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दर्दनाकः 17 घंटे में 6 की मौत

दर्दनाकः 17 घंटे में 6 की मौत

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लेखराज धरटा/शिमला। प्रदेश की सड़कों पर खूनी खेल थमने का नाम नहीं ले रहा है। आए दिन हादसों से लोग अनमोल जिदंगियां गवां रहे हैं। शिमला जिला में ही पिछले 17 घंटों में दो सड़क दुर्घटनाओं में 6 लोगों की मौत हो चुकी है। निरमंड तहसील के जाओग में पिछली रात करीब एक बजे एक बलेरो कैम्पर गाड़ी गहरी खाई में लुढ़कने से उस में सवार तीनों लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। मृतकों में बसवारी (जाओं) निवासी गाड़ी का चालक व मालिक मंगत राम (32),झाबे राम (33) व राकेश कुमार (22) शामिल हैं। निरमंड पुलिस ने मामला दर्ज कर दुर्घटना के कारणों की जांच प्रारम्भ कर दी है। पोस्टमार्टम के बाद शवों को उनके परिजनों को सौंप दिया गया है। वहीं, कांगल से कुमारसैन जा रही एक मारुति गुरुवार सुबह गहरी खाई में लुढ़क गई है। गाड़ी में सवार तीन में से दो लोगों की मौके पर ही मौत हो गई है, जबकि एक गंभीर रूप से घायल ने बाद में कुमारसैन अस्पताल में दम तोड़ा। यह तीनों कांगल के साथ लगते कोटीघाट गांव के रहने वाले थे और सुबह-सुबह कुमारसैन की ओर जा रहे थे। बताया जा रहा है कि गाड़ी में सवार राजकुमार एचआरटीसी की बस का ड्राइवर है, जिसकी मौके पर ही मौत हुई है। उसके साथ ही एक अन्य व्यक्ति नायक राम ने भी हादसे के वक्त ही दम तोड़ दिया।

  • accidentएक बाद एक सड़क हादसों से सहमा शिमला
  • हालांकि पुलिस और 108 एंबुलेंस को हादसे के तुरंत बाद ही स्थानीय लोगों ने फोन सूचना दे दी थी, लेकिन दोनों ही दुर्घटना के करीब 3 घंटे बीतने के बाद स्पॉट पर पहुंचे।

उधर, कांगल पंचायत के उपप्रधान विनोद कुमार ने बताया कि सुबह जब कार हादसा हुआ तो स्थानीय लोगों ने सबसे पहले 108 एंबुलेंस को फोन कर इसकी जानकारी दी, जिसके बाद पुलिस को भी सूचित कर दिया गया। लेकिन दोपहर 12 बजे तक न तो एंबुलेंस मौके पर पहुंची और न ही पुलिस। स्थानीय लोगों ने आनन-फानन में निजी वाहन कर घायल टिक्का राम को कुमारसैन अस्पताल पहुंचाया, जहां उसका उपचार किया जा रहा है। स्थानीय लोगों ने पुलिस और एंबुलेंस की देरी पर नाराजगी जताई है।

3 हजार से ज्यादा सड़क हादसे, 800 से अधिक की मौत
dead-bodyप्रदेश में सड़क हादसों की बात करें तो अब तक 3 हजार से ज्यादा सड़क हादसों में 800 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है। साथ ही चार हजार से ज्यादा लोग जख्मी हुए हैं। वर्ष 2015 की बात करें तो 3010 सड़क हादसों में 1097 लोगों ने जिदंगी गवाई थी और 5109 लोग जख्मी हुए थे। वर्ष 2014 में 3058 हादसों में 1199 की मौत हुई व 5680 लोग ऐसे थे, जिन्हें तमाम उम्र न भूलने वाले जख्म मिले हैं।

हालांकि हादसे रोकने के लिए सरकार समय-समय पर जागरूकता कार्यक्रम चलाती रहती है, लेकिन इन कार्यक्रमों का फायदा नहीं दिख रहा है। अब सवाल यह है कि इन हादसों का कारण क्या है। सड़कें, मानवीय भूल व या फिर कुछ और। कारण जो भी हो, लेकिन इस हादसों में कई लोग अपनी जान गवां रहे हैं। कई बेगुनाह मौत की बलि चढ़ रहे हैं। 

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