रोजाना हनुमान चालीसा पढ़ेंगे तो हर रोग भागेगा दूर

रोजाना हनुमान चालीसा पढ़ेंगे तो हर रोग भागेगा दूर

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भगवान हनुमानजी की भक्ति सबसे सरल और जल्द ही फल प्रदान करने वाली मानी गई है। हनुमान की सबसे बड़ी भक्ति हनुमान चालीसा का पाठ है। यह भक्ति हमें न केवल भूत-प्रेत जैसी अदृश्य आपदाओं से बचाती है, बल्कि यह ग्रह-नक्षत्रों के बुरे प्रभाव से भी बचाती है। व्यक्ति रोज़ाना नियमित रूप से हनुमान चालीसा पढ़ता है वह कभी संकट में नहीं पड़ता।

कहते हैं भगवान श्रीराम के अनन्य भक्त हनुमानजी अपने भक्तों और धर्म के मार्ग पर चलने वालों की हर क़दम पर सहायता करते हैं। हनुमान चालीसा बहुत प्रभावकारी है। इसकी सभी चौपाइयां मंत्र ही हैं जिनके निरंतर जप से ये सिद्ध हो जाती है और पवनपुत्र हनुमानजी की कृपा प्राप्त हो जाती है। हनुमान जी जिंदगी से संकट दूर करते हैं ये तो सब जानते हैं, लेकिन वह रोग भी दूर करते हैं ये शायद आप नहीं जानते होंगे। हनुमान चालीसा की चौपाई – ‘नासै रोग हरै सब पीरा, जो सुमिरै हनमत बलबीरा’ तंदुरुस्ती को समर्पित है। कहा जाता है कि जो लोग रोज़ाना कम से कम एक बार हनुमान चालीसा का जाप करते हैं वे तंदुरुस्त जीवन व्यतीत करते हैं।

हनुमानजी को संकटमोचक कहा जाता है। भगवान राम जब-जब संकट में पड़े, तब-तब हनुमानजी संकटमोचक बनकर सामने आए इसलिए हिंदू धर्म में हनुमान चालीसा का बहुत अधिक महत्व है। जब भी हम अंधेरे या सुनसान इला़के से गुज़रते हैं, हनुमानजी को याद करना नहीं भूलते। ज़्यादातर लोग हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू कर देते हैं। मज़ेदार बात यह है कि जैसे ही हनुमान चालीसा पढ़ना शुरू करते हैं हमारा डर दूर हो जाता है। हमें नई ऊर्जा मिलती है। हनुमानजी सर्वशक्तिमान और एकमात्र ऐसे देवता हैं, जिनका नाम जपने से ही संकट शरीर और मन से दूर हटने शुरू हो जाते हैं।

अगर आप मानसिक अशांति से गुज़र रहे रहे हैं। कार्य की अधिकता के चलते आपका मन अस्थिर है, आपके घर-परिवार या रिश्तेदारी की कोई समस्या है तो आपकी समस्या का हल हनुमान चालीसा है। इसके पाठ से चमत्कारिक लाभ प्राप्त होता है। हिंदुओं की यह मान्यता है कि हनुमान चालीसा का पाठ करने पर डर, भय, संकट या विपत्ति नहीं आती और अगर आती है तो फ़ौरन दूर हो जाती है। कहते हैं, अगर किसी व्यक्ति पर शनि के संकट की छाया है तो हनुमान चालीसा का पाठ करने से शनि का संकट दूर हो जाता है और जीवन में शांति का वास होता है।

हनुमान चालीसा की रचना गोस्वामी तुलसीदास ने की है। इसमें तीन दोहे और 40 चौपाइयां हैं। हनुमान चालीसा में हनुमानजी के जीवन का सार छिपा है जिसे पढ़ने से जीवन में प्रेरणा और शक्ति मिलती है। हनुमान चालीसा को सिर्फ़ तुलसीदास का विचार नहीं कहा जा सकता, बल्कि यह उनकी श्रद्धा और अटूट विश्वाचस है। जब औरंगज़ेब ने तुलसीदास को बंदी बना लिया था तब अपने इसी विश्वाास के चलते तुलसीदासजी ने बंदीगृह में ही हनुमान चालीसा की रचना की थी।

कहते हैं, जब हर जगह भटकने के बाद भी शांति और सुख न मिले और संकटों का समाधान न हो, तब हनुमान चालीसा पढ़ना चाहिए। संकट से हनुमानजी की भक्ति ही बचा सकती है इसलिए जो पहले से ही हनुमान जी की शरण में हैं यानी हनुमान चालीसा का पाठ करते हैं, उनका किसी भी प्रकार के संकट से साक्षात्कार नहीं होता। शास्त्रों अनुसार कलयुग में हनुमानजी की भक्ति को सबसे ज़रूरी और उत्तम बताया गया है।

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