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पर्यटन व होटल व्यवसायी परेशान, डूब सकता है Non Banking Sector में लगाया पैसा

पर्यटन व होटल व्यवसायी परेशान, डूब सकता है Non Banking Sector में लगाया पैसा

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धर्मशाला। कोरोना वायरस व लॉकडाउन के चलते मैक्लोडगंज के पर्यटन व होटल व्यवसायी (Tourism and hotel businessman) अपने भविष्य को लेकर चिंतित हैं। उनकी सबसे बड़ी चिंता का विषय नॉन बैंकिंग सेक्टर (Non Banking Sector) में निवेश किया हुआ पैसा है। पर्यटन और होटल व्यवसायियों ने नान बैंकिंग सेक्टर के नाम पर करोड़ों रुपए कमेटियों (किटी पार्टी) में निवेश कर रखा हैं जिसका कोई हिसाब किताब नहीं है। इन कारोबारियों को अब अपनी जमा पूंजी डूबती नज़र आ रही है। बता दें कि बचत और एकमुश्त पैसे पाने की चाहत के चलते मैक्लोडगंज (McLeodganj) के कारोबारियों ने बजट कमेटियां (किटी पार्टी) चलाई हुई थीं। नाम ना छापने की शर्त पर मैक्लोडगंज के एक करोबारी ने बताया कि अकेले मैक्लोडगंज क्षेत्र में ही विभिन्न कारोबारियों ने 10 से 12 करोड़ रुपए की बजट कमेटियां संचालित कर रखी थीं, जिसका हिसाब किताब ना तो आयकर विभाग के पास पंजीकृत है और ना ही किसी बैंकिंग सेक्टर में रखा जाता था।

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उन्होंने बताया कि लॉकडाउन (Lockdown) के चलते दूसरे प्रदेशों के मैक्लोडगंज में कारोबार करने वाले कारोबारी अपना कारोबार समेट कर जा चुके हैं। इनमें से अधिकतर कारोबारी वही हैं, जिन्होंने कमेटियों में लगाया पैसा शुरूआती दौर में ही उठा रखा था। ऐसे हालातों के चलते जिन कारोबारियों ने नॉन बैंकिंग सेक्टर के नाम पर कमेटियों (Committees) में निवेश कर रखा था, उन्हें अब अपना पैसा डूबता नज़र रहा है। कारोबारी एक बजट कमेटी बनाकर निश्चित राशि देकर एक फंड (Fund)  तैयार करते हैं और इस फंड को कमेटी के किसी एक कारोबारी को दे दिया जाता है। हर महीने अलग-अलग कारोबारी को ये फंड दिया जाता है और इस तरह ये चक्र पूरा हो जाता था, लेकिन अब यह चक्र टूट चूका है।

गैर पंजीकृत होटल कारोबारियों को सरकार द्वारा राहत ना मिलने की सता रही चिंता

लॉकडाउन ने मैक्लोडगंज के उन कारोबारियों को भी चिंता में डाल दिया है। जिनके व्यवसायिक भवन या होटल कारोबार पंजीकृत नहीं है या जिनके धर्मशाला (Dharamshala) नगर निगम ने भवनों के नक़्शे पारित नहीं किए हैं। उन्हें सरकार दवारा मिलने वाली राहत या छूट का भी लाभ नहीं मिल पाएगा। पर्यटन विभाग (Tourism department) के पास मैक्लोडगंज क्षेत्र में पंजीकृत होटल 330 हैं तो गैर पंजीकृत होटलों की संख्या 180 के लगभग है। धर्मशाला होटल एसोसिएशन के जनरल सेक्रेटरी संजीव गांधी ने कहा कि कोरोना वायरस व लॉकडाउन के चलते केंद्र और राज्य सरकारों से मिलने वाली वित्तीय सहायता उन सभी व्यवसायिक भवन या होटल कारोबारियों को मिलनी चाहिए जो वर्तमान में कमर्शियल रेट पर बिजली व पानी के बिल व जीएसटी अदा कर रहे हैं। पंजीकृत कारोबारियों को ही वित्तीय सहायता मिलती है तो एक बड़ा तबका इससे अछूता रह जाएगा।

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