ये मूल्यवान पत्थर धारण करने से दूर होगा राहु, शनि और केतु का दुष्प्रभाव

यह काला जादू खत्म करता है और बुरी नज़र से बचाव करता है

ये मूल्यवान पत्थर धारण करने से दूर होगा राहु, शनि और केतु का दुष्प्रभाव

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लाजवर्द (लैपिस लैज़्यूली) एक मूल्यवान नीले रंग का पत्थर है जो प्राचीनकाल से अपने सुन्दर नीले रंग के लिए पसंद किया जाता है। कई स्रोतों के अनुसार प्राचीन भारतीय संस्कृति में जिन नवरत्नों को मान्यता दी गई थी उनमें से एक लाजवर्द था। भारतीय ज्योतिष शास्त्र के अनुसार लाजवर्द शुक्र ग्रह का प्रतीक है। लाजवर्द को धारण करने के बाद व्यक्ति पर राहु, शनि और केतु का दुष्प्रभाव खत्म हो जाता है। शनि, राहु और केतु के प्रकोप से बचाता है और दुर्भाग्य को दूर कर के व्यक्ति को सफलता दिलाता है। व्यक्ति पर बुरी नजर, काला जादू, टोने – टोटके का प्रभाव नहीं होता है। लाजवर्द कोई भी व्यक्ति धारण कर सकता है।

  • लाजवर्द तीनों क्रूर ग्रहों (शनि, राहु और केतु) के दोषों और दुष्प्रभावों को खत्म करता है ।
  • यदि आपको शनि की साढ़ेसाती चल रही है तो आप लाजवर्द धारण कर सकते हैं ।
  • यदि किसी व्यक्ति द्वारा घर पर या आप पर कुछ किया-कराया हुआ अनुभव होता हो या फिर घर में वास्तुदोष हो तो लाजवर्द को धारण करने से लाभ मिलता है।
  • यह काला जादू खत्म करता है और बुरी नज़र से बचाव करता है इसके अलावा यदि आपको केतु और राहु की महादशा या अन्तर्दशा चल रही है तो आप लाजवर्द धारण कर सकते हैं और लाभ प्राप्त कर सकते हैं।

  • लाजवर्द नौकरी और व्यवसाय में आ रही अड़चनों को दूर करता है। पितृ दोष को खत्म करता है ।
  • लाजवर्द विद्यार्थियों के लिए अत्यंत लाभदायक है। यह विद्यार्थी का आत्म विश्वास बढ़ा देता है और विद्यार्थी की शिक्षा में एकाग्रता भी बढ़ जाती है ।
  • लाजवर्द को धारण करने के बाद धीरे धीरे आपके व्यवसाय में तरक्की होती है ।
  • अगर घर में बरकत नहीं होती है तो बरकत होने लगती है |
  • लाजवर्द को धारण कर ने से डिप्रेशन/तनाव दूर होता है । और सेहत अच्छी होती है।

  • लाजवर्द राहु, केतु और शनि द्वारा आ रही बाधाओं को दूर करता है और व्यक्ति को सफलता मिलने लगती है |
  • लाजवर्द को धारण करने के बाद व्यक्ति का दुर्घटना और एक्सीडेंट से बचाव रहता है ।
  • यदि आपकी कुंडली में कालसर्प दोष है तो आपको लाजवर्दधारण कर ने से लाभ अवश्य मिलेगा ।
  • आपको लाजवर्द शनिवार को चांदी की अंगूठी में बनवा के सीधे हाथ की मध्यमा में धारण करना चाहिए।

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