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चमोली आपदा का है भूकंप से संबंध, पढ़ें क्या हो सकते हैं ग्लेशियर टूटन के कारण

अपर महानिदेशक रह चुके डॉक्टर सोमनाथ चंदेल ने बताई वजहें

चमोली आपदा का है भूकंप से संबंध, पढ़ें क्या हो सकते हैं ग्लेशियर टूटन के कारण

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देहरादून। उत्तराखंड के चमोली में आई आपदा (Chamoli Disaster) ने सभी को परेशान कर दिया है। चमोली में ग्लेशियर टूटने (Glacier Breakdown) की घटना को लेकर देश और दुनिया के वैज्ञानिक रिसर्च (Scientific Research) कर रहे हैं। चमोली त्रासदी को लेकर अभी तक यही माना जा रहा है कि तापमान बढ़ने की वजह से पर्यावरण (Environment) को नुकसान पहुंच रहा है और इसी वजह से चमोली में ग्लेशियर टूटा होगा, लेकिन अब विशेषज्ञ इसका एक पहलू भी बता रहे हैं। दरअसल दो दिन पहले पूरे उत्तरी भारत में भूकंप (Earthquake in Northern India) के झटके महसूस किए गए थे। ऐसे में अब वैज्ञानिकों (Scientists) को अंदेशा कि चमोली में ग्लेशियर टूटने की घटना में भूकंप का भी एक बड़ा कारण रहा होगा।

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दरअसल दो दिन पहले भूकंप के झटके उत्तर भारत में महसूस किए गए थे। ऐसे में माना जा रहा है कि पिछले कुछ दिनों से हिमालयन बेल्ट में धरती के नीचे हलचल हो रही थी। इस कारण हिमालय के बहुत से क्षेत्र में ऐसी हलचल हुई। अब भू-वैज्ञानिकों का कहना है कि आगामी दिनों भी ऐसी घटनाएं घट सकती हैं। इससे चमोली से भी बड़ी बड़ी घटना घटने का अंदेशा जताया जा रहा है। वरिष्ठ भूवैज्ञानिक और जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अपर महानिदेशक रह चुके डॉक्टर सोमनाथ चंदेल (Dr. Somnath Chandel) ने भी इस बाबत विचार व्यक्त किए हैं। डॉक्टर सोमनाथ चंदेल का कहना है कि चमोली आपदा हिमालय में धरती के नीचे हुई हलचल के कारण हुई है। उन्होंने कहा कि इस बात से इनकार नहीं किया जा सकता है। डॉक्टर सोमनाथ चंदेल ने कहा कि अगर सैटेलाइट इमेज को स्टडी किया जाए तो पता चलता है कि हिमालयन रीजन में ग्लेशियर टूटने की ऐसी घटनाएं बीते कुछ सालों के दौरान लगातार घट रही हैं।

उनका कहना है कि इसमें कुछ घटनाओं की इंटेन्सिटी ज्यादा होती है तो कुछ में कम इंटेन्सिटी कम रहती है। इस में पर्यावरण असंतुलन के साथ ही धरती के नीचे होने वाली हलचल भी शामिल है। डॉक्टर सोमनाथ चंदेल का मानना है कि इन घटनाओं में जहां भी मानवीय जीवन को असर पड़ता है वहां तो मंथन होता है, लेकिन जहां मानवीय जीवन पर असर नहीं पड़ता वहां इन घटनाओं को कोई समझ नहीं पाता है। उन्होंने कहा कि चमोली की घटना भी पहले से लगातार आ रहे भूकंप की वजह से हुई। इसमें पर्यावरण से जुड़े दूसरे कारक जुड़ते गए।

नेपाल का दिया उदाहरण

जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के अपर महानिदेशक रह चुके डॉक्टर सोमनाथ चंदेल का कहना है कि 2015 में नेपाल में विनाशकारी भूकंप आया था। इस दौरान भूकंप और उसके कारणों का अध्ययन किया था। डॉक्टर सोमनाथ चंदेल ने कहा कि अध्ययन में पाया था कि जब नेपाल में भूकंप आया तो उससे पहले और बाद में हिमालय के कई ग्लेशियर दरके थे। ग्लेशियर दरकने की वजह से 22 से ज्यादा लोगों की मौत हुई थी। ऐसे में साफ है कि ऐसी घटनाओं का आपस में सीधा संबंध होता है। उन्होंने कहा कि भूवैज्ञानिकों का मानना है कि हिमालयन रीजन में लगातार धरती के नीचे हलचल होती है। इसका सीधा असर हिमालयन बैल्ट में प्राकृतिक संपदा पर भी पड़ता है।

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