सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर डेयरी फार्मिंग से जुड़ रहे युवा, कमा रहे लाखों

नाबार्ड के तहत डेयरी के लिए सरकार दे रही सब्सिडी

सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर डेयरी फार्मिंग से जुड़ रहे युवा, कमा रहे लाखों

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ऊना। प्रदेश सरकार की विभिन्न योजनाओं का लाभ उठाकर अनेकों किसानों को आय का अच्छा साधन मिल रहा है। कड़ी मेहनत व प्रदेश सरकार की योजनाओं ने इन किसानों को सफलता की राह दिखाई है जिससे आज युवा वर्ग भी प्रभावित हो रहा है। जिला के किसान डेयरी फार्मिंग से जुड़ रहे हैं और लाखों की कमाई भी कर रहे हैं। ईसपुर निवासी यादविंदर पाल वर्ष 2015 में डेयरी फार्मिंग (animal farming) से जुड़े थे, जिन्होंने नाबार्ड के तहत 5.22 लाख रुपये का ऋण लिया था। इस पर उन्हें 35 प्रतिशत सब्सिडी मिली और 1.35 लाख रुपये सब्सिडी (Subsidy) के तौर पर मिले।


वर्तमान में यादविंदर कड़ी मेहनत से प्रतिमाह लगभग अढ़ाई लाख रुपए का दूध बेच रहे हैं। कृष्णा डेयरी नाम से उन्होंने 40 कनाल भूमि पर फार्म स्थापित किया और आज उनके पास कुल 27 गाय व भैंसें हैं। प्रतिदिन वह अपने इस डेयरी फार्म से लगभग सवा दो क्विंटल दूध बेच रहे हैं। यादविंदर पाल का कहना है कि डेयरी फार्मिंग (animal farming) का व्यवसाय बहुत ही अच्छा है, लेकिन मेहनत से ही सफलता प्राप्त की जा सकती है। नाबार्ड से मिला लोन वह पूरा चुकता कर चुके हैं, साथ ही उन्होंने बताया कि पशु पालन विभाग के अधिकारी उन्हें उनके काम में भरपूर सहायता कर रहे हैं।

इसी तरह लोअर बढेड़ा के अजय कुमार चंदेल भी आधुनिक डेयरी फार्म का संचालन सफलतापूर्वक कर रहे हैं। वह एमबीए फाइनेंस करने के बाद दिल्ली में नौकरी करने लगे और एक वर्ष पहले उन्होंने लोअर बढेड़ा में अपने गांव वापिस आकर डेयरी फार्म खोला। आज उनके डेयरी फार्म में 11 बड़े तथा 8 छोटे पशु हैं। रोजाना दूध का उत्पादन एक क्विंटल (Quintal) है और सीजन आने पर उत्पादन बढ़कर अढ़ाई क्विंटल तक पहुंच जाता है। वह वेरका कंपनी को को भी दूध बेचते हैं। अजय कुमार चंदेल ने कहा कि डेयरी फार्मिंग में अच्छा मुनाफा है, लेकिन युवाओं को इस काम में संयम रखने व मेहनत करने की आवश्यकता है। बिना मेहनत कुछ भी हासिल नहीं किया जा सकता है। इस काम में पशु पालन विभाग के अधिकारियों ने उनकी भरपूर मदद की। यही नहीं विभाग ने उन्हें दुधारू गायों की विभिन्न नस्लों के बारे में विस्तृत जानकारी प्रदान की।

वरिष्ठ पशु चिकित्सा अधिकारी ऊना डॉ. राकेश भट्टी ने कहा कि नाबार्ड (NABARD) के तहत सरकार डेयरी के लिए अधिकतम 10 लाख रुपये तक का ऋण प्रदान करती है। इसमें सामान्य वर्ग के लिए 25 प्रतिशत तथा एससी-एसटी के लिए 35 प्रतिशत सब्सिडी उपलब्ध करवाई जाती है। उन्होंने कहा कि जिला ऊना में डेयरी फार्मिंग के प्रति युवाओं का रुझान बढ़ा है और पढ़ा-लिखा वर्ग भी पशु पालन के माध्यम से जुड़ रहा है। पशु पालन मंत्री वीरेंद्र कंवर ने कहा कि प्रदेश सरकार ऊना जिला को पशुपालन का हब बनाने के प्रयास कर रही है। पशु गणना के नए आंकड़ों से साफ पता चलता है कि जिला ऊना के किसान पशु पालन में रुचि दिखा रही हैं। यही नहीं बकरी और भेड़ों की संख्या के हिसाब से हिमाचल प्रदेश पूरे उत्तर भारत में सबसे आगे है। उन्होंने किसान को उन्नत नस्ल के पशु पालने का कहा ताकि उन्हें अच्छा लाभ मिल सके और उनकी आय बढ़ सके।

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