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नामुमकिन हुआ मुमकिनः चंद घंटों में मनाली से पहुंच सकेंगे कारगिल

नामुमकिन हुआ मुमकिनः चंद घंटों में मनाली से पहुंच सकेंगे कारगिल

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कुल्लू। मनाली से कारगिल (Kargil) अब चंद घंटों में ही पहुंचा जा सकेगा। बॉर्डर रोड ऑर्गेनाइजेशन (बीआरओ) ने इस कठिन सफर को आसान बनाने के लिए एक और बड़ी उपलब्धि अपने नाम कर ली है। बीआरओ ने जास्कर को वाया शिंकुला पास होते हुए मनाली से जोड़ दिया है। जास्कर पहुंचने के लिए लेह (Leh) होते हुए 850 किमी का सफर 4 दिन में तय करना पड़ता था। अब मनाली से करगिल (Kargil) की दूरी 273 किमी रह गई है। ऐसे में भारतीय सेना अब चंद घंटों में ही मनाली से करगिल की वादियों में पहुंच सकेगी। जास्कर के हर गांव में जश्न का माहौल है।


वहीं, मनाली से तीन युवकों ने एक ही दिन में गाड़ी से 16,600 फीट ऊंचा शिंकुला दर्रा पार कर जास्कर पहुंच कर इतिहास में नाम दर्ज करवा लिया है। सीमा सड़क संगठन (बीआरओ) ने मनाली के तीनों युवाओं को बधाई दी है। साथ ही जास्कर के हर गांवों में युवाओं का गर्मजोशी के साथ स्वागत किया गया। मनाली के युवा फॉर्च्यूनर गाड़ी लेकर सुबह 7 बजे मनाली से निकले थे और 3:30 बजे शिंकुला दर्रा पार कर के 4:15 बजे शिंकुला की दूसरी तरफ लखांग पहुंचे। युवाओं ने फोन पर बताया कि घाटी के पहले गांव करग्याख शाम 6 बजे पहुंचे, जहां लोगों ने उनका स्वागत किया।

 

कारगे नाले में 160 फीट लंबा बैली पुल तैयार

बता दें कि बीआरओ (BRO) ने पिछले साल ही कारगे नाले में 160 फीट लंबा बैली पुल तैयार कर कारगे गांव को जास्कर वैली से जोड़ दिया था। हालांकि सर्दियों में शिंकुला दर्रे के बंद रहने के कारण मनाली-जास्कर मार्ग पर वाहनों की आवाजाही सुचारू नहीं रहेगी, लेकिन इस सड़क के बन जाने से भारतीय सेना की राहें आसान हो गई हैं। लद्दाख की जास्कर घाटी के हर गांवों में इन दिनों त्यौहार जैसा माहौल है। मनाली के तीन युवाओं ने शिंकुला दर्रा पार कर जहां सबसे पहले गाड़ी को जास्कर के मुख्यालय पदुम पहुंचाने का रिकॉर्ड बनाया है। लद्दाख को यूटी बनाने के बाद यहां के लोगों को एक और अच्छी खबर सुनने को मिली है।

 

तीनों युवाओं ने गाड़ी से शिंकुला से जास्कर पहुंच कर इतिहास बनाया

स्थानीय लोगों और बीआरओ (BRO) के अधिकारियों के अनुसार इस से पहले कुछ गाड़ियां लखांग तक तो आई थीं, लेकिन ये पहली बार है कि कोई गाड़ी लाहुल के दारचा से चलते हुए व शिंकुला दर्रा पार कर जास्कर पहुंची हो। 38 बॉर्डर रॉड टास्क फोर्स के कमांडर कर्नल उमा शंकर ने बताया कि तीनों युवाओं ने गाड़ी से शिंकुला से जास्कर पहुंच कर इतिहास में अपना नाम दर्ज करवा लिया है। उन्होंने बताया कि दारचा शिंकुला सड़क को चौड़ा व पक्का करने का काम युद्धस्तर पर चला हुआ है। जास्कर स्थित बीआरओ (BRO) की 126 आरसीसी के सेकेंड कमांडिंग ऑफिसर आशीष रंजन ने कहा कि वे इन युवाओं से मिले और उन्हें इस सड़क मार्ग को सर्वप्रथम पार करने का गौरव प्राप्त करने के लिए बधाई दी। उन्होंने बताया कि पदुम-शिंकुला सड़क पर कई स्टेज में जगह-जगह काम चला रहा है।

बीआरओ 70 आरसीसी ने 10 साल पहले लाहुल के दारचा से शकुला तक सड़क बनाने का कार्य शुरू किया था। बीआरओ से पहले टुलकु लामा ने दारचा पदम सड़क का सपना देखा था और अपने स्तर पर काम भी शुरू कर दिया था। शिंकुला दर्रे में टनल बनते ही जांस्कर घाटी 12 महीने खुली रहेगी। बीआरओ चीफ इंजीनियर डीके त्यागी ने बताया कि बीआरओ सीमावर्ती क्षेत्रों की दूरी घटाकर देश की राहें आसान करने का यथासंभव प्रयास कर रहा है।

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