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बुलेटप्रूफ जैकेट से क्यों आर-पार नहीं होती गोली, ऐसे की जाती है तैयार

14 किलोग्राम से 16 किलोग्राम तक होता है बुलेट प्रूफ जैकेट का वजन

बुलेटप्रूफ जैकेट से क्यों आर-पार नहीं होती गोली, ऐसे की जाती है तैयार

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दुनिया भर में कहीं तरह के कपड़े मिलते हैं, लेकिन हर किसी देश की सेना व सुरक्षा बलों के जवान ऑपरेशन पर बुलेट प्रूफ जैकेट (Bulletproof Jacket) पहनकर जाते हैं। यह बुलेटप्रूफ जैकेट आमतौर पर मिलने वाली जैकेट्स से अलग होती है। यह जैकेट जवानों को फायरिंग को वक्त गोली से बचाती है। आज हम आपको बताएंगे की क्यों इस जैकेट से गोली आरपार नहीं हो पाती है।

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बता दें कि एक सामान्‍य बुलेट प्रूफ जैकेट का वजन 14 किलोग्राम से लेकर 16 किलोग्राम तक होता है। हालांकि, अब बाजार में काफी एडवांस जैकेट्स भी आ गई हैं, जो काफी हल्की होती हैं। जैकेट की कीमत 40000 रुपए से शुरू होकर 2 लाख रुपए तक होती है ब्लकि इससे ज्यादा भी होती है। जैकेट की कीमत उसके मैटेरियल पर निर्भर करता है। बुलेट प्रूफ जैकेट्स को तैयार करते वक्त इस बात पर ध्यान दिया जाता है कि कि उसका डिजाइन इस प्रकार हो कि बुलेट की एनर्जी कम व ना के बराबर हो जाए। बुलेट प्रूफ जैकेट्स को कभी-कभी स्‍टील प्‍लेट्स (Steel Plates) की मदद से भी तैयार किया जाता है, जबकि कभी-कभी इसमें दूसरे कई तत्‍वों का इस्तेमाल किया जाता है।

ऐसे तैयार होती है बुलेट प्रूफ जैकेट
आजकल बुलेट प्रूफ जैकेट्स सिंथेटिक फाइबर केवलर से भी बनाई जाने लगी हैं। केवलर का इस्तेमाल मिलिट्री (Military) और असैन्‍य (Civilian) दोनों के लिए होने लगा है। केवलर (Kevlar) काफी कठोर होता है और यह स्टील से लगभग पांच गुना मजबूत हैजैकेट दो लेयर्स में बनती है, सबसे ऊपर सेरेमिक लेयर होती है और उसके नीचे बैलिस्टिक लेयर। जब गोली बुलेटप्रूफ जैकेट से टकराती है तो सबसे पहले सैरेमिक लेयर पर पड़ती है। ये लेयर इतनी मजबूत होती है कि इससे टकराते ही गोली का आगे वाला सिरा टुकड़े-टुकड़े हो जाता है। जबकि, इससे गोली की स्पीड कम हो जाती है, वहीं, सैरेमिक लेयर से टकराने पर गोली से भारी मात्रा में एनर्जी निकलती है, जिससे बैलिस्टिक लेयर इस एनर्जी को सोख लेती है और इस कारण जैकेट पहने हुए व्यक्ति गोली से बच जाते हैं या कम से कम नुकसान होता है। बुलेट प्रूफ जैकेट्स बहुत मजबूत होती हैं और सैनिक को गर्मी से भी राहत देती हैं। केवलर हल्का फाइबर होता है, जिसके चलते इससे बनी जैकेट्स आज के समय में पहली पसंद बन गया है। वहीं, कुछ देशों में इन जैकेट्स को लकड़ी, सिरेमिक (Ceramic) और पॉलीकार्बोनेट (Polycarbonate) का इस्तेमाल किया जाने लगा है।

डीआरडीओ ने बनाई खास जैकेट
रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (डीआरडीओ) (Defence Research and Development Organisation) (DRDO) द्वारा हाल ही में सिर्फ 9 किलोग्राम वाली जैकेट तैयार की गई है। इस जैकेट की खासियत यह है कि इसका वजन काफी कम है और यह जैकेट सैनिक के लिए आरामदायक है।

 

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