×

CM के बोल, पकडे़ जाएं पशुओं को लावारिस छोड़ने वाले

CM के बोल, पकडे़ जाएं पशुओं को लावारिस छोड़ने वाले

- Advertisement -

शिमला। सीएम वीरभद्र सिंह ने कहा कि लावारिस और छोड़े गए पशुओं की पहचान के लिए एक ऐसी तकनीक विकसित की जानी चाहिए, जिस पर कम लागत आए, व्यावहारिक हो और पशुओं को भी कोई नुकसान न पहुंचे। वह आज यहां गौ वंश संवर्द्धन बोर्ड की प्रथम बैठक की अध्यक्षता कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पशुओं की सटीक गणना करने की आवश्यकता है और यह प्रावधान भी आवश्यक है कि जो अपनी गाय अथवा बैल छोड़ देता है, उसे पकड़ा जाए। उन्होंने कहा कि उन सभी गौ सदनों का पंजीकरण करने की आवश्यकता है, जो उचित प्रकार से संचालित किए जा रहे हैं और इनको चलाने के लिए सरकार के पास पर्याप्त धनराशि है। उन्होंने गौ सदनों के नियमित निरीक्षण पर जोर देते हुए कहा कि न केवल ज़िला स्तर के अधिकारी बल्कि मुख्यालय के अधिकारियों को भी निरीक्षण के लिए जाना चाहिए।


  • गौ वंश संवर्द्धन बोर्ड की प्रथम बैठक में बोले वीरभद्र सिंह
  • पशुओं की सटीक गणना करने की आवश्यकता पर बल
  • सीएम ने गौ सदनों के नियमित निरीक्षण पर दिया जोर  

सीएम ने कहा कि कांगड़ा ज़िला के नुरपूर के अंतर्गत खज्जियां में सरकार के नियंत्रण के अधीन चल रहे गौ सदन के विस्तार की आवश्यकता है, जहां अधिक शेड बनाने के साथ-साथ पर्याप्त स्टाफ की भी जरूरत है। उन्होंने कहा कि यह दुर्भाग्यपूर्ण है कि जो गाएं दूध देना बंद कर देती हैं और जो बैल हल जोतने योग्य नहीं रह जाते, लोग उन्हें  छोड़ देते हैं। सरकार ने गायों के संरक्षण और नई प्रजातियों के विकास के लिए बोर्ड का गठन किया है। इसके अंतर्गत स्थापित गौ सदनों पर भी नियंत्रण रखा जा रहा है। ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज विभाग के सचिव ओंकार चंद शर्मा ने जानकारी दी कि वर्तमान में प्रदेश में लगभग 130 गौ सदन हैं और गायों के लिए 95 और शेल्टर होम निर्मित किए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि सभी उपायुक्तों को निर्देश दिए गए हैं कि वे अपने संबंधित क्षेत्रों में सभी गौ सदनों का व्यक्तिगत रूप से निरीक्षण करें और गौ सदनों के मालिकों को इनका पंजीकरण करवाने के लिए प्रोत्साहित करें। बैठक में सुझाव आया कि गौ सदनों को आर्थिक रूप से सक्षम बनाने के लिए कदम उठाए जाएं। गैर-सरकारी सदस्यों ने सुझाव दिया कि चारे का विशेष रूप से प्रावधान किया जाए, जो गौ सदनों के संचालन के लिए मूलभूत आवश्यकता है। उनका यह भी सुझाव था कि सरकारी कर्मचारियों की राय ली जाए कि क्या वे अपनी आय से कुछ धनराशि स्वेच्छा से गौ सदनों को भेंट करना चाहते हैं। एक अन्य सुझाव में मंदिर, न्यासों से भी स्वेच्छिक रूप से गौ सदनों के संचालन अथवा अपनी आय का कुछ हिस्सा इनके संचालन के लिए देने का प्रस्ताव रखा जाए।

सिंचाई एवं जन स्वास्थ्य मंत्री विद्या स्टोक्स की पुत्री सुधा स्टोक्स ने भी कई सुझाव दिए और कहा कि वह अमेरिका में नवीनतम और कम लागत वाली ऐसी तकनीक का पता लगाने में मदद करेगी, जिससे अपनी गाय या बैल को आवारा छोड़ने वाले लोगों का पता लग सके।  ग्रामीण विकास एवं पंचायती राज मंत्री अनिल शर्मा, अतिरिक्त मुख्य सचिव डॉ. श्रीकांत बाल्दी एवं मनीषा नंदा, वन विभाग के प्रधान सचिव तरूण कपूर सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी बैठक में उपस्थित थे।

- Advertisement -

Facebook Join us on Facebook Twitter Join us on Twitter Instagram Join us on Instagram Youtube Join us on Youtube

हिमाचल अभी अभी बुलेटिन

Download Himachal Abhi Abhi App Himachal Abhi Abhi IOS App Himachal Abhi Abhi Android App

टेक्नोलॉजी / गैजेट्स / ऑटो

Himachal Abhi Abhi E-Paper


विशेष




सब्सक्राइब करें Himachal Abhi Abhi अलर्ट
Logo - Himachal Abhi Abhi

पाएं दिनभर की बड़ी ख़बरें अपने डेस्कटॉप पर

अभी नहीं ठीक है