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विधानसभा में गूंजा स्कूल खोलने का मामलाः शिक्षा मंत्री बोले-80 स्कूलों में छात्रों की संख्या शून्य

विधानसभा में गूंजा स्कूल खोलने का मामलाः शिक्षा मंत्री बोले-80 स्कूलों में छात्रों की संख्या शून्य

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शिमला। हिमाचल प्रदेश विधानसभा के बजट सत्र ( Budget Session of Himachal Pradesh Vidhansabha) में प्रश्नकाल के दौरान स्कूल खोलने का मामला गूंजा। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज (Education Minister Suresh Bhardwaj) ने कहा कि 80 स्कूलों में छात्रों की संख्या शून्य है। उन्होंने कहा कि  पूर्व सरकार पर बिना सोचे समझे स्कूल खोल दिए।  इससे पहले ज्वालामुखी के विधायक रमेश धवाला ने सवाल पूछा प्रदेश में ऐसे कितने विद्यालय हैं, जिनमें बच्चों की संख्या 20 बच्चों से कम हैं। क्या सरकार इन स्कूलों के समायोजन का विचार रखती है।इसके जवाब में शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने बताया कि प्रदेश में 4 हज़ार 994 प्राथमिक स्कूल, 1 हज़ार 92 माध्यमिक , 32 उच्च व 9 वरिष्ठ माद्यमिक पाठशालाएं हैं, जहां पर छात्रों की संख्या 20 से कम है। हिमाचल प्रदेश के प्रत्येक बच्चे को शिक्षा प्रदान करना सरकार का दायित्व है। इसके समायोजन या बन्द करने का कोई विचार नहीं है।



पिछले साल 80 स्कूलों में एक भी बच्चा नहीं रहा, वह अपने आप ही बंद होगए। निज़ी स्कूलों में बच्चों को प्री प्राइमरी में लिया जाता है। जिसकी वजह से बच्चों की संख्या कम रही हैं। अब सरकार ने 3 हज़ार 700 स्कूलों में प्री प्राइमरी शुरू की है उसी के परिणामस्वरूप स्कूलों में 50 हज़ार बच्चों ने दाखिला लिया है।शिक्षा मंत्री ने कहा कि शिक्षा के अधिकार के तहत डेढ़ किलोमीटर के भीतर स्कूल बंद नहीं किए जा सकते। उन्होंने यह भी कह दिया कि पिछली कांग्रेस सरकार ने बिना सोचे समझे स्कूल खोल दिए। इस पर किन्नौर के विधायक जगत नेगी ने आपत्ति जाहिर की और कहा कि एक तरफ शिक्षा मंत्री शिक्षा की अनिवार्यता की बात कह रहें है दूसरी तरफ़ पिछली सरकार द्वारा खोले गए स्कूलों पर सवाल उठा रहे है। शिक्षा मंत्री स्पष्ट करें।इस पर शिक्षा मंत्री भारद्वाज ने मुहावरे का प्रयोग किया,जिसपर विपक्ष बिफ़र गया व इस मुहावरे को असंसदीय क़रार देते हुए इसको हटाने की मांग की।


इसी पर सदन में विपक्ष नारेबाज़ी भी करने लगा। मुख्यमंत्री शिक्षा मंत्री के बचाव में खड़े हुए और कहा कि ये असंसदीय नही है। इस पर आपत्ति करने की ज़रूरत नही है। पहले भी इस तरह मुहावरे सदन में प्रयोग होते रहे हैं। विपक्ष के नेता मुकेश अग्निहोत्री ने कहा कि विधानसभा अध्यक्ष इस पर कोई व्यवस्था दें व मंत्री को सरंक्षण न दें।जिस पर विपक्ष शोर मचाने लगा और अपनी मांग पर अड़ा रहा। जिस पर विधानसभा अध्यक्ष ने कहा कि प्रोसिडिंग देखर व्यवस्था देखी जाएगी पर विपक्ष नहीं माना। जिसके बाद सदन की कार्यवाही से मंत्री व नेता विपक्ष की तरफ से कही गई कहावतों को हटा दिया गया। इसके बाद सदन की कार्यवाही सामान्य चलना शुरू हुई और शिक्षा मंत्री ने जवाब में कहा किआरटीई एक्ट के मुताबिक डेढ़ किलोमीटर दायरे में खुले स्कूलों में 25 विद्यार्थी की अनिवार्यता लगी है। 80 स्कूल ऐसे है जिनमें नामांकन शून्य हो गया है। जिन स्कूलों के अध्यापकों को दूसरी जगह भेज दिया गया है।

किन्नौर, कांगड़ा, मंडी व शिमला में ऐसे स्कूल्स अधिक है। जिनमें छात्र न होने के कारण स्कूल्स स्वतः ही बंद हो गए है। उन्होंने कहा कि पूर्व सरकार ने 21 कॉलेज एक महीने में एक साथ खोल दिये। प्रदेश में कुल 129 कॉलेज में 50 प्रतिशत कॉलेज एक साल में खोले गए। स्कूल खोले हमें कोई एतराज नहीं। लेकिन अपने बच्चे तो निजी स्कूलों में पढ़ाए जा रहे हैं और गरीब बच्चों के लिए स्कूल खोले जा रहे हैं जहां छात्रों की संख्या ही पूरी नहीं हो रही और शिक्षा की गुणवत्ता भी उस स्तर पर नहीं मिल रही। महाविद्यालयों में भी ऐसी स्थिति है। पिछली सरकार ने राजनीतिक आधार पर शिक्षण संस्थान खोले। लेकिन हमारी सरकार गुणवत्ता और काम कर रही है। जिन स्कूल्स में शून्य विद्यार्थी है ऐसे स्कूल अपने आप ही बंद हो गए है। जहाँ छात्रों की संख्या कम है उनमें युक्तिकरण किया जाएगा और सरकार शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने को लेकर काम कर रही है।

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