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सरकार ! यहां नंगे पैर खड्ड पार करके स्कूल पहुंचते हैं बच्चे

सरकार ! यहां नंगे पैर खड्ड पार करके स्कूल पहुंचते हैं बच्चे

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वी कुमार/मंडी। करसोग उपमंडल की दुर्गम पंचायत मशोग के थाची और आसपास के गांवों के बच्चों को बारिश हो गर्मी हो या फिर आजकल की हाड़ कंपकपाती ठंड… नंगे पांव खड्ड पार करके स्कूल पहुंचना पड़ता है। थाची व आसपास के गांव के लोगों को जूते को हाथ में लिए खड्ड को पार करने के अलावा दूसरा कोई विकल्प नहीं है। इन क्षेत्रों में रहने वाले नौनिहाल शिक्षा प्राप्त करने के लिए खड्ड के दूसरी ओर बने फेगल स्कूल पहुंचते हैं। इन स्कूली बच्चों को खड्ड से पार करवाने के लिए अविभावकों को सारे कामकाज छोड़कर खड्ड के पास पहुंचना पड़ता है। ठंड के मौसम में नंगे पांव खड्ड को पार करना काफी मुश्किल हो जाता है।

फुटब्रिज न होने से खड्ड में होकर जाना बना मजबूरी

खड्ड के उफान पर होने के चलते अधिकतर स्कूली छात्र पुल के अभाव में कई दिनों स्कूल नहीं जा पाते। यदि ऐसी स्थिति में स्कूल जाना पड़ जाए तो फिर 6 किलोमीटर का अतिरिक्त पैदल सफर करना पड़ता है। इस खड्ड को पार करते वक्त एक युवक इसमें बह कर अपने प्राण गंवा चुका है लेकिन बावजूद इसके इन ग्रामीणों की सुध लेने वाला कोई नहीं है। शिक्षा के मंदिर तक शिक्षा ग्रहण करने पहुंच रहे नौनिहालों सहित क्षेत्र के युवाओं व बुजुर्गों के लिए पांगणा-फेगल खड्ड को पुल के अभाव में पार करना किसी बड़ी चुनौती से कम नहीं है।
इस खड्ड में 5 अन्य खड्डों का पानी भी मिलता है,जिसके चलते हल्की सी बरसात में यह खड्ड रौद्र रूप धारण कर लेती है। खड्ड पर पैदल चलने योग्य पुल का निर्माण न होने के चलते यहां के बाशिंदों को समझ नहीं आ रहा है कि चुने हुए प्रतिनिधि आखिरकार कहां और क्या विकास कार्य करवा रहे हैं। ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि समय रहते इस खड्ड पर पैदल चलने योग्य पुल का निर्माण प्राथमिकता के आधार पर किया जाए ताकि स्कूली छात्रों सहित ग्रामीणों को सुविधा मिल सके।

क्या कहती हैं प्रधान

ग्राम पंचायत मशोग की प्रधान पार्वती देवी ने बताया कि अगर यहां पर फुटब्रिज बनता है तो वद दो पंचायतों और विधानसभा क्षेत्रों को जोड़ने का काम करेगा। अभी तक पंचायत ने इस संदर्भ में कभी कोई प्रस्ताव पारित नहीं किया क्योंकि ग्रामीण यहां पर बड़े पुल की मांग कर रहे हैं। उन्होंने बताया कि वह प्रयास करेंगी कि पांगणा पंचायत के साथ मिलकर एक एस्टीमेट बनाकर स्वीकृति के लिए भेजा जाए ताकि पंचायतें अपने स्तर पर इस कार्य को करवा सकें और लोगों को फुटब्रिज का लाभ मिल सके।

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