Covid-19 Update

2,06,589
मामले (हिमाचल)
2,01,628
मरीज ठीक हुए
3,507
मौत
31,767,481
मामले (भारत)
199,936,878
मामले (दुनिया)
×

हिमाचल बिग ब्रेकिंगः आत्महत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति पर दर्ज नहीं होगा केस

हिमाचल बिग ब्रेकिंगः आत्महत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति पर दर्ज नहीं होगा केस

- Advertisement -

शिमला। हिमाचल में अब आत्महत्या का प्रयास करने वाले व्यक्ति पर केस दर्ज नहीं होगा। ऐसे व्यक्ति को गंभीर तनाव ग्रसित रोगी माना जाएगा। प्रदेश हाईकोर्ट ने व्यवस्था दी है कि जो व्यक्ति आत्महत्या का प्रयास करता है, वह गंभीर तनाव ग्रसित रोगी माना जाएगा और उसके खिलाफ कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। न्यायाधीश संदीप शर्मा ने राज्य के मुख्य सचिव (Chief Secretary) को आदेश दिए हैं कि वह पुलिस अथॉरिटी (Police authority) को तुरंत प्रभाव से दिशा-निर्देश जारी करें कि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 की धारा 115 में निहित प्रावधानों का कड़ाई से अनुपालन करें। आत्महत्या का प्रयास करने वाले को गंभीर तनाव ग्रसित रोगी माना जाएगा और उसके खिलाफ कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। न्यायाधीश शर्मा ने कहा कि आत्महत्या के प्रयास को गैर अपराधीकरण घोषित करने बारे दुनिया के विभिन्न देशों ने पहले ही कदम उठा लिए हैं। आत्महत्या करने के प्रयास गैर अपराधीकरण घोषित किए जाने के मकसद से भारत सरकार पहले ही मेंटल हेल्थकेयर एक्ट, 2017 (Mental Healthcare Act, 2017) अधिनियमित कर चुकी है।

 


हिमाचल और देश-दुनिया की ताजा अपडेट के लिए join करें हिमाचल अभी अभी का Whats App Group… 

अदालत ने भारत सरकार के सचिव (गृह) को आदेश दिए कि वह उचित स्तर पर मामले को उठाएं, ताकि आत्महत्या के प्रयास को गैर अपराधीकरण घोषित करने बारे उचित कदम उठाए जाएं। अदालत ने उक्त आदेश प्रतिभा शर्मा द्वारा दायर याचिका को स्वीकार करते हुए पारित किए। याचिका में प्रार्थी ने गुहार लगाईं थी कि पुलिस द्वारा उसके खिलाफ आत्महत्या का प्रयास किए जाने पर प्राथमिकी दर्ज की थी और उसके खिलाफ सक्षम अदालत में मुकदमा चलाया था। हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े तथ्यों को देखते हुए अपने निर्णय में कहा कि पुलिस ने प्रार्थी के बयानों के आधार पर ही आत्महत्या का मामला दर्ज किया है, जोकि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20 (3) का सरासर उल्लंघन है।

 

हिमाचल अभी अभी Mobile App का नया वर्जन अपडेट करने के लिए इस link पर Click करें… 

अदालत ने अपने निर्णय में कहा कि कोई भी व्यक्ति अपने ही खिलाफ बयान देने के लिए बाध्य नहीं किया जा सकता। अदालत ने यह भी पाया कि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 की धारा 115 में निहित प्रावधानों के अनुसार प्रार्थी के खिलाफ आत्महत्या का प्रयास किए जाने बारे मामला दर्ज नहीं किया जा सकता, क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य अधिनियम, 2017 की धारा 115 में निहित प्रावधानों के अनुसार आत्महत्या का प्रयास करने वाले को गंभीर तनाव ग्रसित रोगी माना जाएगा और उसके खिलाफ कोई भी मुकदमा दर्ज नहीं किया जाएगा। हाईकोर्ट ने प्रार्थी के खिलाफ दर्ज प्राथमिकी को रद्द करते हुए निचली अदालत में प्रार्थी के खिलाफ चल रहा आत्महत्या के प्रयास का मुकदमा भी रद्द कर दिया।

हिमाचल की ताजा अपडेट Live देखनें के लिए Subscribe करें आपका अपना हिमाचल अभी अभी YouTube Channel… 

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है