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किसका है Eco-Tourism Project, जल्द चलेगा पता

किसका है Eco-Tourism Project, जल्द चलेगा पता

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शिमला। वन विभाग के ड्रीम प्रोजेक्ट यानी ईको टूरिज्म में वन विकास निगम का पेच फंसा हुआ है।अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि इस  प्रोजेक्ट को वन विभाग चलाएगा या फिर वन विकास निगम। इसी मसले पर ही फिर से पॉलिसी में संशोधन होना है। हालांकि प्रदेश सरकार ने ईको टूरिज्म पॉलिसी-2016 को फरवरी में लागू कर दी थी, लेकिन इसमें भी अब वन विभाग को खामियां दिखने लगी सरकार ने वन विभाग व वन विकास निगम को ईको टूरिज्म प्रोजेक्ट्स चलाने के लिए स्वीकृति भी दे दी है।  सूत्रों  के मुताबिक दिसंबर माह में होने वाली कैबिनेट की मीटिंग में ईको टूरिज्म पॉलिसी में संशोधन करने का एजेंडा लगेगा, उसके बाद ही नई नीति लागू होगी। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वन विकास निगम को कई साइट्स आवंटित करने के चलते वन विभाग ने आपत्ति जताई है। सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक वन विभाग ही प्रदेश में ईको टूरिज्म प्रोजेक्ट्स को चलाना चाहता है, लेकिन वन विकास निगम को भी अपना हिस्सा चाहिए। बताया गया कि ईको टूरिज्म पॉलिसी के तहत वन विभाग विभाग ही प्रोजेक्ट्स को चलाता है। ऐसे में अब प्रदेश सरकार जल्द ही संशोधित पॉलिसी लाएगी।

  • forest1ईको टूरिज्म पॉलिसी-2016 में सरकार करेगी संशोधन 

हालांकि प्रदेश के कुछेक क्षेत्रों में ईको टूरिज्म का करोबार चल रहा है, लेकिन अधिकांश उद्योगपतियों के पास है। उल्लेखनीय है कि 2016 की पॉलिसी के मुताबिक अभी तक 70 साइट्स चिन्हित कर दी है। बयान  ईको टूरिज्म पॉलिसी में संशोधन होना है। कौन काम करेगा, कैसे काम करना है और कौन बनाएगा, इसको लेकर अड़चने हैं। दिसंबर में होने वाली कैबिनेट मीटिंग में एजेंडे पर चर्चा होगी। प्रधान सचिव वन एवं पर्यावरण तरुण कपूर का कहना है कि मंत्रिमंडल की मंजूरी के बाद ही नई नीति लागू की जाएगी।

वर्तमान में 11 प्रोजेक्ट्स हैं स्वीकृत

fffप्रदेश में वर्तमान में ईको टूरिज्म के 11 प्रोजेक्ट्स स्वीकृत हैं। इनमें से छह कार्यरत हैं, जबकि पांच पर काम शुरू नहीं हो पाया। वन विश्राम गृह डलहौजी, शोघी कैंपिंग साइट शिमला, बड़ोग कैंपिंग साइट सोलन, चेवा स्वचयनित साइट सोलन, मोतीकूना स्व चयनित साइट सोलन तथा पोटरहिल साइट शिमला के नाम से ईको टूरिज्म प्रोजेक्ट चल रहे हैं। जबकि सोनू बंगला सोलन, कांगड़ा विश्राम गृह धर्मशाला, धुआं देवी विश्राम गृह मंडी, डलहौजी कैंपिंग साइट डलहौजी तथा मैकलोडगंज कैंपिंग साइट धर्मशाला का यह प्रोजेक्ट अभी लंबित हैं।

बीडिंग में चाहिए 80 में से 24 अंक 

सूत्रों से मिली जानकारी के मुताबिक संशोधित ईको टूरिज्म पॉलिसी में बीडिंग को लेकर शर्तें नहीं बदलेगी। प्रदेश में अब तक चल रहे ईको टूरिज्म प्रोजेक्ट्स को हरी झंडी इस आधार पर मिली, जिनके अंक 80 में से 24 थे। प्राप्त जानकारी के मुताबिक पूर्व में इच्छुक पार्टियों से साइटवार तकनीकी व वित्तीय बिड मंगवाई गई थी। बताया गया कि बीडिंग के दौरान अंकों की शर्तें पहले की तरह लागू होगी। अभी तक सिर्फ नारकंडा नेचर कैंप को ही 26 लाख में ऑक्शन कर दी है।

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