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चंबल का डकैत रमेश सिकरवार अब बदूंक उठाकर करेगा चीतों की प्रोटेक्शन

70 मर्डर करने और 250 से अधिक डकैती की वारदातों का था आरोप

चंबल का डकैत रमेश सिकरवार अब बदूंक उठाकर करेगा चीतों की प्रोटेक्शन

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मोदी के जन्मदिन पर मध्यप्रदेश के श्योरपुर स्थित कूनो नेशनल पार्क (Kuno National Park) में नामीबिया से चीते लाकर बसाए जा रहे हैं। बताया जा रहा है कि इसके लिए आठ चीतों को छोड़ा जाएगा। इनमें पांच फिमेल और तीन मेल चीता होंगे। हालांकि भारत में बहुत सारे चीते थे। मगर यह अपनी तरह का पहला और अनूठा मिशन है। पांच फीमेल और तीन मेल चीतों को भारत लाया जा रहा है। नामीबिया (Namibia) की राजधानी विंडहोक से कस्टमाइज्ड बोइंग 747.400 एयरक्राफ्ट पर इन चीतों को भारत लाया जाएगा।

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रात भर यात्रा करने के बाद 17 सितंबर की सुबह चीते जयपुर एयरपोर्ट पर उतरेंगे। उसके बाद उन्हें हेलिकॉप्टर में मध्यप्रदेश (Madhya Pradesh) के कूनो नेशनल पार्क में लाया जाएगा। इंटरनेशनल नॉट फॉर प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन चीता कंजर्वेशन का हेडक्वार्टर नामीबिया (Namibia, Headquarters of the International Not for Profit Organization Cheetah Conservation) है और यह संस्था चीतों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। जिन पांच फीमेल चीतों को लाया जा रहा हैए उनकी उम्र दो से पांच साल के बीच है। वहीं मेल चीतों की उम्र 4.5 से 5.5 साल के बीच है। मेल चीतों में दो भाई है और वे जुलाई 2021 से नामीबिया को ओटिवारोंगो में सीसीएफ (CCF in Otivarongo) के 58 हजार हेक्टेयर के प्राइवेट रिजर्व में रह रहे थे। सीसीएफ के स्टाफ ने सेंटर के पास उनके पहली बार ट्रैक्स हासिल किए थे। दोनों एक ही झुंड के सदस्य हैं और मिलकर शिकार करते हैं।

जो तीसरा मेल चीता है, वह मध्य नामीबिया में प्रोटेक्टेड वाइल्डलाइफ एंड इकोलॉजिकल रिजर्व एरिंडी प्राइवेट गेम रिजर्व में मार्च 2018 में पैदा हुआ। उसकी मां का जन्म भी वहीं परहुआ था। अब भारत में सन 1970 के दशक को चीताओं को दोबारा बसाने के प्रयास हो रहे थे, मगर इस बार इस प्रोजेक्ट को अमली जामा पहनाया जा रहा है। अब चीताओं को इतनी मशक्कत के बाद लाया जा रहा है तो इनकी देखभाल की भी खास आवश्यकता होगी। इन्हीं में रमेश सिकरवार को भी चीता मित्र बनाया गया है। रमेश सिकरवार एक डकैत था और उस पर 70 हत्याओं का आरोप था (was accused of 70 murders)। उसने अक्टूबर 1984 को सरेंडर कर दिया था। रमेश सिकरवार का गांव में आज भी रुतबा कायम है।

इसलिए ही उसे चीता मित्र बनाया गया है। वह लोगों को चीता के बारे में जागरूक करेगा। वहीं रमेश सिकरवार का कहना है कि भले ही अपनी जान दे दूंगा मगर चीताओं की रक्षा करूंगा। उन्हें कुछ भी नहीं होने दूंगा। चाचा ने जब रमेश सिकरवार के पिता के हिस्से की जमीन पर जब कब्जा कर लिया था तो नाइंसाफी का बदला लेने के लिए रमेश सिकरवार (Ramesh Sikarwar) ने बंदूक उठा ली थी। उस पर 70 से ज्यादा हत्याएं और 250 से अधिक डकैती की वारदातों का आरोप था।

इंटरनेशनल नॉट फॉर प्रॉफिट ऑर्गेनाइजेशन चीता कंजर्वेशन फंड का हेड क्वार्टर नामीबिया है और यह संस्था चीतों के संरक्षण के लिए प्रतिबद्ध है। जिन पांच फीमेल चीतों को लाया जा रहा है उनकी उम्र दो से पांच साल के बीच है। वहीं मेल चीतों की उम्र 4.5 से 5.5 साल के बीच है। मेल चीतों में दो भाई है और वे जुलाई 2021 से नामीबिया को ओटिवारोंगो में सीसीएफ के 58 हजार हेक्टेयर के प्राइवेट रिजर्व में रह रहे थे। सीसीएफ के स्टाफ ने सेंटर के पास उनके पहली बार ट्रैक्स हासिल किए थे। दोनों एक ही झुंड के सदस्य हैं और मिलकर शिकार करते हैं। जो तीसरा मेल चीता है]

वह मध्य नामीबिया में प्रोटेक्टेड वाइल्डलाइफ एंड इकोलॉजिकल रिजर्व एरिंडी प्राइवेट गेम रिजर्व में मार्च 2018 में पैदा हुआ। उसकी मां का जन्म भी वहीं पर हुआ था। आठ चीतों में एक फीमेल है, जो उसके भाई के साथ दक्षिणपूर्वी नामीबिया के गोबासिस शहर के पास जलाशय के पास मिली थी। । दोनों ही बेहद कुपोषित थे और सीसीएफ का मानना था कि उनकी मां जंगल की आग में कुछ हफ्ते पहले मारी गई होगी। यह फीमेल चीता सीसीएफ सेंटर में सितंबर 2020 से रह रही है। एक अन्य फीमेल चीता को सीसीएफ (CCF) के पास के एक खेत से जुलाई 2022 में ट्रैप किया था। यह खेत नामीबिया के एक प्रमुख कारोबारी का है।

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