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बदलेगा पीजीटी का नाम, उप प्रधानाचार्य के पद होंगे सृजित लेक्चरर को भी तोहफा

बदलेगा पीजीटी का नाम, उप प्रधानाचार्य के पद होंगे सृजित लेक्चरर को भी तोहफा

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पालमपुर। सीएम जयराम ठाकुर ने चौधरी सरवण कुमार कृषि विश्वविद्यालय के सभागार में सार्वभौमिक, निःशुल्क, अनिवार्य तथा गुणात्मक शिक्षा पर राज्य स्तरीय शिक्षा सम्मेलन को संबोधित करते हुए घोषणा की कि शिक्षा विभाग में कार्यरत पीजीटी का नाम बदल कर प्रवक्ता किया जाएगा। सम्मेलन का आयोजन प्रदेश स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन द्वारा किया गया था। सीएम जयराम ठाकुर ने गुरु नानक देव जयंती के अवसर पर प्रदेश के लोगों विशेषकर सिख समुदाय को बधाई दी।

सीएम ने कहा कि उन्हें राज्य में विशेषकर शिक्षा के क्षेत्र में हुए विकास पर गर्व है। प्रदेश ने शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक तथा मात्रात्मक दोनों क्षेत्रों में बेहतर कार्य किया है। उन्होंने कहा कि शिक्षण संस्थानों में अधोसंरचना स्तरोन्यन किया गया है और हजारों प्रशिक्षित अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया आरंभ की गई है, ताकि प्रत्येक शिक्षण संस्थान में पर्याप्त संख्या में अध्यापकों की तैनाती सुनिश्चित बनाई जा सके।

जयराम ठाकुर ने कहा कि प्रदेश सरकार ने हिमाचल प्रदेश को देश का शिक्षा हब बनाने के लिए अनेक योजनाएं आरंभ की है। सीएम जयराम ठाकुर ने कहा कि राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशालाओं में उप प्रधानाचार्य का पद सृजित किया जाएगा। उन्होंने स्कूल लेक्चरर के पदोन्नति कोटे को 50 से बढ़ाकर 60 प्रतिशत करने की भी घोषणा की। उन्होंने कम परिणाम वाले अध्यापकों की वार्षिक वृद्धि पर लगी रोक को एक बार के लिए वापस लेने की घोषणा की।सीएम ने इस अवसर पर सार्वभौमिक निःशुल्क अनिवार्य एवं गुणात्मक शिक्षा की स्मारिका का भी विमोचन किया। इस स्मारिका का सम्पादन प्रेम शर्मा द्वारा किया गया है।

सीएम को इस अवसर पर हिप्र स्कूल लेक्चरर एसोसिएशन के सदस्यों की ओर से मुख्यमंत्री राहत कोष के लिए पांच लाख का चेक भेंट किया।मुख्यमंत्री ने इस अवसर पर प्रतिभावान विद्यार्थियों को सम्मानित किया। शिक्षा मंत्री सुरेश भारद्वाज ने कहा कि प्रदेश को देश की एक प्रख्यात पत्रिका द्वारा कराए गए स्टेट ऑफ स्टेट सर्वेक्षण में देश के बड़े राज्य की श्रेणी में शिक्षा के क्षेत्र में सर्वश्रेष्ठ आंका गया है तथा इसके लिए राज्य को पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में आज लगभग 24 सरकारी व निजी विश्वविद्यालय के अलावा 18000 से अधिक शिक्षण संस्थान है, परन्तु आज शिक्षा के क्षेत्र में गुणात्मक सुधार की आवश्यकता है।

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