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सेना में चार साल में घटाए जाएंगे एक लाख सैनिक, पढ़ें क्यों लाई जा रही कमी

सेना में चार साल में घटाए जाएंगे एक लाख सैनिक, पढ़ें क्यों लाई जा रही कमी

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नई दिल्ली। भारत इस समय सबसे ज्यादा सैनिकों (Soldiers) वाला तीसरा सबसे बड़ा देश है। बहुत सारे युवा आर्मी में जाने की हसरत रखते हैं और उसके लिए मेहनत भी करते हैं, लेकिन भारतीय सेना में सैनिकों की संख्या (Number of soldiers) घटाने पर काम चल रहा है। सेना से तीन से चार साल के अंदर बड़ी तादाद में जवानों को घटाने पर विचार चल रहा है। बताया जा रहा है कि उक्त समय अवधि में करीब एक लाख सैनिक कम किए जाएंगे। सीडीएस यानी चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ बिपिन रावत (General Bipin Rawat) ने यह बात संसद की स्टैंडिंग कमेटी के सामने रखी है।


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सेना में सैनिकों (Soldiers) की संख्या की कटौती के टारगेट के बारे में चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (Chief of Defense Staff) जनरल बिपिन रावत ने संसद की स्टैंडिंग कमेटी को जानकारी दी है। संसद की स्टैंडिंग कमेटी में सीडीएस जनरल रावत ने कहा है कि जब जनरल वीपी मलिक (General VP Malik) आर्मी चीफ थे तो उन्होंने 50 हजार सैनिक कम करने का टारगेट सोचा था। अब हमारा लक्ष्य आगामी तीन से चार साल में एक लाख सैनिक (Soldiers) कम करने का है। सीडीएस के मुताबिक सैनिकों की कटौती से जो पैसा बचेगा उसका इस्तेमाल तकनीक को बढ़ावा देने होगा। उन्होंने कहा कि कटौती के पास बचने वाले पैसे सरकार ने भी सेना (Army) की तकनीक में इस्तेमाल करने का आश्वासन दिया है। आपको बता दें कि स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट (Standing Committee Report) पिछले महीने ही संसद में पेश की गई थी।

सेना में की जा रही है रीस्ट्रक्चरिंग

भारतीय सेना में इस समय रीस्ट्रक्चरिंग प्रक्रिया (Restructuring Process) चल रही है। इसमें दिल्ली स्थित आर्मी हेडक्वार्टर (Army Headquarters) से भी ऑफिसर्स को कम किया जा रहा है। हेडक्वार्टर से भी जवानों को फील्ड में भेजने की योजना पर काम हो रहा है। इसके अलावा संसद की स्टैंडिंग कमेटी (Standing Committee of Parliament) को सेना के टूथ टू नेल रेशो के बारे में भी जानकारी दी गई है। सैन्य कार्रवाइयों में भाग लेने वाले जवानों और उनके लिए रसद आदि पहुंचाने वाले जवानों के बीच के अनुपात को टूथ टू टेल रेशो (Tooth to Tail Ratio) कहा जाता है।

सीडीएस जनरल बिपिन रावत (CDS General Bipin Rawat) ने स्टैंडिंग कमेटी जानकारी दी है कि हम तकनीक के ज्यादा से ज्यादा इस्तेमाल पर जोर दे रहे हैं। इसके अलावा सेना के पैदल सैनिकों यानी इंफ्रेंट्री पर फोकस किया जा रहा है जो सैनिक असल में बॉर्डर पर निगरानी करते हैं। सीडीएस के मुताबिक सेना की प्राथमिकता ऐसे सैनिकों को आधुनिक राइफल (Modern Rifle) देने की है। हम उन्हें आधुनिक सर्विलांस सिस्टम (Surveillance System) देना चाहते हैं, हम उन्हें ज्यादा सक्षम बनाने के लिए ज्यादा तकनीक देना चाहते हैं।

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