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प्रेगनेंसी में बदले अपना सोने का तरीका, नहीं तो शिशु को होगा नुकसान

प्रेगनेंसी में बदले अपना सोने का तरीका, नहीं तो शिशु को होगा नुकसान

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प्रेगनेंसी के समय महिला को काफी चीजों का ख्याल रखना पड़ता है। खाने-पीने से लेकर उठने-बैठने तक का ध्यान देना जरूरी होता है। गर्भवती महिला के लिए प्रेगनेंसी के आखिरी हफ्तों में गलत तरीके से सोना उसके तथा शिशु के लिए हानिकारक हो सकता है। अक्सर न्यूली प्रेगनेंट महिलाएं सोने के मामले में लापरवाह होती हैं और पीठ के बल या पेट के बल सोती हैं। इस तरीके के सोने को वे अगर नजरअंदाज करती हैं तो मां और शिशु दोनों के लिए ठीक रहेगा।
एक रिसर्च में पाया गया कि जिन्होंने लापरवाही से सोने की आदत को कम किया तो मां और बच्चे को सोने और सांस लेने में काफी सुधार रहा। इसके अलावा उनकी धड़कनें भी सामान्य थीं। इसके लिए एक विशेष प्रकार का तकिया आता है जो उन्हें गलत तरीके से सोने से रोक देता है। यह पोजीशनल थेरेपी है जो मां और शिशु की बेहतरी के लिए है।
औसतन पाया गया कि ज्यादातर गर्भवती माताएं अपनी नींद का 25 प्रतिशत लापरवाही से सोने में निकालती हैं। इससे प्रसव में तकलीफ हो सकती है और शिशु में जन्मगत दोष भी आ सकते हैं। आज के दौर में पोजीशनल थेरेपी अच्छी मानी गई है अगर इसके लिए विशेष तकिए का इस्तेमाल किया जाता है तो अन्य समस्याओं से बचाव रहेगा।

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