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विधानसभा चुनावः कांटे का रहा मुकाबला, 0.10 फीसदी से टूटा Record

विधानसभा चुनावः कांटे का रहा मुकाबला, 0.10 फीसदी से टूटा Record

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कांगड़ा। एक तरफ जहां विधानसभा चुनाव में कांग्रेस व बीजेपी के बीच कांटे की टक्कर रही, वहीं मतदान करने में भी मुकाबला कड़ा रहा है। इस बार 0.10 फीसदी से पिछला रिकॉर्ड टूटा है। इस बार हिमाचल में वोट प्रतिशतता 74.61 फीसदी रही है, जबकि वर्ष 2003 में यह प्रतिशतता 74.51 थी। हालांकि इस बार चुनाव आयोग सौ फीसदी मतदान का रिकॉर्ड तो नहीं बना पाया, लेकिन सबसे अधिक मतदान करने का वर्ष 2003 का रिकॉर्ड आवश्य ही टूटा है। 2007 में मतदान करीब तीन फीसदी कम होकर 71.61 फीसदी रहा था, लेकिन 2012 में फिर इसमें बढ़ोतरी हुई और यह बढ़कर 73.51 फीसदी दर्ज किया गया था। पर वर्ष 2003 का रिकॉर्ड पिछले विस चुनाव में भी टूट नहीं पाया है।

चुनाव आयोग से मिली जानकारी के अनुसार सिरमौर जिला मतदान में सिरमौर रहा है और यहां पर सर्वाधिक 81.05 फीसदी वोटिंग हुई है व सबसे कम हमीरपुर जिला में 70.19 फीसदी वोट दर्ज किए गए हैं। सोलन जिला की दून विधानसभा क्षेत्र में सबसे अधिक 88.95 फीसदी मतदान हुआ है और शिमला शहरी में सबसे कम 63.76 फीसदी ने वोट डालें हैं। चंबा जिला की बात करें तो यहां पर 73.21, कांगड़ा में 72.47, लाहौल स्पीति में 73.40, कुल्लू में 77.87, मंडी में 75.21, ऊना में 76.45, बिलासपुर में 82.04, सोलन में 77.44, शिमला में 72.68 व किन्नौर में 75.09 फीसदी तक मतदान दर्ज किया गया है।

जनता किसे सौंपती सत्ता की चाबी देखना बाकि

वर्ष 1971 में सबसे कम 49.45 फीसदी मतदान हुआ था और कांग्रेस सरकार सत्ता में आई थी। 1977 में 58.57 फीसदी मतदान दर्ज किया गया था और इस बार जनसंघ ने सरकार बनाई थी। 1982 में प्रदेश में खूब वोट बरसे और 71.06 फीसदी लोगों ने मतदान का प्रयोग कर कांग्रेस सरकार को सत्ता सौंपी। इसके बाद 1985 में भी वोट प्रतिशतता 70 फीसदी से अधिक रही और एक बार फिर कांग्रेस सत्तासीन हुई। वर्ष 1990 में सत्ता परिवर्तन हुआ था और बीजेपी की सरकार बनी थी। इस वर्ष मतदान प्रतिशतता 67.06 ही रह गई। 1993 के चुनाव में एक बार फिर 70 से अधिक वोटिंग हुई और कांग्रेस सरकार सत्ता में आई। वीरभद्र सिंह एक बार फिर सीएम बने। 1998 में भी 71.23 फीसदी मतदान दर्ज हुआ और इस बार हिविका की मदद से बीजेपी ने सरकार बनाई।

पांच वर्ष बाद 2003 में हुए चुनाव में मतदान का पिछला रिकॉर्ड टूटा और 74.51 फीसदी मतदान इस वर्ष हुआ। प्रदेश की जनता ने कांग्रेस को एक बार फिर सत्ता की चाबी सौंपी। 2007 में मतदान करीब तीन फीसदी कम होकर 71.61 फीसदी रहा गया था और बीजेपी की सरकार प्रदेश में बनी थी। 2012 में एक बार फिर मतदान प्रतिशतता में इजाफा हुआ और कांग्रेस सत्तासीन हुई। इस बार भी बंपर वोटिंग प्रदेश में हुई है और देखना यह बाकि है कि इस बार जनता ने सत्ता किसे सौंपी है। इसके लिए 18 दिसंबर तक का इंजतार करना होगा।

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