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बारिश से कांगड़ा में हुआ 115 करोड़  का नुकसान, केंद्रीय टीम ने लिया जायजा

बारिश से कांगड़ा में हुआ 115 करोड़  का नुकसान, केंद्रीय टीम ने लिया जायजा

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नूरपुर। मानसून सीजन में भारी बारिश के चलते  कांगड़ा ज़िला में लगभग 115 करोड़ का नुकसान आंका गया है। यह जानकारी डीसी राकेश  प्रजापति ने नूरपुर होटल में ज़िला में हुए नुकसान का जायजा लेने पहुंची केंद्रीय टीम के साथ आयोजित बैठक के दौरान दी। गृह मंत्रालय के सयुंक्त सचिव संजीव कुमार जिंदल के नेतृत्व में केंद्र व प्रदेश सरकार के सात अन्य प्रशासनिक अधिकारी इस टीम में शामिल रहे।


 

डीसी ने बताया कि इस मॉनसून सीजन में सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य वृत नूरपुर तथा धर्मशाला की पेयजल व सिंचाई योजनाओं को सबसे ज्यादा 4784 लाख रुपए का नुकसान हुआ है , जबकि लोक निर्माण विभाग को 4631 लाख रुपये का नुकसान झेलना पड़ा है।  प्रजापति ने बताया कि विद्युत विभाग को 1157 लाख रुपये, स्थानीय निकाय विभाग को 285 लाख रुपए, शहरी विकास विभाग को 170 लाख रुपए, ग्रामीण विकास विभाग को 350 लाख रुपए के अलावा राजस्व विभाग को 156 लाख तथा कृषि विभाग व अन्य विभागों को 32 लाख रुपए की बहुमूल्य संपत्ति को नुकसान पहुंचा है।


केंद्रीय टीम ने नूरपुर उपमंडल की डन्नी पंचायत के खडेतर गांव का दौरा कर वहां पर हुए नुकसान का जायजा भी लिया। गौरतलब है कि गत 18 अगस्त को इस क्षेत्र की जब्बर खड्ड पर कृत्रिम झील बन जाने के कारण लगभग 40 कनाल उपजाऊ भूमि पानी में ड़ूब व बह गई थी।  इस मौके पर गृह मंत्रालय के सयुंक्त सचिव संजीव कुमार जिंदल ने संबंधित विभागीय अधिकारियों से नुकसान की वास्तविक रिपोर्ट ली तथा उनकी समस्याओं को ध्यानपूर्वक सुना। उन्होंने भरोसा दिया की बरसात के कारण हुए नुकसान की रिपोर्ट केंद्र सरकार को सौंपते समय इस पर्वतीय राज्य की भौगोलिक परिस्थितियों तथा प्रभावितों के हितों का पूरा ध्यान रखा जाएगा।

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जिंदल ने कहा कि किसी भी होने वाली आपदा को टाला नहीं जा सका है, परंतु समय रहते सावधानी व सूझबूझ से इससे होने  वाले नुकसान को कम किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि हमें समय रहते ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे आपदाओं से होने वाले नुकसान को कम किया जा सके। जिंदल  ने सभी अधिकारियों से किसी भी  आपदा को रोकने एवम इससे बेहतर तरीके से निपटने के लिये समय रहते खतरे वाले क्षेत्रों  में विशेष कार्ययोजना के तहत आपसी समन्वय से कार्य करने को कहा, ताकि  इससे होने वाले जानमाल के नुकसान से बचा जा सके। उन्होंने अधिकारियों से अपने-अपने विभाग से संबंधित आपदा प्रबंधन गतिविधियों को विशेष गति देने एवं सतर्क रहने को कहा।

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