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CBI करेगी झूठा CASE बनाए जाने के मामले की जांच

CBI करेगी झूठा CASE बनाए जाने के मामले की जांच

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False Case Investigate  : शिमला। हाईकोर्ट ने मादक पदार्थ रखने से जुड़े एक मामले की जांच सीबीआई को सौंप दी है। जस्टिस तरलोक सिंह चौहान ने रवि कुमार द्वारा दायर जमानत याचिका की सुनवाई के दौरान स्पष्ट किया कि मामले की तह तक जाने के लिए पुलिस के अलावा किसी अन्य स्वतंत्र एजेंसी से जांच करवाना आवश्यक है। प्रार्थी की ओर से कोर्ट को बताया गया था कि उसके खिलाफ झूठा मामला बनाया गया है,  जिसकी शिकायत प्रार्थी और उसके पिता ने पुलिस के उच्च अधिकारियों  को की थी और कथित जिम्मेदार पुलिस कर्मियों के खिलाफ जांच अमल में लाई गई थी। उनकी इस कथित साजिश में संलिप्तता प्रतीत होने के बावजूद बिना किसी ठोस कारण के उन्हें क्लीन चिट दे दी गई।

हाईकोर्ट ने मादक पदार्थ रखने से जुड़े एक मामले की जांच सीबीआई को सौंपी

प्रार्थी ने जेल निरक्षण के दौरान मंडी के जिला एवं सत्र न्यायाधीश को कथित साजिश शिकायत की थी। उसके बाद पुलिस सहायक अधीक्षक ने जांच शुरू की। प्रार्थी के पिता रमेश चंद ने अपनी शिकायत में यह स्पष्ट तौर पर कहा था कि   मंजीत सिंह, सहायक पुलिस निरीक्षक राम लाल व प्रदीप कुमार की कथित साजिश के तहत उसे फंसाया गया है।


मंजीत जो हरियाणा का रहने वाला है एक समगलर है, उसके हिमाचल पुलिस व हिमाचल की जेलों में संबध हैं। साजिश के तहत मंजीत ने उसके बेटे को पुलिस की उपस्थिति में बुलाया। होटल, गुरुद्वारे के अलावा अन्य स्थानों पर रोके रखा, उससे 20 लाख रुपये देने की मांग की। जब नहीं दिए तो उसे इस मामले मे फंसवा दिया। जांच के दौरान साबित हुआ था कि राम लाल, प्रदीप कुमार मंजीत व रवि कुमार एक दूसरे के संपर्क में थे। जांच के दौरान यह भी पाया गया था कि मंजीत सिंह, रवि कुमार और प्रार्थी के खिलाफ आपराधिक मामले दर्ज हुए थे, लेकिन वे सब आरोप से बरी हो गए थे। फिर मंजीत क्यों इन पुलिस कर्मियों के संपर्क में था।

कोर्ट ने जांच के बाद बनाई क्लीन चिट वाली रिपोर्ट

कोर्ट ने जांच के बाद बनाई क्लीन चिट वाली रिपोर्ट में संशय पाया। इस कारण जांच अन्य एजेंसी से करवाने का निर्णय लिया। कोर्ट ने प्रार्थी के पिता द्वारा दी शिकायत पर सीबीआई द्वारा रिपोर्ट  31 अगस्त तक सौंपने के आदेश जारी कर दिए। 21 जनवरी 2016 को मंडी के सदर पुलिस स्टेशन में दर्ज प्राथमिकी के तहत प्रार्थी के खिलाफ मादक पदार्थ निरोधक अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया है।

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