्र होती है।

प्रश्न 59. क्षुद्रांत्र में किन-किन का पाचन होता है?                                                                  (H.P. M.Q.P.)

उत्तर-कार्बोहाइड्रेट, प्रोटीन और वसा का पाचन।

प्रश्न 60. आमाशय से आने वाला भोजन किस प्रकृति का होता है?

उत्तर-अम्लीय प्रकृति का।

प्रश्न 61. भोजन को क्षारीय कौन बनाते हैं?

उत्तर- अग्न्याशयिक एंजाइम।

प्रश्न 62. यकृत से कौन-सा रस निकलता है?

उत्तर-पित्त रस।

प्रश्न 63. अग्न्याशय किस रस का स्त्रावण करता है?

उत्तर-अग्न्याशयिक रस का स्रावण।

प्रश्न 64. प्रोटीन का पाचन कौन करता है?

उत्तर-ट्रिपासिम एंजाइम।

प्रश्न 65. इमल्सीकृत वसा का पाचन कौन करता है?

उत्तर-लाइपेज़ एंजाइम।

प्रश्न 66. मनुष्य के आहार नाल की लंबाई कितनी होती है?                                               (H.P. 2013, Set B)

उत्तर-मनुष्य के आहार नाल की लंबाई लगभग 9 से 10 मीटर होती है।

प्रश्न 67. मनुष्य के शरीर में सबसे ग्रंथि का नाम बताइए।                                                 (H.P. 2010)

उत्तर-यकृत (Lever)।

प्रश्न 68. उस ग्रंथि का नाम बताइए, जिसमें अंतःस्रावी एवं बाह्य स्रावी दो ही प्रकार के भाग होते हैं?

उत्तर-अग्न्याशय (Pancreas) ऐसी ग्रंथि है, जिसमें अंत:स्रावी (Endocrine) एवं बाहय स्रावी (Exocrine) दोनों ही प्रकार के भाग (या कोशिकाएं) होते हैं।

प्रश्न 69. पोषण के विभिन्न चरण क्या हैं?

उत्तर-जंतुओं में पोषण के पाँच चरण होते हैं, जिनमें पोषण की संपूर्ण क्रिया होती है-

(i) अंतर्ग्रहण (Ingestion)

(ii) पाचन (Digestion)

(iii) अवशोषण (Absorbtion)

(iv) स्वांगीकरण (Assimilation)

(v) बहिक्षेपण (Egestion)।

प्रश्न 70. छोटी आंत के विभिन्न भागों के नाम बताइए।

उत्तर-छोटी आँत के तीन भाग होते हैं-

(i) ग्रहणी (Duodenum)

(ii) मध्यांत्र (Jejunum) तथा (iii) क्षुद्रांत (Ileum)।

प्रश्न 71. उस अंग का नाम बताइए जहाँ पित्त रस इकट्ठा होता है।

उत्तर-पित्ताशय में पित्तरस इकट्ठा होता है।

प्रश्न 72. अविकसित अवस्था में रक्त का संश्लेषण कहाँ होता है?

उत्तर-अविकसित अवस्था में रक्त का संश्लेषण यकृत (Liver) में होता है।

प्रश्न 73. मनुष्य के शरीर में यकृत तथा अग्न्याशय कहाँ मौजूद होते हैं?

उत्तर-मनुष्य के शरीर में यकृत तथा अग्न्याशय ग्रसिका के नीचे मौजूद होते हैं।

प्रश्न 74. जीभ हमारी किस प्रकार मदद करती है?

उत्तर-जीभ हमारी निम्नलिखित प्रकार से मदद करती है-

(i) यह भोजन को चबाने में मदद करती है।

(ii) यह बोलने में मदद करती है।

(iii) इससे भोजन के स्वाद का पता चलता है।

प्रश्न 75. एक कोशिकीय सर्वाहारी जंतु का नाम बताइए।

उत्तर-अमीबा।

प्रश्न 76. काइम और काइल में अंतर बताइए।

उत्तर-अमाशय की दीवार की क्रमाकुंचन गति के कारण बनी भोजन की लुग्दी को काइम कहते हैं। यह अम्लीय प्रकृति का होता है, जबकि ग्रहणी की दीवार की क्रमाकुंचन गति के कारण बने पेस्ट को काइल कहते हैं। यह क्षारीय प्रकृति का होता है।

प्रश्न 77. अग्न्याशयी रस में उपस्थित चार प्रकीण्नों (एंजाइमों) के नाम बताइए।

उत्तर- (i) अग्न्याशयी एमाइलेज

(ii) अग्न्याशयी लाइपेज

(iii) ट्रिप्सिन

(iv) काइमोट्रिप्सिन

प्रश्न 78. आहार नाल के किस भाग में जल का सबसे अधिक अवशोषण होता है?

उत्तर-आहार नाल के बड़ी आंत में जल का सबसे अधिक अवशोषण होता है।

प्रश्न 79. कोई तीन पदार्थों के नाम बताइए जो यकृत में संचित होते हैं।

उत्तर-(i) शर्करा (ग्लाइकोज़न) (ii) लौह (ii) विटामिन ए, डी एवं बी.

प्रश्न 80. कौन-से पदार्थ शीघ्र ही आँत की कोशिकाओं द्वारा अवशोषित हो जाते हैं?

उत्तर-वसीय अम्ल तथा ग्लिसरॉल।

प्रश्न 81. पाचन किसे कहते हैं?

उत्तर-वह क्रिया जिसमें एंजाइमों की सहायता से जटिल भोज्य पदार्थों को सरल अणुओं में अपघटित किया जाता है, जिससे ये अवशोषित होकर हमारी कोशिकाओं में प्रवेश कर सकें, पाचन (Digestion) कहलाती है।

प्रश्न 82. स्वांगीकरण (Assimilation) क्या है?

उत्तर-अवशोषित भोज्य पदार्थ (पोषण तत्वों) का अंतिम रूप से सजीव पदार्थ में बदल जाना अर्थात् कोशिकाओं में उनका इस्तेमाल हो जाना ही स्वांगीकरण कहलाता है।

प्रश्न 83. बहिक्षेपण (Egestion) क्या है?

उत्तर-अपचित भोजन (undigested Food) को शरीर से बाहर निकालने की क्रिया को बहिक्षेपण (Egestion) कहते हैं।

प्रश्न 84. लार में उपस्थित लाइसोजाइम (Lysozyme) की क्या भूमिका है?

उत्तर-लाइसोजाइम भोजन में उपस्थित हानिकारक जीवाणओं को मारता है।

प्रश्न 85. छोटी आँत के दो कार्य लिखिए।

उत्तर-कार्य-(i) वसीय पदार्थों को अवशोषित करना।

(ii) इसके दीवार की श्लेष्मा ग्रंथियाँ भोजन को लसलसा बनाती हैं।

प्रश्न 86. आँत में विलाई पाये जाते हैं, लेकिन अमाशय में नहीं, क्यों?

उत्तर-आँत में पचे हुए भोजन के अवशोषण के कार्य को पूरा करने के लिए विलाई पाये जाते हैं। ये अवशोषण सतह को बढ़ाते हैं। आमाशय में अवशोषण का कार्य नहीं के बराबर होता है। इस कारण इसमें विलाई नहीं पाये जाते हैं।

प्रश्न 87. श्वसन किसे कहते हैं?

उत्तर-श्वसन जीवों में होने वाली एक ऑक्सीकरण क्रिया है, जिसमें जटिल कार्बनिक पदार्थों का ऑक्सीजन को उपस्थिति या अनुपस्थिति में अपघटन किया जाता है, जिसके फलस्वरूप जल CO2 तथा ऊर्जा मुक्त होती है। इसे निम्नलिखित समीकरण द्वारा दर्शाया जा सकता है-

C6H12O6 + 6O2 I 6CO2 + 6H2O + 673 K cal  ऊर्जा या 38ATP

प्रश्न 88. श्वसन कितने प्रकार का होता है?

उत्तर-ऑक्सीजन की उपस्थिति तथा अनुपस्थिति के आधार पर श्वसन दो प्रकार का होता है-

(i) ऑक्सीश्वसन (Aerobic respiration)।

(ii) अनॉक्सी श्वसन (Anaerobic respiration)।

प्रश्न 89. छः कार्बन वाले अणु का तीन कार्बन वाले अणु पायरूवेट में विखंडन कहाँ होता है?

उत्तर-कोशिका द्रव्य में।

प्रश्न 90. पायरूवेट किस में परिवर्तित हो सकता है?

उत्तर-इथेनॉल और CO2 में।

प्रश्न 91. ऑक्सी श्वसन किसे कहते हैं?

उत्तर-ऑक्सी श्वसन (Aerobic respiration)– यह वह श्वसन है, जिसमें भोज्य पदार्थों का ऑक्सीकरण ऑक्सीजन की उपस्थिति में पूर्णरूपेण CO2 तथा H2O में हो जाता है। इस श्वसन में अत्यधिक मात्रा में ऊर्जा उत्पन्न होती है। इसे निम्नलिखित समीकरण द्वारा व्यक्त करते हैं-

C6H12O6 + 602 I 6CO2 + 6H2O + 673 K cal ऊर्जा

प्रश्न 92. अनॉक्सी श्वसन किसे कहते हैं? समीकरण दीजिए।

उत्तर-अनॉक्सी श्वसन (Anerobic respiration) वह श्वसन है, जिसमें भोज्य पदार्थों का अपूर्ण ऑक्सीकरण ऑक्सीजन की अनुपस्थिति में होता है। इसमें अपेक्षाकृत कम ऊर्जा मुक्त होती है। इसे निम्नलिखित समीकरण से व्यक्त करते हैं-

C6H12O6 I 2CO2 + 2C2H5 OH + 21 K Cal ऊर्जा (2ATP)

प्रश्न 93. मनुष्य के मस्तिष्क में श्वसन केंद्र कहाँ स्थित होता है?

उत्तर-मनुष्य की श्वसन क्रिया को नियंत्रित करने वाला श्वसन केंद्र मेड्यूला आब्लांगेटा में स्थित होता है। प्रश्न 94. ATP क्या है?

उत्तर-ATP या एडिनोसिन ट्राइफॉस्फेट एक विशिष्ट यौगिक है, जो सभी जीवों की कोशिका में ऊर्जा का वाहक एवं संग्राहक है।

प्रश्न 95. NADP का पूरा नाम लिखिए।

उत्तर-NADP का पूरा नाम निकोटिमाइड एनिन डाइंयुक्लियोटाइड फॉस्फेट है।

प्रश्न 96. किसी ऐसे जंतु वर्ग का नाम बताइए जिसका रक्त (Blood) गैसीय आदान-प्रदान में भाग नहीं लेता है।

उत्तर-जंतुओं के कीट वर्ग (Class-Insecta Phylum-Arthropoda) में रक्त गैसीय आदान-प्रदान में भाना नहीं लेता है।

प्रश्न 97. ट्रेकिओल और ब्रैकिओल में अंतर बताइए।

उत्तर-कीटों (Insects) में पायी जाने वाली श्वास नली (ट्रैक्रिया) के सूक्ष्म शाखाओं को ट्रैकिओल कहते हैं, जबकि स्तनी वर्ग के फेफड़ों में पायी जाने वाली ब्रैंकस की सूक्ष्म शाखाओं को ब्रैंकिओल कहते हैं।

प्रश्न 98. त्वचा के द्वारा श्वसन करने वाले कोई तीन जंतुओं के नाम बताइए।

उत्तर-केंचुआ (Earthworm), जोंक (Leech), मेंढक (Frog)

 प्रश्न 99. ऑक्सी श्वसन का क्रेब चक्र कहाँ संपन्न होता है?

उत्तर-ऑक्सी श्वसन का क्रेब चक्र कोशिका द्रव्य में उपस्थित माइटोकाँड्रिया में संपन्न होता है।

प्रश्न 100. शरीर में ऑक्सीजन की कमी को क्या कहा जाता है?

उत्तर-शरीर में ऑक्सीजन की कमी को हाइपॉक्सिया (Hypoxia) कहते हैं। यह स्थिति ऊँचाई या वायुदाब में कमी या सायनाइड विषाक्कता के कारण होती है।

प्रश्न 101. श्वसन पदार्थ किसे कहते हैं?

उत्तर-श्वसन क्रिया में ऑक्सीकृत या अपघटित होने वाले पदार्थ को श्वसन पदार्थ (Respiratory Substrate कहते हैं।

प्रश्न 102. श्वसन पदार्थ का नाम बताइए।

उत्तर-ग्लूकोज़ (Glucose)।

प्रश्न 103. श्वसन के अंतिम उत्पाद क्या हैं?

उत्तर-श्वसन के अंतिम उत्पाद CO2 एवं H2O हैं।

प्रश्न 104. किण्वन क्या है?

उत्तर-वह रासायनिक क्रिया जिसमें सूक्ष्म जीव (यीस्ट) शर्करा का अपूर्ण विघटन करके CO2 तथा एल्कोहल ऐसीटिक अम्ल इत्यादि का निर्माण होता है, किण्वन (Fermentation) कहलाती है। इसमें कुछ ऊर्जा भी मुक्त होती है।

प्रश्न 105. ग्लाइकोलिसिस की प्रक्रिया में कितने A.T.P. अणओं का लाभ होता है?

उत्तर-ग्लाइकोलिसिस की प्रक्रिया में ATP के 2 अणुओं का लाभ होता है।

प्रश्न 106. कोशिकाओं की ऊर्जा किसे कहते हैं?

उत्तर-ATP को कोशिकीय ऊर्जा कहते हैं।

प्रश्न 107 वोकल काडर्स का क्या कार्य है?

उत्तर-वोकल काडर्स का कार्य ध्वनि उत्पन्न करना है।

प्रश्न 108. सामान्य अवस्था में मनुष्य कितनी बार साँस लेता है?

उत्तर-सामान्य अवस्था में मनुष्य प्रति मिनट 12 से 15 बार साँस लेता है।

प्रश्न 109. ATP का कार्य बताइए।

उत्तर-ATP का कार्य-

(i) यह कोशिकाओं के अंदर ऊर्जा का संवहन एवं संचयन करता है।

(i) विभिन्न रसायनों का संश्लेषण इन्हीं की सहायता से होता है।

(iii) यह कोशिका का प्रमुख अवयव है।

प्रश्न 110. श्वसन में मुख्यतः कौन-सी गैसें भाग लेती हैं?

उत्तर-श्वसन में मुख्यतः ऑक्सीजन (O2) कार्बन डाइऑक्साइड आदि गैसें भाग लेती हैं।

प्रश्न 111. हम साँस लेने के क्रम में कौन-सी गैस लेते हैं एवं छोड़ते हैं?

उत्तर-हम साँस लेने के क्रम में ऑक्सीजन गैस लेते हैं एवं कार्बन डाइऑक्साइड गैस छोड़ते हैं।

प्रश्न 112. जल-रंध्र किसे कहते हैं?

उत्तर-ये विशेष रचनाएँ जलीय पौधों या छायादार शाकीय पौधों में पाई जाती हैं। ये पत्तियों की शिराओं (Veins) के शीर्ष पर अति सूक्ष्म छिद्र के रूप में होती हैं जिसमें पानी बूंदों के रूप में निःस्राव होता है। इसी कारण इन्हें जलमुख या जलरंध्र (Water Stoma or Hydathodes) कहते हैं।

प्रश्न 113. छाल किसे कहते हैं?

उत्तर-छाल (Bark) वृक्षों की बाहरी, चिकनी या खुरदरी सतह जिसका निर्माण टूटी हुई बाह्य त्वचा हाइपोडर्मिस तथा कार्क स्तर से होता है, को छाल कहते हैं।

प्रश्न 114. प्राणियों के शरीर में एक स्थान से दूसरे तक भेजन को भेजना किस नाम से जाना जाता है? उत्तर-परिवहन।

प्रश्न 115. प्राणियों में परिवहन को किस तंत्र के द्वारा पूरा किया जाता है?

उत्तर-परिसंचरण तंत्र।

प्रश्न 116. पौधे पानी और खनिज कहाँ से प्राप्त करते हैं?

उत्तर-मिट्टी से।

प्रश्न 117. प्रकाश संश्लेषण क्रिया में पौधे भोजन बनाने के लिए किस का प्रयोग करते हैं?

उत्तर-कार्बन डाइऑक्साइड और पानी का।

प्रश्न 118. पौधे किन ऊतकों की सहायता से भोजन का परिवहन करते हैं?

उत्तर-ज़ाइलम और फ्लोएम ऊतकों का।

प्रश्न 119. जाइलम किसे कहते हैं?                                                                                          (H.P. 2010, Set-C)

उत्तर-ज़ाइलम मोटी दीवार वाले वे मृत ऊतक हैं जो पानी और खनिजों को जड से पौधों के अन्य भागों तक पहुंचाते हैं।

प्रश्न 120. फ्लोएम किसे कहते हैं?                                                                                           (H.P. 2010, Set-C)

उत्तर-फ्लोएम वे जीवित ऊतक हैं जो पत्तों से भोजन को पौधे के विभिन्न भागों तक पहुँचाते हैं।

प्रश्न 121. स्थानांतरण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर-यह पेड़-पौधों में भोजन को पत्तों से अन्य भागों तक पहुँचाने की पद्धति है।

प्रश्न 122. चालनी नलिका किसे कहते हैं?

उत्तर-फ्लोएम ऊतक के जीवित घटक को चालनी नलिका कहते हैं।

प्रश्न 123. मानव शरीर में किस-किस का परिवहन किया जाता है?

उत्तर-पचा हुआ भोजन, ऑक्सीजन, हार्मोन और उत्सर्जनीय अपशिष्ट पदार्थ।

प्रश्न 124. मनुष्य में संवहन का माध्यम क्या है?

उत्तर-रक्त और लसीका।

प्रश्न 125. रक्त से संबंधित रक्त वाहिनियों के नाम लिखिए।

उत्तर-(i) धमनियाँ, (ii) शिराएँ, (iii) कोशिकाएं।

प्रश्न 126. शरीर में रक्त को कौन गति प्रदान करता है?

उत्तर-हृदय।

प्रश्न 127. द्विगुण परिसंचरण में दो कौन-से परिसंचरण होते हैं?

उत्तर-(i) पल्मोनरी परिसंचरण, (ii) सिस्टेमिक परिसंचरण।

प्रश्न 128. हमारे शरीर में रुधिर किन-किन का वहन करता है?

उत्तर-भोजन, ऑक्सीजन और वज्र्य पदार्थों का।

प्रश्न 129.रुधिर क्या है?

उत्तर-एक तरल संयोजी ऊतक।

प्रश्न 130. रुधिर का तरल माध्यम क्या है?

उत्तर-प्लाज्मा।

प्रश्न 131. प्लाज्मा में कौन निलंबित होता है?

उत्तर-कोशिकाएँ।

प्रश्न 132. प्लाज्मा किस का वहन करता है?

उत्तर-प्लाज्मा भोजन, CO2 तथा नाइट्रोजनी वज्र्य पदार्थ का विलीन रूप में वहन करता है।

प्रश्न 133. लाल रुधिर कोशिकाएँ किसे ले जाती हैं?

उत्तर-ऑक्सीजन को।

प्रश्न 134. रुधिर को धकेलने वाला पंपन यंत्र कौन-सा है?

उत्तर-हृदय।

प्रश्न 135. हृदय कैसा अंग है?

उत्तर-हृदय एक पेशीय अंग है जो हमारी मुट्ठी के आकार का होता है जो ऑक्सीजन और कार्बन डाइऑक्साका का वहन करता है।

प्रश्न 136. मनुष्य में संवहन का माध्यम क्या है?

उत्तर-रक्त और लसीका।

प्रश्न 137. रक्त से संबंधित रक्त वाहिनियों के नाम लिखिए।

उत्तर-(i) धमनियाँ, (ii) शिराएँ, (iii) केशिकाएं।

प्रश्न 138. शरीर में रक्त को कौन गति प्रदान करता है?

उत्तर-हृदय।

प्रश्न 139. द्वविगुण परिसंचरण में दो कौन-से परिसंचरण होते हैं?

उत्तर-(i) पल्मोनरी परिसंचरण, (ii) सिस्टेमिक परिसंचरण।

प्रश्न 140. शरीर में हानिकारक जीवाणुओं को नष्ट कौन करता है?

उत्तर-श्वेत रक्त कणिकाएँ (W.B.C.)।

प्रश्न 141. शरीर की टूटी-फूटी या मृत कोशिकाओं का भक्षण कहाँ होता है?

उत्तर-यकृत और प्लीहा में।

प्रश्न 142. प्लाज्मा क्या है?

उत्तर-प्लाज़्मा रंगहीन चिपचिपा पदार्थ है जिसमें अधिक पानी और प्रोटीन होते हैं।

प्रश्न 143. रक्त प्लेटलेट्स किसे कहते हैं?

उत्तर-यह केंद्रक से रहित कणिका युक्त जीवद्रव्य है जो रक्त को जमा कर थक्का बनाने में सहायता करता है।

प्रश्न 144. रक्त कोशिकाओं की रचना कहाँ होती है?

उत्तर-अस्थि मज्जा में।

प्रश्न 145. रक्त-दबाव मापने वाले यंत्र का नाम लिखिए।

उत्तर-स्फिग्मोमैनोमीटर (Sphygmomanometer)|

प्रश्न 146. कौन-सी धमनी अशुद्ध रक्त को फेफड़ों तक पहुँचाती है?

उत्तर-फुफ्फुस धमनी (Pulmonary Artery)।

प्रश्न 147. ECG का पूरा नाम लिखिए।                                                                     (H.P. 2010, Set-B, 2013 Set-A)

उत्तर-इलैक्ट्रो कार्डियो ग्राम।

प्रश्न 148. ECG किस लिए प्रयुक्त किया जाता है?

उत्तर-हृदय की प्रसमता को मापने के लिए।

प्रश्न 149. सामान्य रक्त दाब कितना होता है?                                                         (H.P. 2013, Set-B)

उत्तर-सामान्य रक्त दाब 120/80 होता है।

सिस्टॉलिक = 120

डायस्टॉलिक = 80

प्रश्न 150. लसिका का दूसरा नाम क्या है?

उत्तर-बाह्य कोशिका द्रव्य।

प्रश्न 151. मानव शरीर की सबसे बड़ी धमनी का नाम लिखिए।

उत्तर-महाधमनी (Aorta)।

प्रश्न 152. उत्सर्जन किसे कहते हैं?

उत्तर-शरीर से अपशिष्ट पदार्थ बाहर निकालने की प्रक्रिया को उत्सर्जन कहते हैं।

प्रश्न 153. उत्सर्जन प्रक्रिया को कौन-सा तंत्र कराता है?

उत्तर-मूत्र तंत्र या उत्सर्जी तंत्र।

प्रश्न 154. एक कोशिका में उत्सर्जन कहाँ से होता है?

उत्तर-कुंचनशील धमनी से।

प्रश्न 155. प्रत्येक गुर्दे में कितने नेफ्रॉन होते हैं?

उत्तर-लगभग 10 लाख।

प्रश्न 156. मानव शरीर में कितने गुर्दे होते हैं? ये कहाँ होते हैं?                                                 (H.P. 2010)

उत्तर-दो गुर्दे उदर गुहा में रीढ़ की हड्डी के दोनों ओर एक-एक गुर्दा होता है।

प्रश्न 157. गुर्दे क्या काम करते हैं?

उत्तर-गुर्दे शरीर से अनावश्यक पदार्थों को बाहर निकालते हैं तथा पानी, लवण, अम्ल-क्षार का संतुलन बनाए रखते हैं।

प्रश्न 158. गुर्दो में रक्त प्रवाह की कमी से क्या होगा?

उत्तर-गुर्दो का क्षय हो जाएगा।

प्रश्न 159. कृत्रिम गुर्दे के द्वारा क्या किया जाता है?

उत्तर-कृत्रिम गुर्दे के द्वारा यूरिया तथा अन्य उत्सर्जी पदार्थों को बाहर निकाल दिया जाता है।

प्रश्न 160. विसरण किसे कहते हैं?

उत्तर-विसरण (Diffusion) यह वह क्रिया है जिसमें उच्च सांद्रता क्षेत्र से निम्न सांद्रता की ओर आयनों अणुओं का अभिगमन होता है। विसरण में अर्धपारगम्य झिल्ली से होकर अभिगमन नहीं होता है। यह क्रिया ठोस, द्रव और गैस तीनों में हो सकती है।

प्रश्न 161. पदार्थों का परिवहन पौधों में कितने प्रकार से होता है?

उत्तर-पदार्थों का परिवहन पौधों में तीन प्रकार से होता है-

(1) दाब बहाव विधि, (2) सक्रिय क्रिया विधि, (3) विसरण परिकल्पना।

प्रश्न 162. रसाकर्षण से आप क्या समझते हैं?

उत्तर-जब दो विभिन्न सांद्रता वाले घोलों को एक अर्धपारगम्य झिल्ली द्वारा अलग कर दिया जाता है तो कम सांद्रता वाले घोल से पानी या अन्य घोलक अधिक सांद्रता वाले घोल की ओर झिल्ली से होकर विसरण करने लगते हैं, इस क्रिया को रसाकर्षण या परासरण कहते हैं।

प्रश्न 163. पौधों में रसाकर्षण के महत्त्व को समझाइए।

उत्तर-पौधों में मूलरोम (Root Hairs) भूमि से पानी का अवशोषण रसाकर्षण द्वारा पैदा करते हैं।

प्रश्न 164. सीरम का क्या महत्त्व है?

उत्तर-चोट लगने के कुछ देर बाद रक्त का जो थक्का बना होता है वह थक्का सिकुड़ने लगता है और उससे हल्के पीले रंग का द्रव सीरम बाहर निकल आता है। सीरम में रुधिराणुओं रहित प्लाज्मा होता है। सीरम के सूखने पर रुधिर का पूर्ण थक्का बन जाता है।

प्रश्न 165. लसिका किसे कहते हैं?

उत्तर-रुधिर से छनकर बनने वाले पदार्थ जो कि ऊतक द्रव्य की तरह रहता है, उसे लसिका (Lymph) कहते हैं।

प्रश्न 166. श्वेत रक्त कणिकाओं का महत्त्व लिखिए।

उत्तर-श्वेत रक्त कणिकाएँ (W.B.C.) हानिकारक बैक्टीरिया एवं मृत कोशिकाओं का भक्षण करके उन्हें नष्ट कर देती हैं और संक्रमण तथा आघातों से शरीर की रक्षा करती हैं।

प्रश्न 167. हीमोग्लोबिन में पाए जाने वाले तत्व का नाम लिखिए।

उत्तर-रासायनिक रूप में हीमोग्लोबिन आयरन एवं प्रोटीन से बना होता है। इसका प्रमुख कार्य श्वसन क्रिया में ऑक्सीजन एवं कार्बन डाइऑक्साइड का परिवहन करना होता है।

प्रश्न 168. पौधों में जल का स्थानांतरण किन ऊतकों के द्वारा होता है?

उत्तर-पौधों में जल का स्थानांतरण जाइलम ऊतकों के द्वारा होता है।

प्रश्न 169. अवशोषण की क्रिया सबसे अधिक मात्रा में जड़ के मूलरोम प्रदेश में क्यों की जाती है?

उत्तर-अवशोषण की क्रिया सबसे अधिक मात्रा में जड़ के मूलरोम (Root Hairs) प्रदेश से इसलिए होती है क्योंकि मूलरोम जड़ के अवशोषण क्षेत्र को हज़ारों गुना बढ़ा देते हैं।

प्रश्न 170. वाष्पोत्सर्जन क्या है?

उत्तर-वाष्पोत्सर्जन एक जैविक क्रिया है। इस क्रिया में पानी पौधों के वायवीय भागों से वाष्प के रूप में बाहर निकलता है। यह क्रिया रक्षक कोशिकाओं के द्वारा बाहर निकलती है।

प्रश्न 171. मनुष्य का वृक्क कौन-से आकार का होता है?

उत्तर-मनुष्य का वृक्क ‘सेम के बीज’ के आकार का होता है।

प्रश्न 172. हीमोडायलिसिस क्या है?

उत्तर-जब वृक्क ठीक से कार्य नहीं कर पाता है तब शरीर के रुधिर में यूरिया की मात्रा अचानक बढ़ जाती है। ऐसे रोगियों की रुधिर यूरिया तथा अन्य उत्सर्जी पदार्थों को एक उपकरण जिसे कृत्रिम गुर्दा कहते हैं के द्वारा हटाया जाता है, इस क्रिया को हीमोडायलिसिस कहते हैं।

प्रश्न 173. उस हॉर्मोन का नाम बताइये, जो नेफ्रॉन में मूत्र निर्माण को नियंत्रित करता है।

उत्तर-वेसोप्रेसिन।

प्रश्न 174. उत्सर्जन से क्या समझते हैं?

उत्तर-जीवधारियों के शरीर में उपापचय क्रियाओं के फलस्वरूप बनने वाले हानिकारक, विषाक्त व व्यर्थ पदार्थों को शरीर से बाहर निकलने की क्रिया को उत्सर्जन (Excretion) कहते हैं। इस क्रिया द्वारा शरीर से बाहर निकलने वाले हानिकारक व व्यर्थ पदार्थों को उत्सर्जी पदार्थ (Excreta) कहते हैं।

प्रश्न 175. वृक्क के अतिरिक्त जंतुओं (मनुष्यों) में अन्य उत्सर्जी अंगों के नाम लिखिए।

उत्तर-(i) यकृत, (ii) फेफड़े, (iii) त्वचा।

प्रश्न 176. मूत्र निर्माण की प्रमुख प्रक्रियाएँ कौन-कौन सी हैं?

उत्तर-मूत्र निर्माण की तीन प्रमुख प्रक्रियाएँ हैं-(a) अतिसूक्ष्म छानन, (b) पुन:अवशोषण, (c) स्रावण।

प्रश्न 177. यकृत उत्सर्जन में किस प्रकार सहायक हैं?

उत्तर-यकृत उपापचय क्रियाओं द्वारा बनी अमोनिया जोकि शरीर के लिए हानिकारक होती है, को अपेक्षाकृत कम हानिकारक यूरिया में बदल देता है।

प्रश्न 178. मानव त्वचा किस प्रकार सहायक उत्सर्जी अंग का कार्य करती है?

उत्तर-मनुष्य की त्वचा में तैलीय (Sebaceous) तथा स्वेद ग्रंथियाँ (Sweat glands) पायी जाती हैं। ये ग्रंथियाँ अपने स्रावों सीबम (Sebum) तथा पसीने के साथ कुछ उत्सर्जी पदार्थों को भी शरीर से बाहर करती हैं। इस कारण त्वचा को उत्सर्जी अंग कहते हैं।

प्रश्न 179. पादप उत्सर्जन के अंतर्गत ऑक्सीजन को क्या कह सकते हैं?

उत्तर-प्रकाश संश्लेषण में जनित ऑक्सीजन को अपशिष्ट उत्पाद कह सकते हैं।

प्रश्न 180. अनेक पादप कोशिकीय रिक्तिका में किस का संचय करते हैं?

उत्तर-अपने अपशिष्ट उत्पादों का।

प्रश्न 181. रेज़िन और गोंद को पादप कहाँ संचित करते हैं?

उत्तर-पुराने ज़ाइलम में।

प्रश्न 182. पादप कुछ अपशिष्ट मिट्टी में कहाँ उत्सर्जित करते हैं?

उत्तर-अपने आस-पास की मिट्टी में।

प्रश्न 183. क्षुद्रांत्र में भोजन के किन अवयवों का पूर्ण पाचन होता है?    (H.P. Model p. Paper 2009)

उत्तर-प्रोटीन, कार्बोहाइड्रेट और वसा।

प्रश्न 184. मनुष्य में वृक्क एक तंत्र के भाग हैं, जो ……….. से संबंधित है।       (H.P. 2009, Set-A)

उत्तर-उत्सर्जन तंत्र।

प्रश्न 185. पादप में जाइलम ………….. के लिए उत्तरदायी है।                                 (H.P. 2009, Set-B)

उत्तर-जल के वहन।

प्रश्न 186. सूर्य से ग्रहण की हुई ऊर्जा को संरक्षित करने वाले आवश्यक रंजक का नाम बताइए।

(H.P. 2009, Set-B)

उत्तर-क्लोरोफिल।

प्रश्न 187. पायरूबेट के विखंडन से यह कार्बन डाइऑक्साइड, जल और ऊर्जा देता है। यह क्रिया………... में होती है।                                                                                                                                       (H.P. 2009, Set-C)

उत्तर-माइटोकांड्रिया।

प्रश्न 188. तरल पदार्थों के उत्सर्जन के लिए शरीर में कौन-सा विशेष अंग पाया जाता है?

(H.P. 2009, Set-B)

उत्तर-गुर्दे।

प्रश्न 189. मनुष्य वृक्क एक तंत्र का भाग है जो ……… से संबंधित है।                             (H.P. 2014 Set-B)

उत्तर-उत्सर्जन क्रिया।

बहु-विकल्पी प्रश्नोत्तर

(Multiple Choice Questions)

  1. वे सभी प्रक्रम जो सम्मिलित रूप से अनुरक्षण का कार्य करते हैं, उन्हें क्या कहते हैं?

(A) जैव प्रक्रम                  (B) श्वसन

(C) उत्सर्जन                       (D) उपरोक्त सभी।

  1. शरीर के बाहर से ऑक्सीजन को ग्रहण करना तथा कोशिकीय आवश्यकता के अनुसार खाद्य स्रोत के

विघटन में उसका उपयोग क्या कहलाता है?

(A) जैव प्रक्रम                 (B) श्वसन

(C) उत्सर्जन                       (D) उपरोक्त सभी।

  1. अपशिष्ट उपोत्पादों को शरीर से बाहर निकालने की प्रक्रिया को क्या कहते हैं?

(A) जैव-प्रक्रम                   (B) श्वसन

(C) उत्सर्जन                       (D) उपरोक्त सभी।

  1. स्वपोषी जीव की कार्बन तथा ऊर्जा की आवश्यकताएँ किस प्रकार पूरी होती हैं?

(A) जैव-प्रक्रमा                  (B) प्रकाश संश्लेषणीय

(C) उत्सर्जन                       (D) श्वसन।

  1. आहार नाल मूल रूप से मुंह से कहाँ तक विकसित है?

(A) गुदा                               (B) गुदा

(C) पैर                                  (D) पेट

  1. निम्नलिखित में से कौन-सा एककोशिक जीव है?

(A) अमीबा                         (B) पैरामीशियम

(C) युग्लीना                        (D) ये सभी।

  1. लाला ग्रंथि से निकलने वाले रस को क्या कहते हैं?

(A) एंजाइम                        (B) प्रोटीन

(C) बाइल जूस                  (D) लार।

  1. लार में कौन-सा एंजाइम होता है?

(A) लार एमिलेस             (B) पेप्सिन

(C) श्लेष्मा                          (D) उपरोक्त सभी।

  1. आमाशय से भोजन कहाँ प्रवेश करता है?

(A) क्षुद्रांत्र                           (B) यकृत

(C) परिशेपिका                  (D) पित्ता।

  1. हृदय का आकार कितना होता है?

(A) पैर                                (B) हाथ

(C) मुट्ठी                               (D) पेट।

  1. सामान्य प्रकुंचन दाब कितना होता है?

(A) 100 mm                       (B) 115 mm

(C) 125 mm                       (D) 120 mm.

  1. अनुशिथिलन दाब लगभग कितना होता है?

(A) 40 mm                         (B) 60 mm

(C) 180 mm                       (D) 80 mm.

  1. अधिकतर पेड़-पौधे होते हैं

                (A) स्वपोषी                        (B) परपोषी

(C) विषम पोषी                (D) ये सभी।

  1. जीवों के द्वारा उपयोग में लाए जाने वाले जैव-उत्प्रेरकों को कहते हैं

(A) हॉर्मोन                          (B) रस

(C) एंजाइम                        (D) संश्लिष्ट पदार्थ।

  1. पादपों में जो कार्बोहाइड्रेट तुरंत प्रयुक्त नहीं होते उन्हें किस रूप में संचित कर लिया जाता है?

(A) प्रोटीन                           (B) मंड

(C) वसा                               (D) रूक्षांश।

  1. शरीर में ग्लाइकोजन के रूप में क्या संचित होता है?

(A) खाये गए भोजन से उत्पन्न कुछ ऊर्जाक

(B) रक्त के दवारा प्रदान की गई ऑक्सीजन

(C) श्वसन के द्वारा प्राप्त कार्बन-डाइऑक्साइड और ऑक्सीजन का मिश्रण

(D) क्षुद्रांत्र द्वारा अवशोषित वसा।

  1. क्लोरोफिल किन में होती है?

(A) क्लोरोप्लास्ट              (B) माइटोकांड्रिया

(C) राइबोसोम                    (D) रिक्तिकाएं।

  1. पादप किस तत्व का उपयोग प्रोटीन तथा अन्य यौगिकों के संश्लेषण में करते हैं?

(A) लोहा                              (B) ऑक्सीजन

(C) नाइट्रोजन                    (D) फॉस्फोरस।

  1. पादप फॉस्फोरस, लोहा, मैग्नीशियम आदि कहाँ से प्राप्त करते हैं?

(A) वायु से                         (B) जल से

(C) मिट्टी से                       (D) उर्वरकों से।

  1. अमर बेल, किलनी, जूं, लीच, फीता कृमि आदि किससे पोषक प्राप्त करते हैं?

(A) पौधों और जंतुओं को बिना मारे

(B) पौधों और जीवों के स्राव से

(C) मिट्टी से

(D) पौधों और जंतुओं को मारने से।

  1. मानव आमाशय में कौन-सा अम्ल उत्पन्न होता है?

(A) सल्फ्यूरिक अम्ल    (B) नाइट्रिक अम्ल

(C) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल (D) सिटरिक अम्ल।

  1. क्षुद्रांत्र में वसा किस रूप में होती है?

(A) टुकड़ों                            (B) द्रव

(C) ठोस गोले                    (D) बड़ी गोलिकाओं।

  1. क्षुद्रांत्र के आंतरिक आस्तर पर किस जैसे प्रवर्धा होते हैं?

(A) अंगुली                          (B) हाथ

(C) मुट्ठी                               (D) पैर।

  1. आमाशय आकार की दृष्टि से कैसा अंग है?

(A) लघु                                (B) मध्यम

(C) बृहत                              (D) अति बृहत।

  1. घास खाने वाले प्राणियों की क्षुद्रांत्र कैसी होती है?

(A) छोटी                             (B) मध्यम

(C) बड़ी                                (D) नगण्य।

  1. आमाशय को भीतरी आस्तर की हाइड्रोक्लोरिक अम्ल से रक्षा करता है-

(A) एमाइलॉप्सिन            (B) श्लेष्मा

(C) लार सेमिलेस             (D) पित्तरस।

  1. निम्नलिखित में रिक्त स्थानों की पूर्ति करो

(i) ……….. श्वसन से जीवन को अधिक ऊर्जा प्राप्त होती है।

(ii) वृक्क उदर में ………… की हड्डी के दोनों ओर स्थित होता है।

(iii) फुफ्फुस में ………… रुधिर से अलग हो जाती है।

(iv) सुक्रोज सरीखे पदार्थ फलोएम ऊतक में ………….. से प्राप्त ऊर्जा के उपयोग से पूरा होता है।

(v) रुधिर वाहिकाओं की भित्ति के विरुद्ध जो दाब लगता है उसे ……….. कहते हैं।

(vi) धमनी के अंदर रुधिर का दाब निलय प्रकुंचन के दौरान ……… दाब कहलाता है।

(vii) हृदय का दायाँ और बायाँ बँटवारा …………. तथा …………. रुधिर को मिलने से रोकने में लाभदायक होता है।

(viii) ………… अन्य प्रकार का द्रव है जो वहन में भी सहायता करता है।

उत्तर

  1. (A) जैव प्रक्रम, 2. (B) श्वसन, 3. (C) उत्सर्जन,                     4. (B) प्रकाश संश्लेषण,
  2. (A) गुदा, 6. (D) ये सभी, 7. (D) लार,                         8. (A) लार एमिलेस,
  3. (A) क्षुद्रांत्र, 10. (C) मुट्ठी, 11. (D) 120 mm,              12. (D) 80 mm,
  4. (A) स्वपोषी, 14. (C) एंजाइम, 15. (B) मंड,
  5. (A) खाये गए भोजन से उत्पन्न कुछ ऊर्जा, 17. (A) क्लोरोप्लास्ट, 18. (C) नाइट्रोजन,
  6. (C) मिट्टी से, 20. (A) पौधों और जंतुओं को बिना मारे, 21. (C) हाइड्रोक्लोरिक अम्ल,
  7. (D) बड़ी गेलिकाओं 23. (A) अंगुली, 24. (C) बृहत,                      25. (C) बड़ी,
  8. (B) श्लेष्मा,
  9. (i) वायवीय, (ii) रीढ़, (iii) CO2, (iv) ए० टी० पी०, (v) रक्त दाब, (vi) संकुचन, (vii) ऑक्सीजनित, विऑक्सीजनित, (viii) लसीका।

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