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सिरमौरः भेड़ों पहुंची ऊंटनी, गर्मजोशी से स्वागत-डीसी ने चखा दूध का स्वाद

सिरमौरः भेड़ों पहुंची ऊंटनी, गर्मजोशी से स्वागत-डीसी ने चखा दूध का स्वाद

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नाहन। विकास खंड नाहन (Nahan) के भेड़ों गांव में मेहर ऊंटनी के पहली बार आगमन पर स्थानीय लोगों द्वारा एक अतिथि के रूप में भव्य स्वागत किया। ऐसे में मेहर के आगमन पर भेड़ों गांव का वातावरण किसी पर्व से कम नहीं था। डीसी सिरमौर ललित जैन ने स्वयं भेड़ों पहुंचकर मेहर (ऊंटनी) का स्वागत किया और लोगों को बधाई दी।

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दरअसल मेहर एक ऊंटनी का नाम है, जिसे जिला प्रशासन द्वारा राजस्थान के बीकानेर से लाया गया है, ताकि जिला में ऊंटनी के दूध को बढ़ावा मिल सके। डीसी सिरमौर (DC Sirmaur) ललित जैन ने कहा कि मेहर ऊंटनी के आने से जिला सिरमौर ऊंटनी का दूध उत्पादित करने वाला उत्तर भारत में पहला जिला बन गया है।

उन्होंने कहा कि उतराखंड, पंजाब और हिमाचल प्रदेश के किसी भी स्थान पर मादा ऊंट (Camel) का दूध उत्पादित नहीं किया जाता है। डीसी ने कहा कि मेहर ने तीन दिन से लगातार सफर करने के बावजूद भी भेड़ों गांव पहुंचकर दो किलोग्राम दूध दिया, जिसकी गुणवत्ता व स्वाद का टेस्ट उनके द्वारा भी किया गया। उन्होंने बताया कि मेहर के साथ नवजात मादा बच्चा भी है।

 

सिरमौर में बोझा ढोने रखे थे ऊंट पर ऊंटनी नहीं थी

डीसी ने कहा कि नाहन के कुछ गांव मातर-भेड़ों, बर्मा-पापड़ी इत्यादि क्षेत्रों में लोगों द्वारा बोझा ढोने इत्यादि कार्य के लिए ऊंट (Camel) रखे हैं, परंतु मादा ऊंट (Camel) नहीं थी। उन्होंने कहा कि उनके द्वारा पशुपालन विभाग की टीम के साथ बैठक करके इन क्षेत्रों में ऊंटनी के दूध उत्पादन की संभावनाओं का पता लगाने को कहा गया और पशुपालन विभाग द्वारा भेड़ों का जलवायु मादा ऊंट (Camel) को रखने के लिए काफी उपयुक्त पाया गया।

डीसी ने कहा कि मादा ऊंट (Camel) को लाने के लिए उनके द्वारा राजस्थान के बीकानेर के जिला कलेक्टर के साथ मामला उठाया गया और लगभग दो माह से लगातार संपर्क बनाए रखने के बावजूद पशुपालन विभाग जिला प्रशासन के सहयोग से मादा ऊंट (Camel) को राजस्थान (Rajasthan) के बीकानेर (Bikaner) से लाने में सफल हुआ।

मेहर को पायलट के आधार पर लाया गया

डीसी ने कहा कि जिला में ऊंटनी के दूध को बड़े पैमाने पर उत्पादित करने के दृष्टिगत मेहर को पायलट के आधार पर लाया गया है और इस मेहर मादा ऊंट की बेहतरीन उपलब्धि मिलने के उपरांत जिला के उपयुक्त स्थानों पर मादा ऊंट (Camel) को पालने के लिए लोगों को जागरूक किया जाएगा, ताकि सिरमौर जिला को ऊंटनी का दूध उत्पादित करने का गौरव हासिल हो सके।

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डीसी ने कहा कि मेहर मादा ऊंट को भेड़ों गांव के मौलाना अब्दुल हुसैन को पालने के लिए दिया गया है, चूंकि वह काफी वर्षो से ऊंट पालन व्यवसाय कर रहे हैं।

ऊंटनी का दूध मधुमेह आदि रोगों के लिए रामबाण

ऊंटनी का दूध बहुत पौष्टिक गुणों से भरपूर है और मधुमेह इत्यादि रोगों के उपचार के लिए काफी लाभदायक माना जाता है। उन्होंने कहा कि अमूल कंपनी द्वारा गुजरात के अहमदाबाद में ऊंटनी के दूध को कम मात्रा में विपणन किया जा रहा है। डीसी ने कहा कि मेहर के आने से भेड़ों गांव लोगों की अर्थव्यवस्था में काफी सुधार आएगा और ऊंटनी के दूध की मांग भी जिला के अतिरिक्त पड़ोसी राज्य से भी आने लगेगी।

उन्होंने कहा कि दूध की शेल्फ लाइफ बढ़ाने के लिए गांव में एक छोटे से पाश्चुरीकरण की सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए प्रयास किए जाएंगे। डीसी ने जिला आयुर्वेद अधिकारी को निर्देश दिए कि जिला में मधुमेह रोगियों पर ऊंटनी का दूध का प्रयोग किया जाए, ताकि मधुमेह के रोगियों को लाभ मिल सके।

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